पानी के लिए तरसे गांव वाले, अनोखे अंदाज में किया विरोध

गर्मी में पानी की एक-एक बूंद अमूल्य हो जाती है लेकिन जब महीनों तक नल सूखे रहें तो हालात बेकाबू हो जाते हैं। मध्य प्रदेश के बिशनखेड़ी गांव में ऐसा ही हुआ जहां पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने अनोखे अंदाज में विरोध किया जिससे प्रशासन को उनकी मांग सुननी पड़ी।

Villagers Protest

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शब्बीर अहमद, भोपाल

गर्मी की तपिश के साथ ही कई गांवों में पानी की किल्लत बढ़ने लगती है, लेकिन जब महीनों तक एक बूंद पानी न मिले, तो हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिशनखेड़ी गांव के लोगों की हालत भी कुछ ऐसी ही हो गई। पानी की समस्या से जूझ रहे इन ग्रामीणों ने जब बार-बार प्रशासन से गुहार लगाई और कोई हल नहीं निकला, तो उन्होंने अनोखे अंदाज में विरोध करने का फैसला किया। उन्होंने अपने आवेदनों की लंबी “पूंछ” बनाकर जमीन पर रेंगते हुए प्रदर्शन किया।

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आवेदनों की “पूंछ” बनाकर किया प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिशनखेड़ी गांव के लोगों ने जल संकट को लेकर एक अनोखा प्रदर्शन किया। पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने अपने आवेदनों की लंबी “पूंछ” बनाकर अजगर की तरह जमीन पर रेंगते हुए भोपाल स्थित कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई और बताया कि वे पिछले दो महीनों से पानी की समस्या का हल निकालने की अपील कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए मौके पर कई लोग इकट्ठा हो गए और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा।

गांव में सूखे जल स्रोत, प्रशासन बेखबर

ग्रामीणों का कहना है कि सीहोर में जल संकट पिछले दो महीने से बना हुआ है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन न तो कोई टैंकर भेजा गया और न ही कोई स्थायी समाधान निकाला गया। गांव में पानी के स्रोत सूख चुके हैं, जिससे पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पानी मिलना मुश्किल हो गया है। इस परेशानी से तंग आकर ग्रामीणों ने अनोखा विरोध करने का फैसला किया, ताकि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचे।

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आवाज उठाने पर धमकियां, ग्रामीणों का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जब उन्होंने इस समस्या को उठाने की कोशिश की तो प्रशासन ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। इतना ही नहीं जब ग्रामीणों ने बार-बार आवाज उठाई तो उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने और उनके घर तोड़ने की धमकी दी। इस डर और लाचारी के बावजूद, ग्रामीण अपने हक की लड़ाई लड़ने भोपाल पहुंचे और कमिश्नर से गुहार लगाई कि उनकी समस्या का समाधान किया जाए।

कमिश्नर का आश्वासन, लेकिन ग्रामीण अब भी आशंकित

प्रदर्शन के बाद कमिश्नर कार्यालय के अधिकारियों ने ग्रामीणों की बात सुनी और जल्द ही इस मुद्दे को हल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों से बातचीत करके गांव में पानी की समस्या का समाधान किया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते वे संघर्ष जारी रखेंगे। जल संकट जैसी गंभीर समस्या को हल करने में देरी से ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और अगर जल्द समाधान नहीं मिला तो वे और बड़े आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं।

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