बिहार वासियों की बल्ले-बल्ले! आमस-दरभंगा से पटना-पूर्णिया तक, इन 12 एक्सप्रेसवे से यूपी-बंगाल का सफर होगा आसान
बिहार में आमस-दरभंगा और पटना-पूर्णिया समेत 12 नए एक्सप्रेसवे और कॉरिडोर पर काम तेज हो गया है. इस महाजाल से उत्तर-दक्षिण बिहार की दूरी मिटेगी और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे.
Bihar Expressway: बिहार में सड़क नेटवर्क को पूरी तरह आधुनिक और चकाचक बनाने के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर काम कर रही है. इस महायोजना के तहत उत्तर और दक्षिण बिहार की दूरी को मिटाने के लिए कई शानदार ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं. इसमें सबसे प्रमुख आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है जो गया के आमस से दरभंगा तक जाएगा. 189 किलोमीटर लंबे इस पहले एक्सेस कंट्रोल्ड मार्ग को इसी साल 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही बिहार का पहला 6-लेन पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे भी तैयार हो रहा है जो करीब 245 से 280 किलोमीटर लंबा होगा. इसके बनने से पटना से पूर्णिया का 8 घंटे का सफर घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रह जाएगा जो सीमांचल के विकास में मील का पत्थर साबित होगा.
राजधानी को जाम से मुक्ति और स्थानीय कॉरिडोर
पटना और उसके आस-पास के इलाकों को रोजाना के थकाऊ ट्रैफिक जाम से परमानेंट राहत दिलाने के लिए लगभग 150 किलोमीटर लंबी पटना रिंग रोड विकसित की जा रही है जिस पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह रिंग रोड भारी वाहनों को शहर के अंदर घुसे बिना सीधे आगे निकलने का रास्ता देगी. इसके अलावा 120 किलोमीटर लंबा पटना-आरा-सासाराम ग्रीनफील्ड कॉरिडोर लगभग 3,700 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है जो पश्चिम बिहार में कृषि और व्यापार को मजबूत करेगा. वहीं दानापुर-बिहटा-कोइलवर-बक्सर कॉरिडोर दिल्ली-कोलकाता रोड नेटवर्क से जुड़ाव को बेहतर बनाएगा जबकि 107 किलोमीटर लंबा रजौली-बख्तियारपुर कॉरिडोर बिहार और झारखंड के बीच माल ढुलाई को बेहद आसान कर देगा.
अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी के बड़े प्रोजेक्ट्स
बिहार से गुजरने वाले कई राष्ट्रीय स्तर के एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स भी राज्य की तस्वीर बदलने के लिए तैयार हैं. इनमें 416 किलोमीटर लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सबसे खास है जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा और इसका सीधा फायदा नेपाल बॉर्डर के इलाकों को भी मिलेगा. इसके साथ ही उत्तर भारत को झारखंड और बंगाल से जोड़ने के लिए वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर पर काम चल रहा है जो लॉजिस्टिक्स और उद्योगों को नई रफ्तार देगा. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे है जो नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल को सीधे हल्दिया पोर्ट से जोड़कर पेट्रोलियम परिवहन और बड़े बिजनेस को बहुत आसान बना देगा.
बदलेगी अर्थव्यवस्था और युवाओं को मिलेंगे नए अवसर
इन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने के बाद बिहार की अर्थव्यवस्था और परिवहन का पूरा ढांचा हमेशा के लिए बदल जाएगा. चंपारण, सीमांचल और अन्य पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बिहार सरकार अपने इंजीनियरों को दूसरे विकसित राज्यों के आधुनिक सड़क मॉडल्स का अध्ययन कराने की तैयारी भी कर रही है. बेहतर सड़कों के बनने से राज्य में बड़े पैमाने पर देश-विदेश का निवेश आएगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे. इसके अलावा किसानों की फसलें और कृषि उत्पाद बहुत तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे जिससे ग्रामीण इलाकों में समृद्धि आएगी और बिहार तरक्की की एक नई कहानी लिखेगा.
Bihar Expressway: बिहार में सड़क नेटवर्क को पूरी तरह आधुनिक और चकाचक बनाने के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर काम कर रही है. इस महायोजना के तहत उत्तर और दक्षिण बिहार की दूरी को मिटाने के लिए कई शानदार ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं. इसमें सबसे प्रमुख आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है जो गया के आमस से दरभंगा तक जाएगा. 189 किलोमीटर लंबे इस पहले एक्सेस कंट्रोल्ड मार्ग को इसी साल 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही बिहार का पहला 6-लेन पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे भी तैयार हो रहा है जो करीब 245 से 280 किलोमीटर लंबा होगा. इसके बनने से पटना से पूर्णिया का 8 घंटे का सफर घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रह जाएगा जो सीमांचल के विकास में मील का पत्थर साबित होगा.
राजधानी को जाम से मुक्ति और स्थानीय कॉरिडोर
पटना और उसके आस-पास के इलाकों को रोजाना के थकाऊ ट्रैफिक जाम से परमानेंट राहत दिलाने के लिए लगभग 150 किलोमीटर लंबी पटना रिंग रोड विकसित की जा रही है जिस पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह रिंग रोड भारी वाहनों को शहर के अंदर घुसे बिना सीधे आगे निकलने का रास्ता देगी. इसके अलावा 120 किलोमीटर लंबा पटना-आरा-सासाराम ग्रीनफील्ड कॉरिडोर लगभग 3,700 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है जो पश्चिम बिहार में कृषि और व्यापार को मजबूत करेगा. वहीं दानापुर-बिहटा-कोइलवर-बक्सर कॉरिडोर दिल्ली-कोलकाता रोड नेटवर्क से जुड़ाव को बेहतर बनाएगा जबकि 107 किलोमीटर लंबा रजौली-बख्तियारपुर कॉरिडोर बिहार और झारखंड के बीच माल ढुलाई को बेहद आसान कर देगा.
अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी के बड़े प्रोजेक्ट्स
बिहार से गुजरने वाले कई राष्ट्रीय स्तर के एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स भी राज्य की तस्वीर बदलने के लिए तैयार हैं. इनमें 416 किलोमीटर लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सबसे खास है जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा और इसका सीधा फायदा नेपाल बॉर्डर के इलाकों को भी मिलेगा. इसके साथ ही उत्तर भारत को झारखंड और बंगाल से जोड़ने के लिए वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर पर काम चल रहा है जो लॉजिस्टिक्स और उद्योगों को नई रफ्तार देगा. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे है जो नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल को सीधे हल्दिया पोर्ट से जोड़कर पेट्रोलियम परिवहन और बड़े बिजनेस को बहुत आसान बना देगा.
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बदलेगी अर्थव्यवस्था और युवाओं को मिलेंगे नए अवसर
इन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने के बाद बिहार की अर्थव्यवस्था और परिवहन का पूरा ढांचा हमेशा के लिए बदल जाएगा. चंपारण, सीमांचल और अन्य पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बिहार सरकार अपने इंजीनियरों को दूसरे विकसित राज्यों के आधुनिक सड़क मॉडल्स का अध्ययन कराने की तैयारी भी कर रही है. बेहतर सड़कों के बनने से राज्य में बड़े पैमाने पर देश-विदेश का निवेश आएगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे. इसके अलावा किसानों की फसलें और कृषि उत्पाद बहुत तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे जिससे ग्रामीण इलाकों में समृद्धि आएगी और बिहार तरक्की की एक नई कहानी लिखेगा.