उदंती-सितानाडी टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़) में पिछले चार वर्षों में चलाए गए व्यापक संरक्षण अभियानों ने न सिर्फ अवैध कब्जों को हटाया बल्कि वन्यजीवों की लौटती उपस्थिति से पारिस्थितिकी तंत्र में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है. रिजर्व प्रबंधन और उप-निदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में कराए गए अभियानों में लगभग 956 हेक्टेयर (2500 एकड़) आबाद वन भूमि मुक्त कराई गई और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई.
साढ़े चार वर्षों की मेहनत का नतीजा
वन अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान अवैध घुसपैठियों, तस्करों और शोषक तत्वों से संघर्ष कम रुचिकर नहीं था. साढ़े चार वर्षों के ऑपरेशनों में टीमों पर चार खतरनाक हमले हुए, फिर भी अभियान बिना रुके आगे बढ़ते रहे. सीमा-पार नेटवर्क को भी निशाना बनाते हुए छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा व महाराष्ट्र में संयुक्त तौर पर कई रैक्स किए गए. जांच और नियंत्रण के परिणामस्वरूप अब तक 550 से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है.
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जंगल में लौट रही कई कई प्रजातियां
इन कार्रवाइयों का पारिस्थितिक नतीजा शीघ्र दिखाई देने लगा. मानव दबाव घटने और आवास पुनर्स्थापित होने से कैम ट्रैप रिकॉर्डिंग में पहले कम देखी जाने वाली कई प्रजातियां फिर से दिखाई दीं. यहां मालाबार पाईड हर्बिल जैसे पश्चिमी घाटों से जुड़ी चिड़ियाएं, विंग्ड फ्लाइंग स्क्विरल, माउस डीयर, ओटर और दुर्लभ ट्रिकारिनेट हिल कछुआ जैसे प्राणी बरामद हुए, जो रिजर्व के इकोलॉजी में लौटने के स्पष्ट संकेत हैं.
हाईटेक तकनीक से हो रही सुरक्षा और निगरानी
वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के लिए तकनीक का भी सहारा लिया है. थर्मल ड्रोन, एआई-सक्षम कैमरे और हाथी-ट्रैकिंग अलर्ट सिस्टम लगाए गए हैं ताकि वन्यजीवों की गतिविधि पर सतत नजर रखी जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को घटाया जा सके. साथ ही 'हॉर्नबिल रेस्टोरेंट' जैसी पहलों के तहत स्थानीय फलों वाले पेड़ लगाए जा रहे हैं और 'वीविंग द कैनोपी कोव' प्रोजेक्ट से वृक्षाच्छादन को फिर से जोड़ा जा रहा है ताकि उड़नेवाले और वृक्षनिवासी प्राणियों के आवागमन को सुगम बनाया जा सके.
यह भी पढ़ें: बिना AC-कूलर छत्तीसगढ़ के आदिवासी कैसे देते हैं भीषण गर्मी को मात, जुगाड़ देख हो जाएंगे हैरान
उदंती-सितानाडी टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़) में पिछले चार वर्षों में चलाए गए व्यापक संरक्षण अभियानों ने न सिर्फ अवैध कब्जों को हटाया बल्कि वन्यजीवों की लौटती उपस्थिति से पारिस्थितिकी तंत्र में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है. रिजर्व प्रबंधन और उप-निदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में कराए गए अभियानों में लगभग 956 हेक्टेयर (2500 एकड़) आबाद वन भूमि मुक्त कराई गई और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई.
साढ़े चार वर्षों की मेहनत का नतीजा
वन अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान अवैध घुसपैठियों, तस्करों और शोषक तत्वों से संघर्ष कम रुचिकर नहीं था. साढ़े चार वर्षों के ऑपरेशनों में टीमों पर चार खतरनाक हमले हुए, फिर भी अभियान बिना रुके आगे बढ़ते रहे. सीमा-पार नेटवर्क को भी निशाना बनाते हुए छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा व महाराष्ट्र में संयुक्त तौर पर कई रैक्स किए गए. जांच और नियंत्रण के परिणामस्वरूप अब तक 550 से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है.
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जंगल में लौट रही कई कई प्रजातियां
इन कार्रवाइयों का पारिस्थितिक नतीजा शीघ्र दिखाई देने लगा. मानव दबाव घटने और आवास पुनर्स्थापित होने से कैम ट्रैप रिकॉर्डिंग में पहले कम देखी जाने वाली कई प्रजातियां फिर से दिखाई दीं. यहां मालाबार पाईड हर्बिल जैसे पश्चिमी घाटों से जुड़ी चिड़ियाएं, विंग्ड फ्लाइंग स्क्विरल, माउस डीयर, ओटर और दुर्लभ ट्रिकारिनेट हिल कछुआ जैसे प्राणी बरामद हुए, जो रिजर्व के इकोलॉजी में लौटने के स्पष्ट संकेत हैं.
हाईटेक तकनीक से हो रही सुरक्षा और निगरानी
वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के लिए तकनीक का भी सहारा लिया है. थर्मल ड्रोन, एआई-सक्षम कैमरे और हाथी-ट्रैकिंग अलर्ट सिस्टम लगाए गए हैं ताकि वन्यजीवों की गतिविधि पर सतत नजर रखी जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को घटाया जा सके. साथ ही ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी पहलों के तहत स्थानीय फलों वाले पेड़ लगाए जा रहे हैं और ‘वीविंग द कैनोपी कोव’ प्रोजेक्ट से वृक्षाच्छादन को फिर से जोड़ा जा रहा है ताकि उड़नेवाले और वृक्षनिवासी प्राणियों के आवागमन को सुगम बनाया जा सके.
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