आजादी के बाद से ही कांग्रेस और बीजेपी ने देश की सत्ता संभाली है। दोनों पार्टियां देश की मुख्य पार्टियां हैं। चुनावी में दोनों पार्टियां एक दूसरे की धुर विरोधी हैं। शायद किसी ने इनके साथ आने की कल्पना भी नहीं की होगी। वहीं बीजेपी पर आए दिन निशाना साधने वाले ओवैसी के साथ आने का कोई कयास नहीं लगा सकता था। लेकिन महाराष्ट्र में यह दोनों घटना हकीकत साबित हो गई हैं। महाराष्ट्र में निकाय चुनाव का शोर है। अंबरनाथ सीट पर बीजेपी और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया है।अकोला में अकोट सीट पर बीजेपी ने ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का समर्थन लिया है। बीजेपी के इस फैसले को ऐतिहासिक माना जाए या कोई नई रणनीति अथवा कुछ और? यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
बता दें कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के लिए बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) ने गठबंधन का ऐलान किया था। लेकिन अंबरनाथ नगर पालिका परिषद सीट पर कहानी पलट गई। बीजेपी और कांग्रेस ने एकनाथ शिंदे को झटका देते हुए एक दूसरे का हाथ थाम लिया। मामले में रोष जताते हुए शिंदे गुट ने इसे ‘अभद्र युति’ बताया है।
इसके अलावा महाराष्ट्र के अकोला जिले की अकोट नगर पालिका में भी अनोखा खेल हुआ। निकाय चुनाव में बीजेपी की माया धुले ने मेयर का पद जीत लिया, लेकिन बहुमत की कहानी यहीं फंस गई। 35 सदस्यीय सदन में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। बहुमत पूरा करने के लिए बीजेपी ने 5 पार्षदों वाली AIMIM को भी साथ ले लिया।
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अंबरनाथ नगर परिषद को एकनाथ शिंदे की शिवसेना का गढ़ माना जाता है। डिप्टी सीएम और शिवसेना अध्यक्ष शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे अंबरनाथ से ही सांसद हैं। निकाय चुनाव में अंबरनाथ सीट पर शिंदे की शिवसेना को सबसे ज्यादा पार्षद चुने गए। लेकिन बहुमत पूरा नहीं कर पाए। शिवसेना और बीजेपी के बीच गठबंधन की चर्चा चली लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
बीजेपी के इस फैसले से शिंदे गुट में भारी नाराजगी शुरू हो गई है। शिंदे के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को ‘अभद्र युति’ बताया है। वहीं बीजेपी के उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि बीजेपी ने कई बार शिवसेना से गठबंधन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन शिवसेना ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। स्पष्ट जवाब न मिलने की स्थिति में बीजेपी ने यह कदम उठाया है।
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