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Bihar Politics: क्या नीतीश कुमार ही रहेंगे CM चेहरा? BJP-JDU के गठबंधन की उम्र कितनी?

Bihar Assembly Elections 2025: ऐसा कई बार हो चुका है जब बीजेपी ने एनडीए से बाहर जाकर अकेले दम पर चुनाव लड़े हैं। हाल ही में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकाली दल को बाय बाय कह दिया था।

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Bihar Assembly Elections 2025: बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले प्रदेश की राजनीति में अटकलों का दौर जारी है। यहां प्रत्येक दिन की राजनीतिक गतिविधियों का चुनावी पंडित अपना अलग आंकलन कर रहे हैं। इसी बीच प्रदेश की राजनीति में नए बदलाव की ‘सुगबुगाहट’ है। दरसअल, हाल ही में पटना के मिलर स्कूल मैदान में कुर्मी एकता रैली हुई है। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस रैली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं आए थे, जबकि वह प्रदेश के बड़े कुर्मी नेताओं में से एक हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में कुर्मी समाज की आबादी करीब 4% है। जो यहां जसवार, अवधिया और समसवार कई उपाजतियों में विभाजित है। वहीं, विधानसभा में विधायकों की संख्या में जाएं तो यहां भाजपा के पास 74, जदयू के पास 43, राजग 75, कांग्रेस 19 और अन्य के पास 21 सीटें हैं।

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क्या बिहार की राजनीति में उतरेंगे नीतीश के ‘बेटे’

जानकारी के अनुसार करीब 2 दशक से नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। इतना ही नहीं प्रदेश में सरकार किसी भी पार्टी या गठबंधन की रही वह सत्ता की धूरी बने रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी खराब सेहत के चलते पार्टी में दबी जुबान में नीतीश कुमार के बाद पार्टी का चेहरा कौन होगा? इस पर चर्चा हो रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर संजय झा समेत पार्टी के सभी नेता इस बात से इनकार करते आए हैं। इसी बीच नीतीश के बेटे निशांत के भी राजनीति में आने और इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हैं।

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जदयू की प्रगति यात्रा और एनडीए के कुर्मी सम्मेलन अलग करने के क्या हैं मायने?

हाल ही में 21 फरवरी को नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा का पटना में समापन हुआ है। इस दौरान उन्होंने करीब 531 करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। बता दें फरवरी में नीतीश की इस यात्रा का दूसरा चरण था। जिसमें वह बिहार के नवादा, गया, औरंगाबाद, जमुई, मुंगेर समेत अलग-अलग शहर और जिलों में गए और पार्टी को मजबूत करने का काम किया। इधर, एनडीए ने हाल ही में कुर्मी सम्मेलन कर प्रदेश के कुर्मी वोटों को साधने की कोशिश की। इस सम्मेलन में नीतीश कुमार के न पहुंचने से राजनीति गलियारों में ये चर्चा है के बीजेपी और जदयू आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी है और संभावना है कि इस बार दोनों की राहें अलग हो जाएं!

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एनडीए से बाहर जाकर BJP ने दिखाया अपना दम

ऐसा कई बार हो चुका है जब बीजेपी ने एनडीए से बाहर जाकर अकेले दम पर चुनाव लड़े हैं। हाल ही में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकाली दल को बाय बाय कह दिया था। इसी तरह बिहार, महाराष्ट्र में वह अकेले चुनाव लड़ चुकी है। महाराष्ट्र में बीते विधानसभा चुनाव के बाद एकनाथ शिंदे को डिप्टी सीएम बनाना बीजेपी की भविष्य की राजनीति का एक नमूना भर है। बहरहाल बिहार के विधानसभा चुनाव में क्या होगा? ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। क्या नीतीश की जगह उनके बेटे निशांत कुमार जगह लेंगे? क्या बीजेपी अकेले चुनाव लड़ेगी? या निशांत कुमार तेजस्वी के साथ जाएंगे? फिलहाल ये बातें सवाल ही बनीं हुई हैं।

बिहार चुनाव में इस बार प्रशांत किशोर रह सकते हैं बड़ा फैक्टर

वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने इस बारे में कहा कि नीतिश कुमार अपने स्वास्थ्य व राजनीति के जिस मोड़ पर है अब वो पलटने की स्थिति में नहीं है। वैसे भी बिहार की राजनीति में वे पलटूराम कह जरूर गए हैं पर वहां पलटते सभी है। इस बार के चुनाव में प्रशांत किशोर एक बड़ा फैक्टर है। तो अब हर पार्टी इस जुगत में है कि उनके जरिए कैसे दूसरी पार्टी का नुकसान हो। लालू चाहते है कि वे बीजेपी का सवर्ण वोट काटे और बीजेपी चाहती है कि वे राजद के मुस्लिम वोट बैं में सेंध लगाए। मेरा मानना है कि प्रशांत किशोर आगामी चुनाव में केंद्र में रहेंगे, बीजेपी उनका लाभ उठाना चाहती है। बिहार में जातीय समीकरण ज्यादा है पर इस बार बड़ा मुद्दा नौकरियां और पलायन बनेगा, युवाओं के बीच ये मुद्दा बहुत तेजी से चर्चा का विषय बन रहा है। अगर ये मुद्दा चरम पर पहुंचा तो प्रशांत किशोर किंग मेकर भी बन सकते हैं, ऐसे में वे हंग असेंबली बना सकते हैं, इसलिए उनको इग्नोर नहीं किया जा सकता है।

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First published on: Feb 22, 2025 03:39 PM

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About the Author

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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