पुरानी दिल्ली में क्यों लगे 'सावधान रहने के पोस्टर', जानें क्यों नाराज हैं राजधानी के लोग?

Old Delhi fake NGO: पुरानी दिल्ली की गलियों में फर्जी एनजीओ से सावधान रहने के अजीबोगरीब पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि घर बनाने या मरम्मत के नाम पर कुछ संगठन उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं. पुलिस और एमसीडी में शिकायत के बाद भी कोई कड़ा एक्शन नहीं होने से जनता में भारी नाराजगी है. पढ़ें, नई दिल्ली से विमल कौशिक की रिपोर्ट

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Old Delhi fake NGO: इन दिनों पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक गलियों और बाजारों में लगे कुछ अनोखे पोस्टर हर आने-जाने वाले का ध्यान खींच रहे हैं. यह पोस्टर किसी चुनाव या विज्ञापन के नहीं, बल्कि इलाके के लोगों को “सावधान” करने के लिए लगाए गए हैं. चांदनी चौक और सीताराम बाजार जैसे घने रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में लगे इन पोस्टरों में साफ तौर पर लिखा है कि लोग फर्जी एनजीओ (NGO) से सावधान रहें. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ फर्जी संगठन समाज सेवा की आड़ में सरेआम ब्लैकमेलिंग का धंधा चला रहे हैं.

घर बनाने के नाम पर उगाही का खेल

पुरानी दिल्ली के लोगों का कहना है कि नियमानुसार अपना घर बनाने या उसमें किसी भी तरह की मरम्मत कराने के लिए नगर निगम (MCD) से नक्शा पास कराना और संबंधित विभागों से एनओसी (NOC) लेना जरूरी होता है. लेकिन जमीनी हकीकत यह बन चुकी है कि सरकारी मंजूरी से पहले इन फर्जी एनजीओ की ‘हरी झंडी’ यानी रिश्वत जरूरी हो गई है. अगर कोई नागरिक बिना इन्हें पैसे दिए काम शुरू करता है, तो ये संगठन आरटीआई (RTI), जनहित याचिका (PIL) और झूठी शिकायतों का डर दिखाकर काम रुकवा देते हैं और मोटी रकम की मांग करते हैं.

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अदालत भी जता चुकी है चिंता

ब्लैकमेलिंग के इस खेल पर देश की अदालतें भी कई बार सख्त टिप्पणियां कर चुकी हैं. कोर्ट ने माना है कि कुछ तथाकथित एनजीओ, आरटीआई एक्टिविस्ट और शिकायतकर्ता कानून का इस्तेमाल लोगों को डराने और उनसे पैसे वसूलने के लिए एक हथियार की तरह कर रहे हैं. पुरानी दिल्ली में भी ठीक ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जिससे आम जनता त्रस्त हो चुकी है.

पुलिस और प्रशासन पर सुस्ती के आरोप

इस गुंडागर्दी और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर स्थानीय लोगों ने कई बार दिल्ली पुलिस और एमसीडी के आला अधिकारियों से लिखित शिकायत की है. भारी दबाव के बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) तो दर्ज कर ली है, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित है. पुलिस की तरफ से अब तक इन फर्जी एनजीओ के खिलाफ कोई ठोस या सख्त कदम नहीं उठाया गया है. यही वजह है कि कानूनी कार्रवाई के बावजूद इलाके में लोगों को डराने-धमकाने और परेशान करने का यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे परेशान होकर अब लोगों को सड़कों पर पोस्टर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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