हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों को झगझोर कर रख दिया है. रिश्तों, संस्कारों और बड़े-बुजुर्गों के प्रति अनदेखी को लेकर अक्सर ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं, जिसे पढ़ने के बाद लगता है कि कलयुग अपने चरम पर पहुंच चुका है. हाल ही में हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसी ही दिल दुखा देनी वाली खबर सामने आई है. कभी मुंबई में करोड़ों रुपये का कपड़ा कारोबार खड़ा करने वाले 71 वर्षीय शिवचरण गुप्ता ने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया, लेकिन उनके ही आखिरी वक्त में किसी संतान ने उसका साथ नहीं दिया.
पत्नी की मौत के बाद अकेले हो गए थे शिवचरण
वृद्धावस्था में शिवचरण गुप्ता वृद्धाश्रम में रहते हैं. पहले उनकी पत्नी भी साथ रहा करती थीं, लेकिन कुछ माह पहले ही उनका निधन हो गया था. पत्नी की मौत के बाद से ही शिवचरण भी अकेलेपन का शिकार हो गए. पत्नी से जुदाई और बेटियों के अभाव से परेशान शिवचरण ने भी आखिरकार वृद्धाश्रम में ही दम तोड़ दिया. हद तो तब हो गई जब अपने पिता के ही अंतिम संस्कार में बेटियां शामिल नहीं हुईं. बताया जा रहा है कि शिवचरण की तीनों बेटियां टीचर हैं और देश-विदेश में बस चुकी हैं.
यह भी पढ़ें: भारत से बिल्कुल अलग है इन देशों की न्याय व्यवस्था, यहां नहीं है सुप्रीम कोर्ट; फिर भी मिलता है लोगों को इंसाफ
देश-विदेश में रहती हैं बेटियां
मूल रूप से सोनीपत के ककरोई गांव के रहने वाले शिवचरण गुप्ता ने करीब छह दशक पहले मुंबई में कपड़े का बड़ा कारोबार स्थापित किया था. उनकी बड़ी बेटी नेपाल, दूसरी मुंबई और सबसे छोटी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में अपने-अपने परिवार के साथ रहती हैं. कारोबार में नुकसान होने के बाद शिवचरण ने अपना काम बंद कर दिया और पत्नी के साथ सोनीपत स्थित आनंद आश्रम में रहने लगे. करीब डेढ़ साल पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था. उस समय भी परिवार की ओर से कोई मौजूद नहीं था.
बेटी ने अंतिम संस्कार के लिए भेजे 5100 रुपये
इस बीच मंगलवार, 4 अगस्त को शिवचरण गुप्ता ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वृद्धाश्रम के मैनेजर आनंद कुमार ने उनकी तीनों बेटियों को पिता के निधन की जानकारी दी और अंतिम संस्कार में बुलाया. हालांकि बेटियों ने अलग-अलग समस्या बताकर आने में असमर्थता जताई. वहीं, मुंबई में रहने वाली बेटी ने अंतिम संस्कार के लिए 5100 रुपये ट्रांसफर किए, जबकि नेपाल में रहने वाली बेटी ने वीडियो कॉल पर अपने पिता का अंतिम संस्कार देखा. बेटियों ने अंतिम संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन भी आनंद कुमार को कराने के लिए कहा. सोनीपत की ये घटना अब सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई है.
यह भी पढ़ें: 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला