municipal elections Result: BMC चुनाव में इस बार भाजपा और शिंदे गुट की महायुति कड़ी चुनौती दे रही है. एकनाथ शिंदे के लिए यह मौका है यह साबित करने का कि असली शिवसैनिक और मतदाता उनके साथ हैं. अब तक आए रुझानों में तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है, लेकिन सियासी मायने और गहरे हैं. बीएमसी के ये रुझान न सिर्फ मुंबई, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक BJP 90 सीटों पर आगे है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) 29 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. अगर यही रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो बीएमसी की सत्ता महायुति के हाथ में जा सकती है. यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त मानी जाएगी.
#WATCH | Maharashtra civic body elections | Delhi: BJP National General Secretary Tarun Chugh says, "It is a day of celebration… Today, in Maharashtra, the people of all Municipal Committees and Municipal Corporations have blessed PM Modi's policies, his nationalism, and his… pic.twitter.com/UU1CxnncyM
---विज्ञापन---— ANI (@ANI) January 16, 2026
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मतगणना के नतीजों में छिपे हैं 3 बड़े संदेश
शिंदे गुट की पकड़ अब कहीं ज्यादा मजबूत: मतगणना के नतीजों में महाराष्ट्र की राजनीति के लिए तीन बड़े और साफ संदेश छिपे हैं. पहला और सबसे अहम संकेत यह है कि शहरी राजनीति में शिवसेना पर एकनाथ शिंदे गुट की पकड़ अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है. जिन इलाकों को कभी उद्धव ठाकरे का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां भी शिंदे गुट के उम्मीदवारों का बेहतर प्रदर्शन यह बताता है कि संगठन और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा अब उनके साथ खड़ा है. इससे यह साफ हो गया है कि शिंदे गुट सिर्फ सत्ता के सहारे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी अपनी पकड़ बना चुका है.
प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनकर उभरी BJP
दूसरा बड़ा संदेश यह है कि BJP मुंबई की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है. बीएमसी जैसे चुनाव में BJP का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आना यह दर्शाता है कि शहरी मतदाता BJP के नेतृत्व और विकास के एजेंडे पर भरोसा जता रहे हैं. यह नतीजे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस दावे को भी मजबूत करते हैं कि मुंबई और महाराष्ट्र के बड़े शहरों में विकास की राजनीति को प्राथमिकता मिल रही है और BJP शहरी राजनीति की धुरी बनती जा रही है.
आगे की राजनीति में मुकाबला तीखा होना तय
तीसरा और उतना ही महत्वपूर्ण संदेश यह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद उद्धव ठाकरे को पूरी तरह कमजोर नहीं किया जा सका. कुछ वार्डों और इलाकों में उनके गुट का टिके रहना यह संकेत देता है कि उनका एक समर्पित वोट बैंक अब भी मौजूद है. इसका मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति एकतरफा नहीं होगी, बल्कि मुकाबला और ज्यादा कड़ा और दिलचस्प होने वाला है. ये नतीजे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक रणनीतियों को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं.
उद्धव ठाकरे की पार्टी के लिए मिली-जुली तस्वीर
इस बार उद्धव ठाकरे ने अपने भाई राज ठाकरे की MNS के साथ गठबंधन किया है. शिवसेना (UBT) गठबंधन 71 सीटों पर आगे चल रहा है. पार्टी भले ही सत्ता के आंकड़े से दूर दिख रही हो, लेकिन अकेले दम पर इतना प्रदर्शन यह दिखाता है कि मुंबई में उद्धव ठाकरे का कोर वोट बैंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यह बढ़त भविष्य की राजनीति में उद्धव गुट को मजबूत नैरेटिव देने का काम करेगी. वहीं उद्धव ठाकरे के सामने यह चुनौती भी है कि नाम और चुनाव चिह्न बदलने के बाद भी वे अपने समर्थकों को साथ रख पाए हैं या नहीं.
BJP का दबदबा, लेकिन अकेले बहुमत से दूर
BJP का 85 सीटों पर आगे रहना यह साबित करता है कि पार्टी मुंबई की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर रही है. अब तक के परिणामों से यह स्पष्ट है कि भाजपा ने अपना दबदबा तो कायम किया है, लेकिन अपने दम पर बहुमत से अभी भी दूर है. ये चुनाव रुझान बताते हैं कि मुंबई की जनता ने ‘विकास और डबल इंजन सरकार’ को प्राथमिकता दी है. भाजपा का अकेले बहुमत से दूर रहना यह भी संकेत देता है कि मुंबई जैसे विविधतापूर्ण शहर में किसी एक पार्टी का पूर्ण वर्चस्व अभी भी एक चुनौती है, और भविष्य की राजनीति ‘गठबंधन’ के इर्द-गिर्द ही घूमेगी.










