अमित शाह ने टिकट वितरण पर दिया अहम संकेत, दूल्हा कैसा भी विरोध नहीं करना है, जानिए इसके मायने
Edited By Arpit Pandey

amit shah mp politics
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MP Assembly Election: मध्य प्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव की कमान बीजेपी की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संभाल रहे हैं। ऐसे में वह लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। रविवार को ग्वालियर में आयोजित बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में उन्होंने टिकट वितरण से लेकर प्रचार अभियान तक कई मुद्दों पर जानकारी दी है। जिसमें सबसे अहम टिकट वितरण माना जा रहा है। बता दें कि शाह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को 150 सीटें जिताने का संकल्प दिलाया है।
दरअसल, अमित शाह की बैठक में 1800 कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने टिकट वितरण पर कहा ‘ हर सीट पर दस-दस दावेदार हो गए हैं, ऐसे में पार्टी किसी एक को ही टिकट दे सकती है। इसलिए सभी लोग दूल्हे का विरोध न करें चाहे वह कैसा भी हो। सभी मिलकर पार्टी के लिए काम करें।’
बताया जा रहा है कि टिकट वितरण को लेकर शाह ने संकेत दे दिया है कि पार्टी पुराने पेटर्न पर ही टिकट देगी। जरूरत पड़ने पर उम्र का क्राइटेरिया भी नहीं रखा जाएगा, जीतने वाले उम्मीदवारों में नेताओं के परिजन को भी मौका दिया जा सकता है। जबकि क्षेत्र के दमदार नेताओं को तबज्जो मिलेगी, यूथ नेताओं के लिए भी इस बार मौका मिलेगा। यानि टिकट वितरण में केवल एक क्राइटेरिया चलेगा, जो अधिक वोट लाने की संभावना में होगा टिकट उसे दिया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शाह का यह बयान बेहद अहम साबित होने वाला है। दरअसल, मध्य प्रदेश में 2003 के बाद अगर 15 महीनों को छोड़ दिया जाए तो 17 साल तक प्रदेश में बीजेपी की सरकार रही है। ऐसे में हर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की है, जिससे हर सीट पर कई नेता उभरे हैं। जबकि इतने सालों में दलबदल करके बीजेपी में आने वाले नेताओं की संख्या भी ज्यादा हो गई है। जिससे हर एक विधानसभा सीट पर कई दावेदार हैं। ऐसे में टिकट वितरण के बाद आपसी घमासान की स्थिति न बने, इसलिए शाह लगातार पार्टी में एकजुटता की बात कर रहे हैं। क्योंकि 39 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कई जगह विरोध देखा गया है।
अमित शाह ने मध्य प्रदेश में बीजेपी कार्यकर्ताओं को 150 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है। उनका कहना है कि अगर हमने कांग्रेस को इस बार रोक लिया तो फिर प्रदेश में 30 तक कांग्रेस नहीं आ पाएगी। इसलिए सभी एक हो जाओ और पूरा दम लगा दो। शाह ने कहा कि यहां बैठे सभी नेता कभी न कभी चुनाव जरूर लड़े हैं। इसलिए सभी लोग मिलकर अपने अनुभव का इस्तेमाल करें और पार्टी को जिताने का काम करें।
बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल अंचल में ही उठाना पड़ा था। पार्टी को यहां 34 में से केवल 7 सीटें ही मिली थी। ऐसे में यहां अमित शाह ने सभी को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की सलाह दी है। खास बात यह भी है कि इस बार ग्वालियर-चंबल में बीजेपी की कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के कंधों पर होगी। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच समनव्यय बनाकर चलने के लिए भी शाह खुद चुनावी कमान संभाल रहे हैं।
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