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Jaspal Rana Interview With News 24: भारत के फेमस शूटर जसपाल राणा के निधन से खेल जगत में मायूसी छा गई है, वो एक ऐसे एथलीट थे, जिन्होंने न सिर्फ भारत को कई मेडल्स दिलाए थे, बल्कि आज की यंग जेनरेशन को भी काफी ज्यादा इंस्पायर भी किया. ये उनकी ही कोचिंग का नतीजा है, कि मनु भाकर ने शूटिंग में 2 ओलंपिक मेडल्स अपने नाम किए. उन्होंने साल 1998 में न्यूज़ 24 को एक खास इंटव्यू दिया था.

जब खुलकर बोले थे जसपाल राणा

जसपाल राणा ने कई साल पहले बीएजी नेटवर्क की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद को एक बेबाक इंटरव्यू दिया था. इसमें उन्होंने बताया था कि शूटर को सरकार की गलत नीतियों के कारण क्या-क्या परेशानी झेलनी पड़ती है, और वो इस स्ट्रगल के बावजूद कैसे मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन करते है.

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सरकार की नीतियों का किया था विरोध

इस महान शूटर ने बताया था कि कैसे सरकार की गलत इम्पोर्ट पॉलिसी के कारण शूटर्स को वेपन वक्त पर नहीं मिल पाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है. साथ ही सिस्टम में कई ऐसे लोग भी हैं जो उन्हें आगे बढ़ते हुए देखना नहीं चाहते, और उनके लिए रुकावट पैदा करते हैं. इस बातचीत में उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में भी खुलकर बात की थी.

जसपाल राणा का पूरा इंटरव्यू

सवाल: इस क्रिकेट क्रेजी नेशन में आपने शूटिंग जैसे स्पोर्ट्स को क्यों चुना?

जसपाल राणा: असल में मैंने जब ये शुरू किया था, तब मुझे पता नहीं था कि मैं चैंपियन बनूंगा, या वर्ल्ड चैंपियन बनूंगा. जब मैंने स्टार्ट किया जब मुझे शौक था, तब मेरे पिता इसी में थे,सिक्योरिटी में थे. मुझे कभी क्रिकेट से इतना लगाव रहा नहीं, मेरे घर में सिर्फ मां और भाई ही हैं जो कभी-कभी क्रिकेट देखते हैं.

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सवाल: तो क्या आपके पिता का आप पर काफी इंफ्लूएंस था इतना, कि यही वजह रही कि आप इस प्रोफेशन में आए?

जसपाल राणा: मुझे नहीं लगता, हालांकि ये एक वजह हो सकती है, लेकिन जहां तक मेरा ख्याल है, लेकिन जो हथियारों का क्रेज था बचपन से, वो भी एक वजह हो सकती है. फादर भी शूटिंग में थे, उनका भी इंफ्लूएंस हो सकता है,क्योंकि सुबह-शाम वही शूटिंग की बातें होती थीं. हो कह सकते हैं कि उसका भी योगदान रहा हो.

सवाल: लेकिन ये ख्याल कब आया कि यही करियर हो जो आप आगे ले जाना चाहते हैं?

जसपाल राणा: 1990 की बात है जब नेशनल लेवल पर मैंने 5 गोल्ड मेडल जीता था, तब मुझे कैश अवॉर्ड मिला था और कई तरह के पुरस्कार भी मिले थे. तब मेरे पिताजी को लगा कि ये लड़का कुछ कर सकता है, क्योंकि उसके पास टैलेंट है, तब मुझे पिस्टल थमाई गई, और प्रोपर ट्रेनिंग शुरू हुई. तब मैंने सोचा चलो इसी में आगे कदम बढ़ाते हैं.

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सवाल: तभी आपने तय कर लिया था कि ये आपका करियर होने वाला है?

जसपाल राणा: करियर तो नहीं, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि मैं इसमें कुछ कर सकता हूं, तब शूटिंग के बारे में सभी लोगों को पता नहीं होता था. तब अगर कोई मुझसे पूछता था कि कहां जा रहे हो, तब मैं कहता था कि शूटिंग के लिए जा रहा हूं, तब लोग कहते थे कौन सी पिक्चर की शूटिंग के लिए जा रहे हो (हंसते हुए).

सवाल: कभी लोगों ने ये तो नहीं पूछा कि शूटिंग का मतलब शिकार पर तो नहीं जा रहे हो?

जसपाल राणा: नहीं, तब मैं बच्चा था, तो लोगों को लगता था कि शूटिंग का मतलब, फिल्म शूटिंग के लिए जा रहा हूं.

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सवाल: जब लोगों को ऐसा लगता था, तब क्या आपको एक्सप्लेन करना पड़ता था कि किस तरह की शूटिंग के लिए आप जा रहे हैं?

जसपाल राणा: हां, तब मैं कहता था, कि पिस्टल शूटिंग, टारगेट शूटिंग के लिए जा रहे हैं, कोई शिकार करने नहीं जा रहे हैं.

सवाल: जसपाल, आपको लगता है कि अपने करियर में काफी स्ट्रगल करना पड़ा है, एक अवेरनेस के लेवल पर, और दूसरा स्पॉन्सर हासिल करने के लेवल पर? तब हमलोग आपके बोल्ड स्टेडमेंट्स को पढ़ते थे कि सरकार की पॉलिसी शूटिंग जैसे खेल के लिए अच्छी नहीं है.

जसपाल राणा: मैं पूरी तरह सरकार की नीतियों के खिलाफ रहा हूं, लेकिन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ नहीं रहा, क्योंकि ये वो लोग थे, जिन्होंने मेरी काफी मदद की है, ताकि काम सही से पूरा हो सके.

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सवाल: पॉलिसी से क्या परेशानी है, आप ये बताइए?

जसपाल राणा: पॉलिसी ऐसी है कि सिर्फ बेस्ट 10 शॉट को ही रिनाउंड शॉट सर्टिफिकेट मिलेगा, और सिर्फ वही लोग हथियार इम्पोर्ट कर सकते हैं, लेकिन कोई बेस्ट 10 में आएगा कैसे, अगर उसके पास बेस्ट वेपन नहीं होगा. ऐसे में हर साल एक ही लोग बेस्ट-10 में आते हैं, और वो ही लोग वेपन इम्पोर्ट कर सकते हैं. अगर आपको मेडल चाहिए, तो कुछ तो करना होगा. अगर 33 पर्सेंट में किसी को एग्जाम में पास कर दिया जा सकता है, तो यहां भी वही नियम हो, ऐसा तो नहीं होता कि जिसके बेस्ट-10 मार्क्स आए, वही पास होगा और बाकी फेल हो जाएंगे. इसलिए ये पॉलिसी ही गलत है.

सवाल: अच्छा आपने अभी, हाल फिलहाल में कोई गन या पिस्टल इम्पोर्ट किया है, आपको खुद कितना वक्त लगा?

जसपाल राणा: असल में मैंने पिछले साल इम्पोर्ट लाइसेंस के लिए अप्लाई किया था, नए वेपंस के लिए, 4 वेपन थे उसमें, और अभी तक उसका कुछ नहीं हो पाया है, तकरीबन एक साल हो गए हैं.

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सवाल: एक साल से आप उस वेपन के लिए इंतजार कर रहे हैं?

जसपाल राणा: वेट कर रहे हैं, क्योंकि ये पॉलिसी है (हंसते हुए)

सवाल: लेकिन आप कभी भी मंत्री के पास जा सकते हैं, कह सकते हैं कि मुझे इसकी जरूरत है, मुझे प्रायोरिटी बेसिस पर मिलना चाहिए?

जसपाल राणा: मुझे ये प्रायोरिटी बेसिस पर नहीं, चाहिए मुझे रेगुलर बेसिस पर मिलना चाहिए. इसमें 6 महीने से ज्यादा का वक्त नहीं लगना चाहिए, लेकिन फिर भी इसमें एक साल से ज्यादा का वक्त लग जाता है.

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जसपाल राणा के साथ इंटरव्यू का पूरा वीडियो यहां देखें

सवाल: लेकिन क्यों?

जसपाल राणा: मेरे मामले में ऐसा है कि कुछ लोग नहीं चाहते कि मैं आगे बढूं.

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सवाल: ये लोग कौन हैं?

जसपाल राणा: मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन कुछ लोग हैं ऐसे.

सवाल: तो आपको लगता है, कि आपके मामले में जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है.

जसपाल राणा: मैं इसके बारे में बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मेरा केस अलग है.अगर वो लोग इसमें खुश हैं, तो उन्हें खुश रहने दीजिए.

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सवाल: ये लोग किस फील्ड से हैं, कोई अधिकारी हैं?

जसपाल राणा: मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता (हंसते हुए).

सवाल: आप एक नेशनल फिगर हैं, आप पीएम के पास, खेल मंत्री के पास या किसी और मंत्री के पास सीधे मिलने जा सकते हैं.कह सकते हैं कि मेरे खेल और करियर को इस तरह प्रभावित किया जा रहा है. अगर आप ही नहीं लड़ेंगे, तो जो खिलाड़ी इस फील्ड में आया ही नहीं है, वो क्या करेगा.

जसपाल राणा: मेरा केस अलग है, उन्हें जो करना है, करने दीजिए, क्योंकि मैं फिर भी मेडल जीत रहा हूं, तो ये उनके गाल पर एक करारा तमाचा है.

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सवाल: जो वेपन आप यूज करते हैं, वो मात्र 17 साल पुराना वेपन है?

जसपाल राणा: हां, ये सच है.

सवाल: और आप अब तक इसी का इस्तेमाल कर रहे हैं?

जसपाल राणा: हां (हंसते हुए)

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सवाल: आपके पास कोई और ऑप्शन नहीं है?

जसपाल राणा: मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं है. यही वजह है कि मैंने इम्पोर्ट लाइसेंस के लिए अप्लाई किया है, कई लोग ऐसे भी हैं तो मेरी मदद करने की कोशिश करते हैं.

सवाल: आपका ये बयान हमेशा आता रहता है, कि स्पॉन्सर्स की कमी की वजह से आप ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट करना चाहते हैं, यहां पर फैसिलिटी नहीं है, पॉलिसी सही नहीं है, पैसा नहीं है, तो एक जसपाल राणा क्या करेगा?

जसपाल राणा: हमलोग लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन देश छोड़ना मेरे लिए आखिरी ऑप्शन होगा. मैंने एक बार कहा था, कि जब कुछ नहीं रहेगा, तब देश छोड़कर जाउंगा. बाकी हम फाइट कर रहे हैं, और करते रहेंगे.

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सवाल: लेकिन अभी आपके दिमाग में क्या चल रहा है, क्या लास्ट ऑप्शन अभी भी वही है?

जसपाल राणा: नहीं, अभी लास्ट ऑप्शन एग्जिस्ट नहीं करता है. उस टाइम था, जब हम कॉमनवेल्थ गेम्स में गए थे, तब मेरी बात हुई थी, मीटिंग हो रही थी. असल में क्या है, जो इंडियन मार्केट है न, वैसे भी डाउन चल रही थी, किसी भी स्पॉन्सर के पास इतना पैसा नहीं था, कि वो स्पॉन्सर कर सके.

सवाल: जसपाल अगर आज की तारीख में अगर कोई मौका आपको मिलता है, बाहर जाकर सेटल करने का, जिसमें आपको कुछ पैसा भी मिलता, इतनी स्पॉन्सरशिप होती कि आप अपने गेम को बेहतर कर सकें, परफॉर्मेंस को बेहतर कर सकें, तो आप क्या करेंगे?

जसपाल राणा: मैंने पहले बताया था कि ये मेरा लास्ट ऑप्शन रहेगा, क्योंकि मैं भारत में रहना चाहता हूं, आखिरी दम तक. लेकिन हमारे यहां कई ओलंपियन हैं, जिसका आज बुरा हाल है, देश में ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है कि उनको
देखभाल कर सके क्योंकि डेली लाइफ की जो जरूरतें हैं, उसको पूरा कर सकें, तो वो नौबत तो मैं अपने ऊपर नहीं आने दूंगा.

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सवाल: मतलब आपने 50 फीसदी मन बना लिया है कि आप बाहर जाएंगे.

जसपाल राणा: नहीं ऐसा कुछ नहीं है. मैंने सोच लिया है कि मैं लड़ता रहूंगा. हार नहीं मानूंगा.

सवाल: आपको बुरा नहीं लगता कि आप देश के लिए क्रिकेट से ज्यादा नाम करके आते हैं, लेकिन आपको लोग उस तरह से नहीं देखते, उस तरह से मॉडिलिंग असाइनमेंट नहीं मिलते हैं. आपके सामने रोड पर भीड़ जमा नहीं होती ऑटोग्राफ लेने के लिए. जबकि एक क्रिकेटर के लिए ऐसा होगा है.

जसपाल राणा: लेकिन ये अच्छा है न, आप अपनी जिंदगी वैसे ही जी सकते हैं, जैसा जीना चाहते हैं. मैं खुश हूं कि मेरे खेल ने मुझे जो कुछ भी दिया है. लोग मुझे जानते हैं, स्पॉन्सर्स और एड भी मिलते हैं. मेरा खेल एक मेंटल स्पोर्ट्स है, आप 2 चीजों पर एक साथ ध्यान नहीं दे सकते, इसलिए मॉडलिंग के लिए मैं नहीं जाता.

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सवाल: मॉडलिंग और प्रोडक्ट एंडोर्समेंट के जरिए वो लोग इतना पैसा कमाते हैं. वो काफी अमीर हैं.

जसपाल राणा: पैसा ही सब कुछ नहीं है

सवाल: क्या कामयाबी के रास्ते में जद्दोजहद बहुत है, आपके लिए?

जसपाल राणा: गेम ऐसा ही होता है. अगर सबकुछ आसान होता, तो कोई भी इसमें आ जाता.

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सवाल: लेकिन किस तरह के स्ट्रगल से आपको गुजरना पड़ा

जसपाल राणा: मैंने जो किया, वो भीड़ से अलग था, बहुत कम लोग करते हैं कि, मतलब ज्यादातर लोग क्रिकेट और हॉकी में जाना चाहते हैं, या फुटबॉल में क्योंकि वहां सिस्टम है, एक्सपोजर ज्यादा है. ऐसा नहीं है कि शूटिंग में एक्सपोजर नहीं है, लेकिन अब लोगों ने ज्यादा आना शुरू किया है, कई मेडल जीते हैं जैसे मनशेर सिंह वगैरह. आज छोटे बच्चे भी आ रहे हैं, वो सीखना चाहते हैं.

सवाल: लेकिन इस स्ट्रगल के दौरान भी तो लगता होगा कि इसे छोड़ दें, या फिर एकलव्य की तरह उसी पर आपका ध्यान है.

जसपाल राणा: एकलव्य की तरह तो ध्यान नहीं लगा है, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि इस स्पोर्ट्स को छोड़ दें, क्योंकि जो स्पोर्ट्सपर्सन होता है, उसकी क्लियर इंस्टिंक्ट होती है.

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सवाल: आपका लक्ष्य क्या है, कौन सा मेडल जीतना है. कहां पर जाना है, करियर की कुछ प्लानिंग तो होगी न?

जसपाल राणा: देखा जाए, तो मेरी पास एशियन मेडल है, वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड है, कॉमनवेल्थ मेडल है, नेशनल लेवल मेडल है, जो बचता है, वो सिर्फ ओलंपिक मेडल है.

सवाल: आपके गेम में किस चीज की जरूरत होती है?

जसपाल राणा: मेंटल एबिलिटी काफी मैटर करती है, क्योंकि जब आप फाइट करते हैं, तो बेस्ट-8 का फाइनल होता है. तब हर किसी का स्कोर का ऐलान हर शॉट के बाद किया जाता है, कभी भी गेम बदल सकता है, इसलिए कंसंट्रेशन कभी मैटर करता है.

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सवाल: आप अपने कंसंट्रेशन को बढ़ाने के लिए क्या करते हैं?

जसपाल राणा: आमतौर पर मैं योग करता हूं, मेरे पिता खुद एक योग इंस्ट्रक्टर रह चुके हैं, तो वही बचपन से फिजिकल ट्रेनिंग और योग वगैरह कराते हैं. तो कह सकते हैं कि जब घर में ही गुरु थे, तो हमने उसका काफी फायदा उठाया है.

सवाल: अभी भी गुरु से फायदा उठाते हैं आप?

जसपाल राणा: अभी तो वो राजनीति में चले गए हैं, यूपी में वो एमएलसी हैं, लेकिन जब भी कभी चैंपियनशिप होती है, तो वो एक महीने के लिए दिल्ली आ जाते हैं. फिर हमारी ट्रेनिंग होती है.

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सवाल: जसपाल, हमने पढ़ा है कि आप काफी नखुश रहे, जिस तरह से स्पॉन्सरशिप दी जा रही थी, आपके खुद के स्पॉन्सर्स फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स की वजह से पीछे हटने लगे थे. तो अब क्या स्टेटस है?

जसपाल राणा: मैं खुद को बेहतर कर रहा हूं, और अपने स्पॉन्सर्स के पास वापस जाउंगा.

सवाल: सालभर में एक शूटर पर कितना खर्च होता है?

जसपाल राणा: काफी खर्च होता है, ये काफी महंगा है, एक दिन में 4 हजार से 10 हजार तक भी खर्च हो सकते हैं.

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सवाल: तो अभी भी लोग आपका सपोर्ट नहीं करना चाहते?

जसपाल राणा: अभी लोग सपोर्ट कर रहे हैं, सरकार भी सपोर्ट कर रही है. मेरे मेडल जीतने में सरकार का सबसे बड़ा हाथ है. गोला बारूद मुझे फ्री ऑफ कॉस्ट मिल रहा है. बाकी जो पॉलिसी है, उनके खिलाफ मैं हमेशा लड़ता रहता हूं.

सवाल: देश में शूटिंग रेंट की क्या हालत है?

जसपाल राणा: यही तो वजह है कि शूटिंग को उतनी पॉपुलैरिटी नहीं मिल रही है. क्योंकि ये क्रिकेट और हॉकी की तरह नहीं है, कि ग्राउंड में जाओ और कहीं भी बैट-बॉल उठा लिया. आपको शूटिंग के लिए प्रोपर रेंज चाहिए. दिल्ली में हमारे पार तुगलकाबाद में डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज है, मुंबई में भी है, बैंगलोर में भी है, लेकिन हमें और ज्यादा चाहिए.

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सवाल: आप कहना चाहते हैं कि भारत में जो भी शूटिंग रेंज हैं, वो आउटडेटेड हैं?

जसपाल राणा: बैंगलोर वाले नए हैं, लेकिन मशीन पुरानी है?

सवाल: तो इंडिया में कोई ऐसी रेंज नहीं है, जो वर्ल्ड स्टैंडर्ड की हो

जसपाल राणा: नहीं, हमारे पास नहीं है.

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सवाल: हमने सुना है कि आपने अपने कमरे में भी छोटा सा रेंज बना रखा है?

जसपाल राणा: वो मेरे खुद के लिए है, जैसे अगर आप बारिश की वजह से रेंज नहीं जा सकते, तब हम घर में प्रैक्टिस कर सकते हैं.

सवाल: क्या कभी ऐसा होता है, कि आप रात में किसी भी वक्त उठकर शूटिंग करने लगते हैं.

जसपाल राणा: नहीं, इतना पागलपन तो नहीं है फिलहाल (हंसते हुए), लेकिन जैस सुबह प्रैक्टिस कर लीग, या शाम को 8 बजे प्रैक्टिस कर ली.

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सवाल: आप रोजाना कितने घंटे प्रैक्टिस करते हैं?

जसपाल राणा: ये इस बात पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह के कॉम्पिटिशन को कंपीट करने जा रहे हैं. जैसे कॉमनवेल्थ के लिए 4-5 घंटे, अगर 3-4 इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं, तो 6-7 घंटे, लेकिन अगर कोई कॉम्पिटिशन नहीं है, तो एक घंटा बहुत है.

सवाल: अच्छा, ये जो गेम है इसमें नेचुरल टैलेंट, या एक्वायर्ड ट्रेनिंग, किस पर ज्यादा डिपेंडेंट है ये गेम?

जसपाल राणा: दोनों.

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सवाल: लेकिन रेशियो कितना होना चाहिए?

जसपाल राणा: असल में मैं नहीं जानता कितना होना चाहिए, लेकिन ऐसा है कि आप किसी में नेचुरल टैलेंट डाल नहीं सकते, लेकिन ट्रेनिंग के जरिए आप काफी इम्प्रूव कर सकते हैं. अगर आपके पास टैलेंट है, और अच्छे कोच हैं, तब आप अच्छे खिलाड़ी बन सकते हैं. लेकिन अगर आपके पास टैलेंट है, लेकिन कोच अच्छे नहीं हैं, तो आप गलत चीज सीख सकते हैं.

सवाल: आप ऐसी फैमिली से आते हैं, जहां आपके भाई, बहन और मां भी शूटर रहे हैं. तो ये कैसे हुआ कि फैमिली में सब एक साथ इस में आ गए?

जसपाल राणा: असल में जब मैं छोटा था, तब पिता मुझे शूटिंग कराते थे, 90s में जब मैंने 5 मेडल जीते थे, तब पिता मुझे ट्रेनिंग कराते थे. तब मेरे भाई बहन शनिवार और रविवार को साथ ही आते थे, तब उन्होंने भी ये काम शुरू कर दिया. जब मेरी मां लंच लेकर आती थी, तब वो भी फ्री टाइम में पिस्टल से फायर कर लेती थीं, तो स्टेट लेवल पर उन्होंने भी मेडल लिया. जब कानपुर में नेशनल लेवल इवेंट हुआ तब मेरे पिता, भाई और बहन की टीम थी. तीनों ने सेंटर फायर में दिल्ली के लिए गोल्ड मेडल जीता था.

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सवाल: तो अब आपके माता-पिता ने ट्रेनिंग करना छोड़ दिया है?

जसपाल राणा: असल में उनका एक कोर्स हुआ था, वो कोच बनने के लिए था, उसमें एक शर्त थी कि अगर वो कोच बनते हैं, तो वो कभी कंपीट नहीं कर पाएंगे. तब उसके बाद उन्होंने छोड़ दिया था.

सवाल: आप लोग जब घर में बैठते हैं, तब शूटिंग के अलावा कोई और बात करते हैं?

जसपाल राणा: हम शूटिंग के अलावा ही बात करते हैं? घर पर हम शूटिंग की बात नहीं करते, लेकिन जब हम रेंज पर जाते हैं, तब हम सिर्फ शूटिंग की ही बात करते हैं.

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सवाल: अच्छा, आपकी जो वाइफ हैं, वो सेम फील्ड की नहीं हैं, तो क्या आपलोगों ने उन्हें भी मोडिफाई करके शूटिंग लवर बना दिया है? क्या ये सच है?

जसपाल राणा: हां, ये सच है.

सवाल: आप दोनों की मुलाकात कैसे हुई थी?

जसपाल राणा: फैमिली फ्रेंड्स के जरिए.

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सवाल: क्या आपकी लव मैरिज थी?

जसपाल राणा: हां आप एक तरह से कह सकते हैं.

सवाल: अच्छा आपको लगता नहीं है, कि आपका एक्सेप्टेंस लेवल यंग गर्ल्स में कम हो गया है, जब आपकी शादी हो गई?

जसपाल राणा: ऐसा कहा जाता है कि अगर आपको कुछ पाना है, तो कुछ खोना पड़ेगा.

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सवाल: आपको लगता है कि आपने कुछ पाया है?

जसपाल राणा: हां, मैंने पाया है?

सवाल: अच्छा आपने इतनी जल्दी शादी क्यों कर ली?

जसपाल राणा: ये लंबी कहानी है, मैंने सोचा नहीं था कि मैं इतनी जल्दी शादी कर लूंगा, लेकिन कुछ बहुत जल्दी क्लिक कर गया, और कई बार चीजें आपके हाथों में नहीं होती. अगर आपको अर्ली एज में अच्छी पार्टनर मिल जाती, तो ठीक है.

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First published on: Jun 12, 2026 06:52 PM

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Shariqul Hoda

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