इंसान और जानवर के रिश्ते की अनोखी मिसाल सिरोंज में देखने को मिली. भवानी नगर मोहल्ले के किसान नवल सिंह मालवीय ने अपनी पालतू बकरी की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार से लेकर तेहरवीं तक सब कुछ इंसानों की तरह किया. तेहरवीं के इस आयोजन में करीब 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी. नवल सिंह की बकरी “कटोरी उर्फ चमेली” 3 अगस्त को चल बसी. नवल ने उसे 20 साल तक पाला. वो बकरी उनके लिए बेटी जैसी थी. घर में पलंग पर सोती थी और हमेशा परिवार के साथ रहती थी. तेहरवीं के इस आयोजन में करीब 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी.
20 साल तक बेटी की तरह रही ‘कटोरी’
नवल सिंह की पालतू बकरी “कटोरी उर्फ चमेली” का 3 अगस्त को निधन हो गया था. नवल सिंह के अनुसार, उन्होंने उसे करीब 20 साल तक पाला था. वह उनके लिए सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि घर की बेटी जैसी थी. कटोरी घर में पलंग पर सोती थी और हमेशा परिवार के बाकी लोगों के साथ ही रहती थी. नवल सिंह ने भावुक होते हुए कहा, “जब कटोरी का निधन हुआ, तो ऐसा लगा जैसे हमारे घर का ही कोई खास सदस्य हमें छोड़कर चला गया हो.”
गंगा में विसर्जित कीं अस्थियां, छपवाई शोक पत्रिका
कटोरी की मौत के बाद नवल सिंह ने बाकायदा प्रशासन से अनुमति लेकर उसका दाह संस्कार किया. इसके बाद वे उसकी अस्थियां लेकर पवित्र गंगा नदी पहुंचे और पूरे विधि-विधान से अस्थि विसर्जन किया. 15 अगस्त को गंगाजली खोलकर तेहरवीं के कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों को आमंत्रित करने के लिए बाकायदा शोक पत्रिका भी छपवाई गई थी.
500 लोगों को कराया गया भोज
तेहरवीं के इस आयोजन में करीब 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी. आज के दौर में जब कई बार बुजुर्गों तक को अपनों का साथ नसीब नहीं होता, ऐसे में एक बेजुबान पशु के प्रति इतना गहरा लगाव देखकर हर कोई नवल सिंह की सराहना कर रहा है. रिश्तेदार और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में तेहरवीं में पहुंचे और नवल सिंह के इस संवेदनशील कदम की प्रशंसा करते हुए उनका ढांढस बंधाया.