Palak Saxena
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राहुल पांडे
पश्चिमी सीमा के संवेदनशील क्रीक सेक्टर से सटे भुज क्षेत्र में भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक और बहुआयामी युद्ध क्षमताओं का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के फॉरवर्ड एरिया दौरे के दौरान सेना की उन्नत हथियार प्रणालियों, रियल-टाइम सर्विलांस नेटवर्क और जॉइंट कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम ने भारत की फ्यूचर-रेडी सैन्य तैयारियों का स्पष्ट संदेश दिया.
दौरे के दौरान रक्षा सचिव ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान सहित कोणार्क कोर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बातचीत की. इस दौरान मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य, सीमा क्षेत्रों में तैनाती, लॉजिस्टिक तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई.
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने रक्षा सचिव को भारतीय सेना के ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन रोडमैप’ के तहत हो रही प्रगति से अवगत कराया. इस रोडमैप का उद्देश्य तकनीक आधारित बल संरचना को सशक्त बनाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ाना और बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुरूप सैन्य संचालन को आधुनिक स्वरूप देना है. सेना को लैंड, एयर, मैरीटाइम, साइबर और स्पेस डोमेन्स में एकीकृत ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा रहा है.
दौरे के दौरान रक्षा सचिव ने जॉइंट कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण भी किया, जहां विभिन्न सेंसर और सर्विलांस प्लेटफॉर्म्स से प्राप्त जानकारियों को एकीकृत कर साझा ऑपरेशनल पिक्चर तैयार की जाती है. यह व्यवस्था फील्ड कमांडरों को बेहतर स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करने के साथ-साथ त्वरित और सटीक निर्णय लेने में अहम भूमिका निभा रही है.

इस अवसर पर सीमा क्षेत्र में राष्ट्रीय एकता और संकल्प के प्रतीक मोन्यूमेंटल फ्लैग का उद्घाटन भी किया गया. साथ ही नई पीढ़ी की हथियार प्रणालियों का लाइव ऑपरेशनल प्रदर्शन हुआ, जिसमें नेटवर्क-सक्षम युद्ध क्षमताओं, उच्च सटीकता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता की झलक देखने को मिली.
दौरे के अंतिम चरण में मल्टी-एजेंसी कैपेबिलिटी एक्सरसाइज ‘तटरक्षा’ का आयोजन किया गया. इस अभ्यास में भारतीय सेना के साथ नौसेना, वायु सेना, तटरक्षक बल, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने भाग लिया. एक्सरसाइज के दौरान कोस्टल और एम्फीबियस ऑपरेशंस, रियल-टाइम निगरानी, प्रिसीजन स्ट्राइक, संयुक्त लॉजिस्टिक्स और रैपिड रिस्पॉन्स मैकेनिज़्म का प्रभावी प्रदर्शन किया गया. भुज में हुआ यह दौरा भारतीय सशस्त्र बलों में बढ़ती संयुक्तता, स्वदेशी तकनीकों के समावेश, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक मजबूत सैन्य शक्ति के निर्माण की दिशा में हो रहे ठोस प्रयासों को रेखांकित करता है.
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