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MP News: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बाड़े में शिफ्ट किए गए चीते, रेडियो काॅलर भी हटाई

MP News: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों को खुले जंगल से पकड़कर बाड़े में शिफ्ट किया गया है। वहीं 6 चीतों के रेडियो काॅलर हटाए जा चुके हैं। कूनो में वन विभाग की टीम नामीबिया और साउथ अफ्रीका से आए एक्सपर्ट के साथ चीतों की जांच कर रही है। फिलहाल […]

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MP News: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों को खुले जंगल से पकड़कर बाड़े में शिफ्ट किया गया है। वहीं 6 चीतों के रेडियो काॅलर हटाए जा चुके हैं। कूनो में वन विभाग की टीम नामीबिया और साउथ अफ्रीका से आए एक्सपर्ट के साथ चीतों की जांच कर रही है। फिलहाल 11 बाड़े में अभी कुल 11 चीते हैं। चीतों को मानसून सीजन तक बाड़े में ही रखा जा सकता है।

कोर्ट ने लगाई थी फटकार

बता दें कि 3 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट चीतों की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि राजनीति से ऊपर उठकर कूनो से कुछ चीतों को राजस्थान या अन्य जगह शिफ्ट करने का विचार करना चाहिए। आपको राजस्थान में क्या दिक्कत है? सिर्फ इसलिए कि राजस्थान में विपक्षी दल की सत्ता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप चीतों के लिए कुछ सोचना ही बंद कर देंगे।

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गर्दन से हटाए जा रहे रेडियो काॅलर

कोर्ट ने आगे कहा कि नामीबिया से जितने चीते लाए गए थे, उनमें से 40 फीसदी की मौत हो चुकी है। जबकि इन्हें यहां लाए अभी एक साल भी नहीं हुआ है। बता दें कि रेडियो काॅलर से नर चीते तेजस और सूरज की गर्दन पर घाव के निशान मिले हैं। इसके बाद इनको हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इससे पहले अधिकारियों ने रेडियो काॅलर से चीतों की मौत होने को नकार दिया था।

प्रोजेक्ट ‘चीता’ के तहत लाए गए थे भारत

उल्लेखनीय है कि चीतों को दक्षिण अफ्रीका से एक समझौते के तहत भारत लाया गया था। कूनो पार्क में लाए जाने के बाद चीतों अलग-अलग रखा गया था। नामीबिया से लाए गए चीतों को पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इस अवसर पर सीएम शिवराज सिंह चैहान, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे।

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बता दें कि नामीबिया से कुल 8 चीते भारत लाए गए थे। जबकि दक्षिण अफी्रका से 12 चीते भारत लाए गए थे। इनमें 10 नर और 10 मादा चीता शामिल थे। इनमें से अब तक 9 चीतों की मौत हो चुकी हैं। जबकि 11 चीतों को बचाने के लिए वन विभाग के विशेषज्ञ कवायद में जुटे हैं।

First published on: Jul 23, 2023 12:52 PM

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