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Ranchi News: झारखंड के रांची से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ कर लिया है। दरअसल, झारखंड में पहली बार किसी बाघ का सफल रेस्क्यू किया गया है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये बचाव अभियान 14 घंटों की कोशिशों के बाद सफल हुआ है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को पलामू टाइगर रिजर्व और रांची डिवीजन की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया है। चलिए जानते हैं कि आखिर ये मामला क्या है। जिसकी इतनी चर्चा हो रही है।
ये मामला रांची जिले के मारदू गांव का है। गांव के रहने वाले पूरन चंद बुधवार तड़के करीब 4.30 बजे फैक्ट्री में अपनी नाइट शिफ्ट की नौकरी करके घर वापस आए। इसके बाद जैसे ही उन्होंने घर में से अपनी बकरी बाहर निकाली, वैसे ही अचानक एक बाघ उनके घर में घुस गया। उस समय घर में पूरन की दो बेटियां सो रही थीं। घास के घर में घुसने के बाद पूरन ने बहादुरी दिखाते हुए अपनी बच्चियों को घर से बाहर निकाला और घर का दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद पूरे गांव में बाघ वाली बात फैल गई और लोग जमा होने लगे।
आज रांची जिला के #सिल्ली प्रखंड के #मारदु गांव में बाघ घुस आया है जो पुराण चंद्र महतो जी के घर में घुस के छिपा है अब तक प्रशासन हरकत में नहीं आई है। बस खाना पूर्ति कर रही है वन विभाग की टीम @SethSanjayMP @JbkssArmy @JairamMahto99 @DC_Ranchi @ranchipolice pic.twitter.com/Rh1Pj8iNA6
— JLKM RANCHI झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (@prabhat59695694) June 25, 2025
सूचना मिलते ही वन विभाग की तरफ से ओरमांझी स्थित बिरसा जैविक उद्यान की टीम मौके पर पहुंची। घंटों कोशिश करने के बाद भी ये टीम बाघ को पकड़ने में फेल हो गई। इसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व और रांची डिवीजन की संयुक्त टीम ने बाघ को रेस्क्यू करने का मोर्चा संभाला। इस संयुक्त टीम ने घंटों की मशक्कत करने के बाद बुधवार शाम 6.30 बजे के करीब बाघ को सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया। स्थानीय लोगों की मानें तो कई दिनों से रांची, तमाड़ और खूंटी के जंगलों में बाघ घूमने की आशंका हो रही थी। रेस्क्यू किया गया बाघ करीब 6 फीट लंबा है।
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यह पूरा ऑपरेशन झारखंड के PCCF वाइल्ड लाइफ और CWLW ऑपरेशन परितोष उपाध्याय की देखरेख में किया गया। इस अभियान को PTR के DD आशीष और PTR के कर्मचारी प्रजेश जेना आदि ने मिलकर अंजाम दिया है। झारखंड में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी बाघ को जिंदा रेस्क्यू किया गया हो। जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू के बाघ को परिवहन की सुविधा के लिए शांत किया गया। इसके बाद उसे पीटीआर में सॉफ्ट रिलीज सेंटर में अवलोकन के बाद जंगल में छोड़ने का फैसला लिया जाएगा।
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