सीएम फडणवीस अपने ही विभाग में नहीं कर पाए सुधार, दोनों डिप्टी सीएम भी फेल, रिपोर्ट में खुलासा

महाराष्ट्र में सीएम देवेंद्र फडणवीस का विभाग सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। क्वालिटी काउंसिल की ओर से जारी की गई गुणवत्ता रैंकिंग में दोनों डिप्टी सीएम के विभाग भी फिसड्डी साबित हुए हैं। ऐेसे में बैठे-बैठाए विपक्ष को महायुति सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया।

Maharashtra 100-day reform evaluation

Maharashtra 100-day reform evaluation

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महाराष्ट्र में महायुति सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा शुरू किए गए 100 दिवसीय कार्यालयीन सुधार कार्यक्रम का मूल्यांकन पूरा हो गया है। भारतीय गुणवत्ता परिषद (Quality Council of India) द्वारा राज्य के कुल 48 विभागों के प्रदर्शन का आकलन किया गया। यह मूल्यांकन विभागीय वेबसाइट सुधार, कार्यालयीन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता, शिकायत निवारण प्रणाली, तकनीकी नवाचार, निवेश प्रोत्साहन और जनसुविधा बढ़ाने जैसे 10 प्रमुख मानकों पर आधारित था।

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर इस मूल्यांकन की सूची साझा की। इस लिस्ट में जहां कुछ विभागों ने शानदार प्रदर्शन कर सरकार को गौरवान्वित किया, वहीं कई बड़े और अहम मंत्रालय बुरी तरह फेल हो गए।

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सीएम-दोनों डिप्टी सीएम के विभाग फेल

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का खुद का सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) इस मूल्यांकन में फेल हो गया। इस विभाग को सिर्फ 24 प्रतिशत अंक मिले, जो सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले विभागों में शामिल रहा।

इसी तरह, डिप्टी सीएम अजित पवार के अधीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को 33 प्रतिशत अंक मिले। वहीं, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का प्रमुख मंत्रालय नगरविकास विभाग (Urban Development Department) भी सिर्फ 34 प्रतिशत के स्कोर के साथ प्रदर्शन में निचले स्तर पर रहा। तीनों शीर्ष नेताओं के महत्वपूर्ण विभागों का इस तरह कमजोर प्रदर्शन सरकार के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टॉप 5 विभाग:

महिला एवं बाल कल्याण विभाग (एनसीपी) – 100 में से 80 अंक के साथ शीर्ष पर रहा। मंत्री अदिति तटकरे के नेतृत्व में इस विभाग ने उल्लेखनीय काम किया।

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लोक निर्माण विभाग (बीजेपी) – बुनियादी ढांचे के कार्यों में प्रभावी सुधार के चलते यह विभाग दूसरे स्थान पर रहा।

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कृषि विभाग (एनसीपी) – किसानों के हित में नई योजनाओं और तकनीकी पहल के कारण तीसरा स्थान पाया।

ग्राम विकास विभाग (बीजेपी) – ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के सशक्त क्रियान्वयन के लिए चौथा स्थान मिला।

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परिवहन विभाग (शिंदे गुट) और पोर्ट विभाग (बीजेपी) – दोनों को संयुक्त रूप से पांचवां स्थान प्राप्त हुआ।

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