Sunil Sharma
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हाल ही हुए एक रिसर्च के अनुसार Covid-19 वायरस मानव शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करने वाले माइटोकॉन्ड्रिया पर घातक प्रभाव डाल सकता है। इसकी वजह से हमारा शरीर कई तरह की अन्य बीमारियों से ग्रसित हो सकता है और उनका नेगेटिव इफेक्ट शरीर को झेलना पड़ सकता है। शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया कि कोविड 19 वायरस के दुष्प्रभाव के चलते फेफड़ों के अलावा भी शरीर के कई अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
माइटोकॉन्ड्रिया शरीर की कोशिकाओं में होता है। इसका मुख्य काम कोशिका को काम करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध करवाना होता है। यदि किसी कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया क्षतिग्रस्त हो जाए तो वह कोशिका मर जाती है। इस तरह कोशिकाओं के मरने और नई कोशिकाओं के न बनने के कारण शरीर क्षतिग्रस्त होने लगता है।
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हमारे शरीर में माइटोकॉन्ड्रिया उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार जीन कोशिका के DNA और माइटोकॉन्ड्रियन के अंदर स्थित माइटोकॉन्ड्रियल DNA में होता है। कोविड वायरस इन्हीं डीएनए और जीन को प्रभावित करता है। रिसर्च में पाया गया कि वायरस के कारण फेफड़ों में मौजूद माइटोकॉन्ड्रियल जीन भी प्रभावित हुआ था जो धीरे-धीरे सही हो गया लेकिन इसके साथ-साथ हृदय और गुर्दे और लीवर में भी दबा रहा। शरीर के इन अंगों में वायरस से खराब हुआ माइटोकॉन्ड्रिया सही नहीं हुआ और शरीर पर उसके घातक प्रभाव देखने को मिले।
शोधकर्ताओं के अनुसार जब शव परीक्षण किया गया तो फेफड़ों में वायरल लोड अपने चरम पर था जबकि मस्तिष्क में किसी भी तरह का SRS-COV-2 नहीं पाया गया। इस रिसर्च से पता चला कि मानव शरीर में फेफड़ों की कोशिकाएं समय के साथ खुद को रिकवर कर लेती हैं परन्तु अन्य अंगों, खासकर हृदय में माइटोकॉन्ड्रिययल रिकवर नहीं हो पाता है। इससे पता चलता है कि कोविड-19 एक श्वसन संबंधी रोग नहीं है वरन इससे अधिक घातक है और सिस्टेमैटिक तरीके से शरीर के कई अंगों को खराब करता है।
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