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मुंबई

अजित पवार की आखिरी बातचीत, ममता बनर्जी का किस्सा सुन रह गए थे दंग; बोले- ‘राजनीति में ये क्या हो रहा है’

अजित पवार ने अपने आखिरी इंटरव्यू में बंगाल की राजनीति के किस्से सुनकर हैरानी जताई थी. उन्होंने सिर पर हाथ रखकर अचरज से कहा था कि 'बाप रे! राजनीति में कैसे दिन आ गए हैं.'

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Written By: Raja Alam Updated: Jan 28, 2026 18:21

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह यकीन करना मुशकिल है कि कल तक जो अजित पवार नगर निगम चुनाव की बैठकों में सक्रिय थे, वे अब हमारे बीच नहीं रहे. मंगलवार को मुंबई में कैबिनेट की मीटिंग खत्म करने के बाद वे बुधवार सुबह बारामती के लिए निकले थे. 5 तारीख को होने वाले जिला परिषद चुनाव के लिए वे काफी उत्साहित थे, क्योंकि पुणे जिला परिषद को पवार परिवार का अभेद्य किला माना जाता है. 27 तारीख को नामांकन वापसी का काम पूरा हो चुका था और आज से उन्हें बारामती में धुआंधार चुनाव प्रचार शुरू करना था. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के वक्त हुए हादसे ने इस सफर को हमेशा के लिए रोक दिया.

अजित पवार का वह आखिरी किस्सा

अजित पवार से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज सबकी आंखों में नमी ला रहा है. पुणे के उनके ‘जिजाई’ बंगले पर जब पत्रकार साहिल जोशी और उनकी टीम इंटरव्यू के लिए पहुंची, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनका आखिरी रिकॉर्डेड इंटरव्यू साबित होगा. इंटरव्यू शुरू होने से पहले अनौपचारिक बातचीत में जब बंगाल की राजनीति का जिक्र छिड़ा, तो अजित पवार काफी चौंक गए थे. उन्हें जब बताया गया कि कैसे ममता बनर्जी खुद उस जगह पहुंच गईं जहां ईडी की रेड चल रही थी और जांच एजेंसी के हाथ से कागजात और सबूत लेकर चली गईं, तो वे अपनी हैरानी छिपा नहीं पाए.

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राजनीति के गिरते स्तर पर जताई थी चिंता

ममता बनर्जी वाला किस्सा सुनकर अजित पवार ने अपने सिर पर हाथ रख लिया था. उन्होंने बेहद अचरज के साथ कहा था, ‘अरे बाप रे, ये सब भी आजकल राजनीति में चल रहा है, कैसे दिन आ गए हैं.’ यह छोटी सी प्रतिक्रिया उनके सरल स्वभाव और राजनीति को लेकर उनकी अपनी सोच को दर्शाती थी. इसके बाद इंटरव्यू की औपचारिक शुरुआत हुई, जो अब इतिहास के पन्नों में उनके आखिरी सार्वजनिक संवाद के रूप में दर्ज हो चुकी है. उस दिन उनकी बातों में चुनाव को लेकर जोश था और बारामती के विकास के लिए कई योजनाएं थीं, लेकिन आज वह बंगला और बारामती की गलियां खामोश हैं.

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अधूरा रह गया आखिरी चुनाव प्रचार

अजित पवार का बारामती से गहरा लगाव था और वे हर चुनाव को पूरी गंभीरता से लेते थे. इस बार के जिला परिषद चुनाव उनके लिए साख का सवाल थे, इसलिए उन्होंने खुद कमान संभाली हुई थी. उनका विमान हादसे का शिकार उस वक्त हुआ जब वे अपनी कर्मभूमि की धरती को छूने ही वाले थे. इंडिया टुडे को दिया वह आखिरी इंटरव्यू अब उनकी यादों का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है. एक ऐसा नेता जो जमीन से जुड़ा था और हर छोटी-बड़ी राजनीतिक घटना पर पैनी नजर रखता था, उसका इस तरह चले जाना महाराष्ट्र के एक बड़े राजनीतिक युग का अंत माना जा रहा है.

First published on: Jan 28, 2026 06:21 PM

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