मस्जिद बनाने के लिए ध्वस्त किए गए मंदिर… तोड़ी मूर्तियां, 1000 साल पुरानी भोजशाला पर ASI सर्वे में बड़ा खुलासा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर में विचाराधीन इस मामले में 2024 के 98 दिवसीय सर्वे के बाद 2189 पन्नों की रिपोर्ट पेश हुई. दोनों पक्षों से आपत्तियां मांगी गई हैं, अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.

Dhar Bhojshala

मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग में स्थित धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला पर विवाद फिर गरमाया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ताजा रिपोर्ट ने दावा किया है कि यहां प्राचीन मंदिर और शैक्षणिक मठ को मुगल-पूर्व काल में तोड़ दिया गया, मूर्तियां नष्ट की गईं और उस स्थान पर मस्जिद और मजार बना दिए गए. इस दावे को मजबूती अब्दुल्ला शाह चंगाल के मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगा शिलालेख देता है, जो महमूद खिलजी (1436-1469) के शासनकाल का है.

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1000 साल पुरानी भोजशाला को लेकर बड़ा खुलासा


करीब 1000 साल पुरानी भोजशाला का इतिहास राजा भोज से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने 1010 से 1055 ई. के बीच मालवा में सरस्वती सदन की स्थापना करवाई. वर्तमान में सरस्वती सदन को भोजशाला कहा जाता है. 1034 ई. में यहां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई थी. ASI रिपोर्ट के खंड-चार, पृष्ठ 260 पर दर्ज शिलालेख की 17वीं-18वीं पंक्तियां साफ बताती हैं कि प्राचीन धार्मिक मंदिर और मठ में देवमूर्तियां थीं, जिन्हें सेना के साथ आए शासक ने ध्वस्त कर मस्जिद में तब्दील कर दिया. फारसी शिलालेख (हिजरी 859/1455 ई.) का हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद रिपोर्ट में शामिल है.

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हाई कोर्ट में पेश की गई 2189 पन्नों की रिपोर्ट


मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर में विचाराधीन इस मामले में 2024 के 98 दिवसीय सर्वे के बाद 2189 पन्नों की रिपोर्ट पेश हुई. दोनों पक्षों से आपत्तियां मांगी गई हैं, अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी. सर्वे में मिले अवशेष मंदिर शैली के खंभे, क्षतिग्रस्त देवाकृतियां, फिर से इस्तेमाल किए गए पत्थरों की मूल संरचना, हिंदू स्वरूप की ओर इशारा करते हैं. खिड़की फ्रेम पर बची मूर्तियां भी यही कहानी कहती हैं.

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सेवानिवृत्त ASI अधिकारी डीके रिछारिया कहते हैं, ‘भोजशाला का मूल रूप मंदिर का था, जिसे बदलने के लिए इमारत को नुकसान पहुंचाया गया.’ याचिकाकर्ता आशीष गोयल का मानना है कि शिलालेख सरस्वती मंदिर सिद्ध करने वाला साक्ष्य है. वहीं, कमाल मौलाना वेलफेयर कमेटी के सदर अब्दुल समद ने 1903-04 के पुराने सर्वे का हवाला देकर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘यह हमेशा से मस्जिद ही रही है.’

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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