Vat Purnima Vrat 2026: शादीशुदा महिलाओं को पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट पूर्णिमा व्रत रखना चाहिए. वट पूर्णिमा व्रत माता सावित्री की पूजा के लिए खास होता है. माता सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता और संकल्प से यमराज से अपने पति के प्राण वापस प्राप्त कर लिये थे. वट सावित्री पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखना चाहिए. आइये वट पूर्णिमा व्रत की पूजा शुभ मुहूर्त और इस दिन किन बातों का ध्यान रखें इसके बारे में जानते हैं.
वट पूर्णिमा व्रत पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:06 से 04:46
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:26 से 05:26
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:57 से दोपहर 12:52
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:44 से 03:40
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:22 से 07:42
सायाह्न सन्ध्या- शाम 07:23 से रात 08:23
अमृत काल- रात में 08:53 से 10:40
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वट पूर्णिमा पर क्या करें?
वट पूर्णिमा का व्रत करें और इस दिन सात्विक भोजन करें. वट पूर्णिमा व्रत के दिन वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए. बरगद के पेड़ के तने को कच्चे सूत या कलावे से लपेटें. आप वट वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें. आप पूजा के दिन सावित्री और सत्यवान की कथा का पाठ करें. इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है. वट सावित्री व्रत पर महिलाओं को सोलह श्रृंगार करना चाहिए.
वट पूर्णिमा पर क्या न करें?
वट पूर्णिमा व्रत के दौरान काले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें. इस दिन लाल और हरे रंग के कपड़े पहनना अच्छा होता है. व्रत के दिन क्रोध, झगड़ा या वाद-विवाद से बचना चाहिए. व्रत के दौरान मन शांत रखें. पति का सम्मान करें. वट पूर्णिमा के दिन बाल कटवाना और नाखून काटना वर्जित होता है. इस दिन मांस खाने, लहसुन-प्याज के सेवन से बचना चाहिए. आप तामसिक भोजन का सेवन करने से बचें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Vat Purnima Vrat 2026: शादीशुदा महिलाओं को पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट पूर्णिमा व्रत रखना चाहिए. वट पूर्णिमा व्रत माता सावित्री की पूजा के लिए खास होता है. माता सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता और संकल्प से यमराज से अपने पति के प्राण वापस प्राप्त कर लिये थे. वट सावित्री पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखना चाहिए. आइये वट पूर्णिमा व्रत की पूजा शुभ मुहूर्त और इस दिन किन बातों का ध्यान रखें इसके बारे में जानते हैं.
वट पूर्णिमा व्रत पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:06 से 04:46
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:26 से 05:26
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:57 से दोपहर 12:52
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:44 से 03:40
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:22 से 07:42
सायाह्न सन्ध्या- शाम 07:23 से रात 08:23
अमृत काल- रात में 08:53 से 10:40
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वट पूर्णिमा पर क्या करें?
वट पूर्णिमा का व्रत करें और इस दिन सात्विक भोजन करें. वट पूर्णिमा व्रत के दिन वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए. बरगद के पेड़ के तने को कच्चे सूत या कलावे से लपेटें. आप वट वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें. आप पूजा के दिन सावित्री और सत्यवान की कथा का पाठ करें. इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है. वट सावित्री व्रत पर महिलाओं को सोलह श्रृंगार करना चाहिए.
वट पूर्णिमा पर क्या न करें?
वट पूर्णिमा व्रत के दौरान काले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें. इस दिन लाल और हरे रंग के कपड़े पहनना अच्छा होता है. व्रत के दिन क्रोध, झगड़ा या वाद-विवाद से बचना चाहिए. व्रत के दौरान मन शांत रखें. पति का सम्मान करें. वट पूर्णिमा के दिन बाल कटवाना और नाखून काटना वर्जित होता है. इस दिन मांस खाने, लहसुन-प्याज के सेवन से बचना चाहिए. आप तामसिक भोजन का सेवन करने से बचें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.