---विज्ञापन---

बिहार angle-right

NDA से कौन-सी शर्त मनवाना चाहते हैं चिराग पासवान, कहां अटका है सीट शेयरिंग का फार्मूला?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए में सीट बंटवारे का फार्मूला लगभग तय है, लेकिन चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) की मांगें मामला उलझा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक उन्हें 25-26 सीटें ऑफर की गई हैं, लेकिन वे 45 से अधिक सीटों की मांग पर अड़े हैं. एनडीए ने लोकसभा क्षेत्रों के आधार पर सीटें तय की हैं, जबकि चिराग अधिक प्रभावशाली क्षेत्रों और नेताओं के लिए टिकट चाहते हैं.

---विज्ञापन---

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीट शेयरिंग का फार्मूला लगभग तय हो चुका है लेकिन चिराग पासवान को लेकर मामला लटक गया है. आज चिराग के साथ बीजेपी नेताओं की बैठक हुई, लेकिन गठबंधन के सीटों के ऐलान से पहले एक-दो दिन में एक और बैठक होने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक एलजेपी को इस बार अधिकतम 25-26 सीटें मिलने की संभावना है. हालांकि चिराग की मांग इससे काफी अधिक है.

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर NDA में सीट शेयरिंग पर LJP (रामविलास) के नेता चिराग पासवान की मांग के कारण मामला लटका हुआ है. विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि NDA में सीट बंटवारा अगले दो-तीन दिनों में पूरा हो जाएगा और पटना में इसका ऐलान हो सकता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चिराग पासवान की कौन सी शर्त है, जिसके कारण अभी तक फार्मूला नहीं बन पाया है?

---विज्ञापन---

दरअसल, एनडीए ने सीट शेयरिंग का फार्मूला लोकसभा सांसदों के क्षेत्रों के आधार पर तय किया है. चिराग पासवान की पार्टी के पास बिहार में कुल 5 लोकसभा सांसद हैं – हाजीपुर, जमुई, वैशाली, समस्तीपुर और खगड़िया. हर लोकसभा क्षेत्र में औसतन 6-6 विधानसभा सीटें आती हैं. सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में नंबर-1 प्रदर्शन वाले विधानसभा क्षेत्रों को चिराग की पार्टी को ऑफर किया गया है.

क्या है चिराग की डिमांड?

इस हिसाब से चिराग की पार्टी को लगभग 22-23 सीटें मिल रही हैं. इसके अलावा 2-3 सीटें और जोड़ने की संभावना है, जिससे कुल संख्या 25-26 सीटें बनती है. हालांकि चिराग चाहते हैं कि 2024 में जीती हुई 5 लोकसभा सीटों के आधार पर उनकी पार्टी को 2-2 विधानसभा सीटें इन क्षेत्रों में दी जाएं, बाकी सीटें अलग इलाकों में मिलें. इससे सिर्फ इन 5 लोकसभा सीटों से ही 10 विधानसभा सीटें तय हो जाएंगी.

---विज्ञापन---

इसके अलावा पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर सम्मानजनक सीटों की मांग कर रही है और बड़े नेताओं के लिए भी सीटें मांगी गई हैं. 2020 विधानसभा चुनाव में अकेले लड़कर चिराग पासवान ने NDA को नुकसान पहुंचाया था. इस बार बीजेपी चाहती है कि वे गठबंधन में बने रहें और वोट बैंक बिखरे नहीं. नीतीश कुमार और चिराग के बीच पिछले वर्षों में रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन बीजेपी के दबाव और चुनावी रणनीति के कारण जेडीयू को उन्हें सीटें देनी पड़ीं.

बीजेपी ने दिया आश्वासन

सूत्रों का कहना है कि कई सीटों पर लोकल लेवल पर जेडीयू और लोजपा के बीच टकराव देखने को मिल सकता है. चिराग पासवान खुद को दलित और युवा का नेता साबित करना चाहते हैं. बीजेपी ने उनके साथ हुई बैठकों में उनकी मांगों पर विचार करने और गठबंधन के भावनात्मक और चुनावी मुद्दों पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है. कल रामविलास पासवान की पुण्यतिथि है और इसकी तैयारियों को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई.

---विज्ञापन---

बरहमपुर, गोविंदगंज और हिसुआ की सीट पर भी पेच है. बरहमपुर की सीट हुलास पांडेय के लिए और गोविंदगंज राजू तिवारी के लिए चाहते हैं, हिसुआ सीट भी धीरेंद्र कुमार मुन्ना के लिए चिराग चाहते हैं. सूत्रों के अनुसार चिराग पासवान को एनडीए में अधिकतम 25-26 सीटें मिलने की संभावना है. यह संख्या कम लग सकती है, लेकिन पिछले हालात और गठबंधन की जरूरतों को देखते हुए यह चिराग के लिए बड़ी राजनीतिक वापसी है.

यह भी पढ़ें: बीजेपी-चिराग में फंस गया पेंच! सीट बंटवारे को लेकर नहीं बन पा रही सहमति, बैठक में क्या हुआ?

---विज्ञापन---

एनडीए ने यह भी संदेश दिया है कि गठबंधन में उनका सम्मान और भूमिका कायम रहेगी. आने वाले विधानसभा चुनाव में यह सीट बंटवारा बिहार की राजनीति में नए समीकरण और रणनीतियों का संकेत देता है. हालांकि चिराग अपने लिए 45 से 54 सीटों की मांग कर रहे हैं. इतनी सीटें एनडीए में मिलना चिराग को संभव नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि 25-26 सीटों पर बात बन सकती है.

First published on: Oct 07, 2025 06:14 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola