झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है. राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को हुई तीसरे दौर की बातचीत में बड़ा फैसला देखने को मिला है. सूत्रों के मुताबिक, हेमंत सोरेन सरकार जेपीएससी (JPSC) परीक्षाओं में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने के लिए तैयार हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा सुधार से जुड़ी छात्रों की कई मांगों को सरकार मान सकती है.

'विधानसभा घेराव जारी रहेगा, CBI जांच से कम मंजूर नहीं'

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. सरकार और राजभवन की ओर से दिए जा रहे आश्वासनों के बावजूद छात्र अपनी मुख्य मांग पर अड़े हुए हैं. सरकारी प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद छात्र नेता कुणाल ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है.

---विज्ञापन---

प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए छात्र नेता कुणाल ने कहा, "मैं यह बात पूरी तरह साफ कर देना चाहता हूं कि हमारा विधानसभा घेराव कार्यक्रम पूर्ववत जारी रहेगा. यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से होगा."
कुणाल ने छात्रों का रुख स्पष्ट करते हुए आगे कहा कि उनकी मुख्य मांग परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की सीबीआई (CBI) जांच कराने की है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मांग को लेकर छात्र किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं.

---विज्ञापन---

इन 4 प्रमुख मांगों पर सहमति के संकेत

  • वित्तीय लेन-देन की ED जांच: सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा धांधली में पैसों के लेन-देन और वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की जिम्मेदारी ईडी को सौंपी जा सकती है.
  • 3 प्रमुख परीक्षाएं रद्द होंगी: सूत्र बताते हैं सरकार ने JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने के संकेत दिए हैं.
  • एजेंसी की होगी जांच: सरकार ने संकेत दिए हैं कि TDPL एजेंसी द्वारा पूर्व में ली गई सभी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी.
  • संस्थागत सुधार: JPSC और JSSC के परीक्षा ढर्रे में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए IIM और XISS जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद ली जा सकती है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बड़ा बयान

झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बड़ा बयान सामने आया है. मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे युवा छात्र-छात्राओं से निष्पक्ष और निर्भीक होकर सरकार से संवाद करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि युवाओं को दिग्भ्रमित किया जा रहा है और हर समस्या का समाधान लाठी-गोली नहीं, बल्कि बातचीत से निकलेगा. लाठी-गोली से नुकसान बड़ा होता है, जबकि संवाद के जरिए रास्ता निकाला जा सकता है. हेमंत सोरेन ने छात्रों से कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक मंच की जरूरत नहीं है. सरकार युवाओं के अधिकार के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से काम कर रही है.

---विज्ञापन---

'बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे'

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन युवाओं के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर हैं. उन्होंने कहा, "इस समय हमारे छात्र जो आंदोलन कर रहे हैं, उस सिलसिले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही कई बातें विस्तार से बताई हैं. मैं सभी से आग्रह करता हूं कि मुख्यमंत्री जी ने जो कहा है, उस पर विश्वास रखें. हम अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते."

---विज्ञापन---

विपक्ष ने बोला हमला

एक तरफ जहां सरकार समझौते के संकेत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ सियासी हलचल भी तेज हो गई है. डुमरी से विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के अध्यक्ष जयराम महतो ने अभ्यर्थियों के समर्थन में एक दिन का उपवास रखा. उधर, 'जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच' ने सरकार के रुख की आलोचना की है. संगठन का आरोप है कि सरकार महज राजनीतिक चालबाजी कर रही है. सरकार का असली मकसद आंदोलनकारी छात्रों के बीच फूट डालना और मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना है.

---विज्ञापन---