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गुजरात

ड्रोन दीदी आशा कमा रहीं लाखों, महिलाओं के लिए बनीं मिसाल, पढ़ें इनकी सफलता की कहानी

Drone Didi News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ड्रोन के उपयोग से महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए साल 2023 से ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना लागू की। इसका उद्देश्य ड्रोन के जरिए खाद और कीटनाशकों का छिड़काव करना सिखाना है।

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Edited By : Deepti Sharma Updated: Aug 2, 2024 17:08
drone didi
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Drone Didi News: गुजरात की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार खुद सहायता समूहों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी में बनासकांठा की ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से चर्चित आशा बेन ने पढ़ी लिखी महिलाओं के लिए स्व रोजगार से पैसा कमाने के क्षेत्र में अच्छा उदाहरण पेश किया है। डीसा तहसील के तालेपुरा गांव की रहने वालीं 31 साल मेकेनिकल इंजीनियर आशा ने सरकार से ट्रेनिंग प्राप्त कर आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन की मदद से कीटनाशक के छिड़काव का काम शुरू किया।

अब वह छह महीने में एक लाख रूपए से अधिक की कमाई कर रहीं हैं। इसीलिए दिसा तालुका के तालेपुरा गांव की रहने वाली आशा चौधरी पशुपालन और कृषि के माध्यम से ड्रोन उड़ाने का काम कर रही हैं। आपको बता दें, आशा बहन एक ड्रोन दीदी हैं, उन्होंने इसकी ट्रेनिंग भी ली है और अब वह आसपास के गांव इलाकों में ड्रोन की मदद से कीटनाशकों का छिड़काव कर आय अर्जित कर रही हैं।

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मैकेनिकल इंजीनियर बनीं ड्रोन दीदी

दिसा तालुक के तालेपुरा गांव की रहने वाली आशा चौधरी ने मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में पढ़ाई की है। उन्हें ड्रोन दीदी कार्यक्रम के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे 2023 में 15 दिनों के प्रशिक्षण के लिए पुणे गए, हालांकि उससे पहले इफको में एक साक्षात्कार आयोजित किया गया था।

पुणे में ट्रेनिंग ली

इसके लिए पुणे में ट्रेनिंग के बाद इस ड्रोन दीदी ने बनासकांठा में ड्रोन की मदद से कीटनाशकों का छिड़काव करना शुरू किया और अब उन्हें इतना काम मिल रहा है कि उनके पास समय ही नहीं बचा है। वे ड्रोन को खेत तक ले जाने के लिए एक ई-वाहन और बिजली के लिए जनरेटर सेट का भी इस्तेमाल करते हैं।

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ड्रोन की हेल्प से दवा छिड़काव अभियान

आशाबेन को एक मीडियम साइज का ड्रोन, खेत में ले जाने के लिए एक ई-वाहन और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में एक जनरेटर सेट भी प्रदान किया गया है। आशाबेन पहले ही अरंडी, मूंगफली, पपीता, बाजरा और सौंफ सहित अन्य फसलों में ड्रोन की मदद से दवाओं का छिड़काव कर चुकी हैं। ड्रोन से 7 मिनट में एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव किया जाता है। ड्रोन छिड़काव को अच्छी तरह बंदोबस्त करते हैं और समय के साथ-साथ धन दोनों ही बचाते हैं। इसमें दवा और पानी दोनों की मात्रा कम होती है, लेकिन छिड़काव ठीक से होता है।

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First published on: Aug 02, 2024 05:08 PM

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