---विज्ञापन---

SS तोता सिंह स्कूल में बच्ची से दुष्कर्म मामले में सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल, बोले- क्या छिपाना चाहते हैं आशीष सूद?

Sourabh Bhardwaj News: सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बच्ची से रेप मामले में सवाल उठाए हैं। एसएस तोता सिंह स्कूल को कठघरे में खड़ा किया है। बीजेपी और शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर मामले में कुछ छिपाने का आरोप भी लगाया है।

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जिस एसएस मोता सिंह स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ रेप हुआ, उसका राजनीतिक संबंध होने को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने शिक्षा मंत्री आशीष सूद की गलत बयानी पर पलटवार करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार में एसएस मोता सिंह स्कूल की फाइल गायब हो गई है। आशीष सूद बताएं कि सरकार क्या छिपाना चाहती है? ट्रस्ट में आने-जाने वाले सदस्यों की सारी जानकारी सरकार के सब रजिस्ट्रार को दी जाती है। वह फाइल कैसे गायब हो गई?

उन्होंने पूछा कि अगर स्कूल का कोई राजनीति संबंध नहीं है तो फिर अमरजीत सिंह बब्बू ने फेसबुक पर ट्रस्टी बनाने का सारा श्रेय मंत्री प्रवेश वर्मा को देते हुए उन्हें धन्यवाद क्यों किया? स्कूल के ट्रस्ट में अमरजीत सिंह के अलावा डॉ. वीरेंद्र कुमार अग्रवाल, स्वाति गर्ग और मनीष गुप्ता नए ट्रस्टी बने हैं। फेसबुक पर पोस्ट करने से अमरजीत सिंह बब्बू के बारे कुछ जानकारी मिल गई, लेकिन बाकी तीन लोग कौन हैं? बच्ची के पैरेंट्स का कहना है कि वे जब भी थाने गए, तो स्कूल के जनकपुरी ब्रांच के मैनेजर मनजीत सिंह ओलख वहां मिले, जो मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के करीबी हैं और साथ में दोनों की फोटो भी है।

---विज्ञापन---

उन्होंने कहा कि आज तीन साल की रेप पीड़ित बच्ची तबीयत बिगड़ने की वजह से अस्पताल में भर्ती है। इसके बावजूद स्कूल मैनेजमेंट को क्यों बचाया जा रहा है? उन्होंने आशीष सूद से स्कूल की फाइल सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि लोगों को भी पता चल सके कि स्कूल का राजनीतिक संबंध है या नहीं है। शुक्रवार को आप मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एसएस मोटा सिंह पब्लिक स्कूल में जिस तीन साल की बच्ची से स्कूल के ही एक अधिकारी ने उसके साथ रेप किया। उस बच्ची को परिजन जब दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले गई, तो रात में करीब सवा दो बजे उसका मेडिकल हुआ।

उन्होंने कहा कि मेडिकल करने वाली डॉक्टर ने लड़की की मां से कहा था कि बच्ची का हाइमन रप्चर हो गया है, लेकिन बाद में डॉक्टर ने मेडिकल रिपोर्ट के अंदर इस बात को नहीं लिखा। उसके बाद से लड़की की तबीयत ठीक नहीं थी। उसने खाना-पीना बेहद कम कर दिया था और उसे यूरिन पास करने तक में तकलीफ हो रही थी। परिवार ने अल्ट्रासाउंड कराया तो उसमें भी बच्ची को काफी दिक्कतें बताई गईं। गुरुवार को उस बच्ची की तबीयत इतनी खराब हो गई कि उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराना पड़ा।

---विज्ञापन---

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मां-बाप के हालात ऐसे हैं कि वे फोन करके पूछ रहे हैं कि अगर पैसे की दिक्कत हुई और सरकार ने पैसे नहीं दिए तो वे क्या करेंगे? हमने परिवार से कहा है कि वे पैसे की चिंता न करें, उन्हें दिक्कत नहीं होने दी जाएगी और वे बस इलाज कराएं। मगर यह बड़े शर्म की बात है कि देश की राजधानी दिल्ली के अंदर आज स्कूल जाने वाली एक मासूम बच्ची के साथ ऐसे हालात हो गए हैं। अभी बच्ची की हालत कैसी है यह नहीं पता, लेकिन रात को उसे अस्पताल में एडमिट कराया गया और वह अभी भी एडमिट है। बच्ची को सीवियर इंफेक्शन बताया गया है और यह इंफेक्शन क्यों होता है, यह सब लोग भली-भांति जानते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि अदालत ने आरोपी को कुछ दिन पहले ही बेल दे दी है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि गुरुवार को दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद पहली बार इस मामले पर बोले, जबकि यह उनके अपने क्षेत्र जनकपुरी का एक जाना-माना स्कूल है। यह स्कूल उनके घर से दो मिनट की दूरी पर है, इसलिए वे ऐसा नहीं कह सकते कि वे इस स्कूल को नहीं जानते। मार्च में आशीष सूद ने खुद इस स्कूल के अंदर दिल्ली सरकार द्वारा भजन क्लबिंग वाला एक भव्य कार्यक्रम कराया था। हजारों लोग उसमें आए थे और लाखों या हो सकता है करोड़ों रुपए उस पर खर्च हुए हों। सरकार खर्चा तो बताती नहीं है और विधानसभा में भी नहीं बताती। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आशीष सूद दोनों मौजूद थे। ऐसे किसी अनजान स्कूल के अंदर सरकारें सरकारी खर्च से बड़े-बड़े प्रोग्राम नहीं रखा करतीं।

---विज्ञापन---

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि गुरुवार को आशीष सूद ने बहुत भद्दी और घटिया बात कही। वे कह रहे हैं कि सौरभ भारद्वाज बताएं कि भाजपा के किस नेता और मंत्री ने इस स्कूल में स्टेक्स खरीदे हैं। जब शिक्षा मंत्री भाजपा के हैं, राजस्व मंत्री भाजपा के हैं, मुख्यमंत्री भाजपा की हैं और सब रजिस्ट्रार दफ्तर भी उनका ही है, तो कागज सौरभ भारद्वाज कहां से लाएंगे? कागज तो भाजपा सरकार के पास ही हैं। सौरभ भारद्वाज ने ट्रस्ट के खेल के बारे में बताते हुए कहा कि पांच-सात आदमियों का एक ट्रस्ट होता है जो स्कूल को चलाता है। एसएस मोता सिंह स्कूल के ट्रस्ट का नाम एसएस मोता सिंह नीला चैरिटेबल ट्रस्ट है। नीला पाकिस्तान के उस गांव का नाम है जहां से इसकी शुरुआत हुई थी। इस ट्रस्ट के पास करीब 500 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पश्चिम विहार में 7 एकड़, जनकपुरी में करीब ढाई एकड़ और 500 गज जमीन अलग से है। स्कूलों के ट्रस्ट का खेल यह होता है कि दो ट्रस्टी रिजाइन करते हैं और दो नए आ जाते हैं। फिर दो और रिजाइन करते हैं और दो नए आ जाते हैं। धीरे-धीरे पुराने ट्रस्टी गायब हो जाते हैं और नए ट्रस्टी आ जाते हैं, जिनमें से एक आदमी चेयरमैन बन जाता है। इस तरह 500 करोड़ की संपत्ति कुछ हाथों से दूसरे हाथों में पहुंच जाती है और इसके लिए पैसे का सारा लेनदेन ब्लैक और कैश में होता है। ऐसे ही कोई फ्री में ट्रस्ट देकर खुद हरिद्वार जाने की बात नहीं कह सकता। इस तरह के ट्रस्टों में जो लेनदेन होता है, वह ब्लैक में होता है। जबकि आदर्श रूप में यह लेनदेन नहीं होना चाहिए, क्योंकि इन्हें नॉन प्रॉफिट कहा जाता है।

---विज्ञापन---

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस ट्रस्ट से कौन लोग निकले और पिछले एक साल में जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से कौन लोग ट्रस्ट में आए? इसका जवाब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता या आशीष सूद ही दे सकते हैं। सरकार के पास फाइल है और सब रजिस्ट्रार के पास यह जानकारी जमा करनी पड़ती है कि कौन ट्रस्टी बाहर गया और कौन अंदर आया। जब हमने सब रजिस्ट्रार के पास पता किया, जहां कोई भी व्यक्ति फीस देकर फाइल का इंस्पेक्शन कर सकता है। तो हमें बताया गया कि वह फाइल गायब हो गई है। वह फाइल क्यों गायब कर दी गई है, यह सब समझते हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कुछ कागजात दिखाते हुए कहा कि बीते अप्रैल महीने में फेसबुक पर अमरजीत सिंह बब्बू नामक व्यक्ति ने एक पोस्ट डाली थी, जिन्हें भाजपा मंत्री प्रवेश वर्मा का करीबी बताया जाता है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि एसएस मोता सिंह स्कूल (नीला चैरिटेबल ट्रस्ट) का ट्रस्टी बनाने पर दिल्ली के लोकप्रिय मंत्री प्रवेश वर्मा को बहुत-बहुत धन्यवाद और उन्होंने इस पोस्ट में प्रवेश वर्मा को टैग भी किया। एक आदमी अपने फेसबुक पर दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा को धन्यवाद दे रहा है कि उन्होंने उसे ट्रस्टी बना दिया। सवाल उठता है कि क्या यह प्रवेश वर्मा का ट्रस्ट है और उनका इस ट्रस्ट से क्या लेना-देना है कि वे किसी को ट्रस्टी बना सकते हैं? थोड़ी देर बाद वह फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दी गई।

---विज्ञापन---

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि उस फेसबुक पोस्ट में दो चीजें थीं। एक तो अमरजीत सिंह बब्बू के साथ प्रवेश वर्मा की फोटो थी। दूसरा, उस पोस्ट के साथ ट्रस्ट का एक लेटरहेड भी डाला गया था। उसमें लिखा था कि ट्रस्ट के उद्देश्यों को पूरा करने और विकास के लिए चार नए लोगों को ट्रस्ट की सदस्यता दी जा रही है। इन चार लोगों में प्रो. डॉक्टर वीरेंद्र कुमार अग्रवाल, स्वाति गर्ग, अमरजीत सिंह और मनीष गुप्ता शामिल थे। मनीष गुप्ता का नाम सुना हुआ लगता है, लेकिन उनका पता या फोन नंबर नहीं पता, जिससे यह पता चल सके कि उनके इस ट्रस्ट में आने का कारण क्या है? स्वाति गर्ग भी कोई शिक्षाविद या किसी नेता की करीबी हो सकती हैं। अमरजीत सिंह का पता इसलिए चल गया क्योंकि उन्होंने खुद फेसबुक पर पोस्ट डालकर प्रवेश वर्मा का धन्यवाद कर दिया था।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि पीड़ित परिवार बार-बार जिस पॉलिटिकल कनेक्शन की बात कहता है, उसके कुछ सबूत तो सामने हैं। दूसरा पॉलिटिकल कनेक्शन मनजीत सिंह ओलख का है। उनकी फोटो भाजपा मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ है और बताया जाता है कि दोनों काफी करीबी हैं। लड़की की मां ने बताया कि जब भी उन्हें पुलिस थाने बुलाया गया, मनजीत सिंह ओलख अक्सर वहां पुलिस से बात करते हुए दिखे। जब गूगल और एआई से मनजीत सिंह ओलख के बारे में पूछा गया, तो जानकारी मिली कि वे इस स्कूल की जनकपुरी ब्रांच के मैनेजर हैं। स्कूल वालों से पूछने पर पता चला कि प्रिंसिपल तो कर्मचारी की तरह होता है, जबकि स्कूल का सारा एडमिनिस्ट्रेशन मैनेजर ही देखता है। भाजपा मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के करीबी मनजीत सिंह ओलख का अक्सर थाने में पुलिस से बात करते हुए दिखना साबित करता है कि राजनीतिक कनेक्शन तो है।

---विज्ञापन---

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस ट्रस्ट की सच्चाई क्या है, यह आशीष सूद को बताना चाहिए। वे इसे क्यों छिपा रहे हैं? अगर उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो फाइल पब्लिक कर दें। यह पब्लिक रिकॉर्ड है, इसमें छिपाने वाली कोई बात नहीं है। सरकार फाइल को पब्लिक कर दे कि इस स्कूल के अंदर कौन नए लोग आए हैं और कौन पुराने लोग गए हैं, ताकि जनता को सब साफ हो जाए। हो सकता है कि परिवार की गलतफहमी हो कि राजनीतिक कारणों से पुलिस मामले को दबा रही थी, ढीली कार्रवाई की गई और दोषी को बेल मिल गई।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वह तीन साल की बच्ची आज भी अस्पताल में है। उसकी मां ने बताया कि वह अभी तक डायपर पहनकर स्कूल जाती थी और खुद टॉयलेट भी नहीं जा पाती थी। घटना वाले दिन भी उसने डायपर पहना हुआ था। ऐसे पापी और राक्षस हैं जिन्होंने उस बच्ची का डायपर हटाकर घिनौना काम किया और पुलिस उसके मां-बाप को धमका रही है। वह बच्ची पिछले 14 दिन से खाना-पीना नहीं कर पा रही है, टॉयलेट नहीं जा पा रही है और उसे उल्टियां लगी हुई हैं।

---विज्ञापन---
First published on: May 16, 2026 01:19 PM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

Read More
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.
Sponsored Links by Taboola