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Vantara Wildlife University: अनंत अंबानी ने वंतारा में लॉन्च की दुनिया की पहली ग्लोबल वाइल्डलाइफ और वेटरिनरी यूनिवर्सिटी

Global Wildlife and Veterinary University: गुजरात के जामनगर में दुनिया की पहली ग्लोबल वाइल्डलाइफ एंड वेटरिनरी यूनिवर्सिटी खुल गई है। इसे अंबानी ग्रुप के अनंत अंबानी ने लॉन्च किया। यूनिवर्सिटी जामनगर में अंबानी ग्रुप के ड्रीम प्रोजेक्ट वंतारा में खोली गई है।

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भारत में दुनिया की पहली ग्लोबल वाइल्डलाइफ यूनिवर्सिटी लॉन्च हुई है, जिसका नींव पत्थर कल 10 अप्रैल 2026 को गुजरात के जामनगर में रखा गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानीड्रीम प्रोजेक्ट वंतारा में यूनिवर्सिटी खोली गई है। उन्होंने अपने जन्मदिन के मौके पर इस यूनिवर्सिटी की नींव रखी। यहां जानवरों के इलाज की वर्ल्ड क्लास पढ़ाई होगी।

भारत में वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी को खोलने के पीछे का मकदस ही भारत को वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है। यहां मॉडर्न साइंस, ट्रेडिशनल नॉलेज और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के जरिए नई पीढ़ी को तैयार किया जाएगा। साथ ही स्कॉलरशिप देकर आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की मदद की जाएगी।

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वंतारा यूनिवर्सिटी में पढ़ाए जाएंगे ये सभी विषय

वंतारा यूनिवर्सिटी में वाइल्डलाइफ मेडिसिन और सर्जरी, पशु पोषण, व्यवहार विज्ञान, जेनेटिक्स, महामारी विज्ञान, वन हेल्थ, संरक्षण नीति, प्राकृतिक पशु देखभाल और पर्यावरण डिजाइन यह विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर, फेलोशिप और विशेष कार्यक्रम प्रदान करेगा। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति भी दी जाएगी।

अनंत अंबानी ऐसे आया यूनिवर्सिटी का विचार

अनंत अंबानी कहते हैंकि भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम ज्ञान, करुणा और कौशल के साथ जीवन की रक्षा के लिए कैसे तैयार होते हैं? वंतारा यूनिवर्सिटी का विचार जानवरों की पीड़ा को देखने और उनके बेहतर उपचार की आवश्यकता को समझने के अनुभव से प्रेरित है। उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की भावना और संस्कृत श्लोक ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ यानी कि ‘सभी दिशाओं से श्रेष्ठ विचार आएं’ का जिक्र भी किया।

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वंतारा यूनिवर्सिटी का शिलान्यास ऐसे किया गया

शिलान्यास समारोह में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कार्यक्रम हुआ। भारत के अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों जैसे कि घास के मैदान, जंगल, आर्द्रभूमि, रेगिस्तान और हिमालयी क्षेत्रों से लाई गई मिट्टी, पानी और पत्थरों का उपयोग प्रतीकात्मक रूप से किया गया। कार्यक्रम में बिजोलिया बलुआ पत्थरों का भी उपयोग किया गया, जो विंध्य क्षेत्र की प्राचीन भूगर्भीय संरचना से जुड़े हैं और प्राचीन नालंदा की ज्ञान परंपरा का प्रतीक माने गए। इस कार्यक्रम में शिक्षा, विज्ञान, संरक्षण और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई लोग शामिल हुए, जिनमें अनंत अंबानी के शिक्षक और मार्गदर्शक भी मौजूद थे।

First published on: Apr 11, 2026 08:42 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं एमफिल कोर्स किया है। 13 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी हूं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के माल‍िकाना हक वाले News 24 हिंदी डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हूं। चीफ सब एडिटर की भूमिका निभाते हुए यहां की कोर टीम का हिस्सा हूं। नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम, फीचर आदि टॉपिक कवर करती हूं। घूमने, खाने और शॉपिंग की शौकीन खुशबू को नए ट्रेंड, नई जगह और ऐडवेंचर की तलाश रहती है।

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