प्रशांत महासागर के नीचे फटने वाली है धरती! वैज्ञानिकों ने पहली बार देखी टेक्टोनिक प्लेट में इतनी गहरी दरार, क्या आने वाला है महा-विनाश?
Science News: प्रशांत महासागर की गहराई में जुआन डी फुका प्लेट के टूटने की पहली स्पष्ट तस्वीरें सामने आई हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह विशाल टेक्टोनिक प्लेट टुकड़ों में बिखर कर धीरे-धीरे खत्म हो रही है.
Science News in Hindi: प्रशांत महासागर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में वैज्ञानिक एक ऐसी घटना के गवाह बने हैं जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. वैंकूवर द्वीप के पास समुद्र की गहराई में जुआन डी फुका नामक टेक्टोनिक प्लेट धीरे-धीरे बिखर रही है. वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ‘सबडक्शन जोन’ को अपनी आंखों के सामने टूटते हुए देखा है. साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक धरती की यह विशाल परत अंदर ही अंदर कई हिस्सों में फट रही है. शोधकर्ताओं ने उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर समुद्र के नीचे की ऐसी तस्वीरें ली हैं जिनमें साफ दिख रहा है कि प्लेट के बीच में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं. एक मुख्य फॉल्ट यानी दरार वाली जगह पर तो प्लेट का एक हिस्सा करीब पांच किलोमीटर तक नीचे धंस गया है.
एक साथ नहीं बल्कि टुकड़ों में मरेगा यह जोन
लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रैंडन शक का कहना है कि यह पहली बार है जब हमें किसी मरते हुए सबडक्शन जोन की इतनी साफ तस्वीर मिली है. सबडक्शन जोन वे जगहें होती हैं जहां एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे दब जाती है, जिससे दुनिया के सबसे खतरनाक भूकंप और ज्वालामुखी पैदा होते हैं. आमतौर पर माना जाता था कि ये सिस्टम एक साथ काम करना बंद करते हैं, लेकिन नई खोज से पता चला है कि यह प्लेट एक बड़े ट्रेन हादसे की तरह धीरे-धीरे पटरी से उतर रही है. यह प्रक्रिया एक झटके में होने के बजाय लाखों सालों तक चलती है और प्लेट छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर अलग हो जाती है. वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को ‘पीसवाइज टर्मिनेशन’ का नाम दिया है.
इस खोज में सबसे हैरान करने वाली बात भूकंप के रिकॉर्ड से जुड़ी है. समुद्र के नीचे 75 किलोमीटर लंबे एक हिस्से में कुछ जगहों पर तो छोटे भूकंप आ रहे हैं, लेकिन उनके ठीक बगल के हिस्से बिल्कुल खामोश हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये खामोश इलाके सबसे ज्यादा खतरनाक हैं क्योंकि यहां प्लेट पूरी तरह से टूटकर अलग हो चुकी है. जब चट्टानें एक-दूसरे से जुड़ी ही नहीं होतीं, तो वहां घर्षण नहीं होता और भूकंप आना बंद हो जाते हैं. यह इस बात का सबूत है कि दरार पूरी प्लेट में फैल रही है. जैसे-जैसे ये छोटे टुकड़े अलग होते जा रहे हैं, बड़ी प्लेट की वह ताकत कम होती जा रही है जो उसे नीचे की ओर खींचती थी. अंत में यह पूरा सिस्टम शांत होकर बंद हो जाएगा.
---विज्ञापन---
भविष्य के भूकंपों के लिए क्या हैं इसके मायने?
हालांकि इस खोज का मतलब यह नहीं है कि प्रशांत उत्तर-पश्चिमी इलाके में भूकंप का खतरा कल ही बदल जाएगा. वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि कास्केडिया सबडक्शन जोन अब भी बेहद शक्तिशाली भूकंप और सुनामी पैदा करने की क्षमता रखता है. इस नई खोज से वैज्ञानिकों को भूकंप के मॉडल को और सटीक बनाने में मदद मिलेगी. सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या भविष्य में आने वाला कोई बड़ा भूकंप इन नई दरारों को पार कर पाएगा या ये दरारें भूकंप की ऊर्जा को रोकने का काम करेंगी. नेशनल साइंस फाउंडेशन द्वारा समर्थित यह शोध हमें धरती के जीवन चक्र को समझने का एक नया नजरिया देता है. समुद्र के नीचे छिपी ये दरारें आने वाले लाखों सालों तक धरती के भूगोल को बदलती रहेंगी.
हिंदी न्यूज़/साइंस/प्रशांत महासागर के नीचे फटने वाली है धरती! वैज्ञानिकों ने पहली बार देखी टेक्टोनिक प्लेट में इतनी गहरी दरार, क्या आने वाला है महा विनाश?