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प्राइवेट स्कूल की मनमानी फीस पर लगेगी लगाम? दिल्ली सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

Delhi Private School News: दिल्ली में अक्सर पैरेंट्स को शिकायत रहती है कि प्राइवेट स्कूल की फीस पर बेवजह इजाफा किया जाता है, अब माता-पिता और स्कूल के बीच इस टकराव को कम करने के लिए दिल्ली सरकार एक बड़ा और हम प्लान बना रही है.

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मुख्य बिंदु

  • दिल्ली DoE ने प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों को फीस रेगुलेशन कमेटियां बनाने का आदेश दिया है.
  • ये कमेटियां 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए प्रभावी होंगी.
  • सदस्यों में स्कूल मैनेजमेंट, टीचर और माता-पिता शामिल होंगे.
  • माता-पिता के प्रतिनिधियों को एक पारदर्शी प्रक्रिया या जरूरत पड़ने पर लॉटरी के जरिए चुना जाएगा.
  • इस पहल का मकसद स्कूल की फीस से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहतर बनाना है.

Private Schools Fee Regulation: दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने राजधानी के सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के लिए 2026-27 एकेडमिक ईयर के लिए ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियां’ (SLFRCs) बनाने के नए निर्देश जारी किए हैं. इस पहल का मकसद स्कूल फीस स्ट्रक्चर से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता लाना और जवाबदेही बढ़ाना है.

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नए निर्देशों में क्या है खास?

नई गाइडलाइंस के मुताबिक, हर कमेटी में स्कूल मैनेजमेंट, टीचिंग स्टाफ और माता-पिता के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इसका मकसद एक संतुलित फैसला लेने की प्रक्रिया बनाना है, जिसमें फीस से जुड़े मामलों पर मिलकर चर्चा हो, न कि सिर्फ स्कूल अथॉरिटी ही अकेले फैसला ले.

कमेटी के सदस्य कैसे चुने जाएंगे?

निदेशालय ने कमेटी के सदस्यों को चुनने के लिए एक साफ प्रक्रिया भी तय की है. माता-पिता के प्रतिनिधियों को एक पारदर्शी नॉमिनेशन प्रॉसेस के जरिए चुना जाना चाहिए. अगर आवेदकों की संख्या अवेलेबल सीटों से ज्यादा होती है, तो स्कूलों को निष्पक्ष तरीके से सदस्यों को चुनने के लिए लॉटरी (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) करानी होगी. इसी तरह, टीचर प्रतिनिधियों को शिक्षा विभाग की तरफ से बताई गई प्रक्रियाओं के मुताबिक नियुक्त किया जाएगा.

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मनमानी फीस फिक्र का सबब

ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब प्राइवेट स्कूलों में बढ़ती फीस दिल्ली के कई परिवारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है. फीस में बार-बार बदलाव की शिकायतों के कारण सरकार को ऐसे उपाय करने पड़े हैं जिनसे फीस तय करने की प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बढ़े.

पैरेंट्स की भादीजारी की वजह

कमेटी में माता-पिता और टीचरों को शामिल करके, सरकार ये एनश्योर करना चाहती है कि फीस के प्रस्तावों को लागू करने से पहले उनकी अच्छी तरह से समीक्षा की जाए. उम्मीद है कि नई व्यवस्था से खुली चर्चा को बढ़ावा मिलेगा, स्कूलों और माता-पिता के बीच बातचीत बेहतर होगी और निष्पक्ष फैसले लेने को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें शिक्षण संस्थानों और परिवारों दोनों के हितों का ध्यान रखा जाएगा.

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कब से काम करेगी कमेटी?

बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों को शिक्षा निदेशालय की तरफ से तय समय-सीमा के भीतर इन कमेटियों का गठन पूरा करने का निर्देश दिया गया है. सरकार को उम्मीद है कि 2026-27 एकेडमिक सेशन शुरू होने से पहले सभी कमेटियां पूरी तरह से काम करने लगेंगी.

फीस को लेकर निगरानी बेहतर करने की कोशिश

अधिकारियों का मानना ​​है कि ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियों’ के आने से प्राइवेट स्कूलों के फाइनेंस पर निगरानी मजबूत होगी और फीस तय करने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी. यह पहल माता-पिता को उन चर्चाओं में शामिल होने के लिए एक औपचारिक मंच भी देती है जिनका सीधा असर उनके बच्चों की पढ़ाई के खर्च पर पड़ता है, जो शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने की सरकार की व्यापक कोशिश को दिखाता है.

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निष्कर्ष

दिल्ली सरकार का नया निर्देश एक स्ट्रक्चर्ड प्रॉसेस में माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल मैनेजमेंट को शामिल करके प्राइवेट स्कूलों की फीस से जुड़े फैसलों को ज्यादा पारदर्शी बनाना चाहता है. 2026-27 सेशन के लिए ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियाँ’ (SLFRC) बनाना जरूरी होने से, इस कदम से जवाबदेही बढ़ने, निष्पक्ष बातचीत को बढ़ावा मिलने और प्राइवेट स्कूलों में बार-बार फीस बढ़ने को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने की उम्मीद है.

Frequently Asked Questions

ये प्राइवेट अन-एडेड स्कूलों में बनाई गई कमेटियां हैं जो पारदर्शी तरीके से फीस से जुड़े मामलों की जांच और उन पर चर्चा करती हैं.
इस कमेटी में स्कूल मैनेजमेंट, शिक्षकों और माता-पिता के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
माता-पिता को एक पारदर्शी नॉमिनेशन प्रक्रिया के जरिए चुना जाएगा और जरूरत पड़ने पर लॉटरी (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) निकाली जाएगी.
इस पहल का मकसद प्राइवेट स्कूलों की फीस से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता को बेहतर बनाना है.
2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियां होनी जरूरी हैं.
First published on: Jul 02, 2026 12:04 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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