महाराष्ट्र सरकार ने अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया है कि इस महापर्व के लिए करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें.
प्रभु श्रीराम के पदस्पर्श से पावन माने जाने वाले नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में तैयारियां तेज हो गई हैं. तपोवन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित संत समिति की बैठक के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की और कहा कि इस बार का कुंभ मेला ‘भव्य, दिव्य और अविस्मरणीय’ होगा.
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं को निर्मल और प्रवाही गोदावरी नदी में स्नान की सुविधा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी का प्रवाह बारहमासी बनाए रखने, कुशावर्त के लिए जल शुद्धिकरण परियोजना और नदी के संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं.
इसके साथ ही, नाशिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग, परिक्रमा मार्ग, रेलवे स्टेशन सुविधाओं में सुधार, घाटों की संख्या और लंबाई बढ़ाने, पुराने मंदिरों के संरक्षण और मंदिरों तक जाने वाले रास्तों के चौड़ीकरण जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है. साथ ही ओझर हवाई अड्डा के विस्तार की योजना भी इस विकास का अहम हिस्सा है.
कुंभ मेले के दौरान साधु-संतों के लिए बनाए जाने वाले साधुग्राम को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है. इसके लिए स्थायी भूमि अधिग्रहण किया जाएगा, जहां सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि संत समाज को बेहतर व्यवस्था मिल सके.
सरकार ने प्रयागराज की तर्ज पर कुंभ मेला विकास प्राधिकरण का गठन किया है. बेहतर और सुव्यवस्थित योजना बनाने के लिए नाशिक प्रशासन की टीम प्रयागराज का दौरा भी कर चुकी है, जिससे वहां के सफल मॉडल को अपनाया जा सके.
सरकार का अनुमान है कि इस बार पिछले कुंभ मेले की तुलना में करीब 10 गुना अधिक श्रद्धालु नाशिक-त्र्यंबकेश्वर पहुंच सकते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक, सुरक्षा, स्वच्छता और आवास जैसी व्यवस्थाओं को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कुंभ मेला केवल आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक चेतना का सबसे बड़ा पर्व है. उन्होंने संतों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि संत समाज ने सदियों से भारतीय परंपराओं और मूल्यों को जीवित रखा है.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला न केवल भव्य होगा, बल्कि श्रद्धालुओं और संत समाज के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगा. साफ है कि महाराष्ट्र सरकार इस आयोजन को वैश्विक स्तर के आध्यात्मिक महाकुंभ के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है.










