रेस्तरां के बाद अब अस्पतालों पर एक्शन? महाराष्ट्र FDA चीफ ने दवाओं के रेट पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) चीफ तुकाराम मुंडे ने अस्पताल के सामान और दवाओं की कीमतों पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि हो सकता है इलाज के दौरान मरीज सामान की असली कीमत जाने बिना ही ट्रेड प्राइस से कई गुना पैसे चुका रहे हैं.
Written By: Varsha Sikri|Updated: Sep 16, 2026 12:22
Edited By : Varsha Sikri|Updated: Sep 16, 2026 12:22
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महाराष्ट्र FDA चीफ ने दवाओं के रेट पर उठाए सवाल
(Photo: X/@mumbaiheritage )
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महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) चीफ तुकाराम मुंडे ने अस्पताल के सामान और दवाओं की कीमतों पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि हो सकता है इलाज के दौरान मरीज सामान की असली कीमत जाने बिना ही ट्रेड प्राइस से कई गुना पैसे चुका रहे हैं. दरअसल, महाराष्ट्र में FDA का ताबड़तोड़ एक्शन जारी है. उनकी टीम लगातार रेस्टॉरेंट, ऑनलाइन डिलीवरी समेत कई चीजों का मुआयना कर रही है. मुंडे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए कहा- अस्पताल के बिल में जो सबसे महंगा हिस्सा होता है, वो शायद वहां तक पहुंचता ही नहीं है.
The most expensive part of a hospital bill may never touch the hospital at all.
A patient admitted for care has no way of knowing whether the price on a medical consumable reflects its actual cost or a markup fixed long before it ever reached the ward. That gap in information…
IAS अधिकारी ने लिखा, ”अस्पताल के बिल का सबसे महंगा हिस्सा शायद अस्पताल तक कभी पहुंचता ही नहीं है. इलाज के लिए भर्ती मरीज को ये पता लगाने का कोई तरीका नहीं होता कि किसी मेडिकल सामान की कीमत उसकी असल लागत है या उसमें कोई ऐसा एक्सट्रा प्राइस जुड़ा है जो वार्ड तक पहुंचने से बहुत पहले ही तय कर दिया गया था. जानकारी का ये अंतर असल में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा है.” FDA ने अस्पतालों के सामानों पर एक सर्वे किया, जिसका जिक्र तुकाराम मुंडे ने भी किया. सर्वे में कुछ प्रोडक्ट्स के ट्रेड प्राइस और MRP में जमीन और आसमान का अंतर नजर आया, जिसकी वजह से मरीजों की जेब पर काफी असर पड़ रहा है.
सर्वे में क्या आया?
तुकाराम मुंडे ने जो आंकड़े बताए उसके मुताबिक, 11.05 रुपये की ट्रेड प्राइस वाले IV इन्फ्यूजन सेट की MRP 325 रुपये थी यानि इसका एक्सट्रा प्राइस 2841 प्रतिशत है. 6.75 रुपये में खरीदी गई सिरिंज की MRP 57.20 रुपये थी, जबकि 29.41 रुपये में खरीदे गए कैथेटर की MRP 310 रुपये थी. मुंडे ने कहा, ”ये ऐसी खरीदारी नहीं हैं जिन्हें अपनी मर्जी से चुना जा सके.” उन्होंने बताया कि मेडिकल केयर लेने वाले मरीज अक्सर कीमतों की तुलना नहीं कर पाते, दूसरे विकल्प नहीं देख पाते या मेडिकल प्रोडक्ट पर लिखी कीमत पर सवाल नहीं उठा पाते. उन्होंने कहा कि MRP अक्सर मैन्युफैक्चरर और डिस्ट्रीब्यूटर तय करते हैं और ये ट्रेड प्राइस से अलग हो सकती है, जिससे एक ऐसा बिना वजह का मार्जिन बन जाता है.