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Vasudeva Vinayak Chaturthi 2026: वासुदेव विनायक चतुर्थी व्रत आज, जानें गणेश जी पूजा का शुभ मुहूर्त-विधि और वर्जित चंद्र दर्शन का समय

Vasudeva Vinayak Chaturthi 2026 Vrat: आज 22 मार्च 2026 को वासुदेव विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है, जो कि भगवान गणेश को समर्पित है. हालांकि, आज के दिन चांद देखना वर्जित है, अन्यथा व्यक्ति पर झूठा आरोप लग सकता है. यहां पर आप गणेश जी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और आज चंद्र निकलने के सही समय के बारे में जान सकते हैं.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Mar 22, 2026 06:45
Vasudeva Vinayak Chaturthi 2026
Credit- Social Media

Vasudeva Vinayak Chaturthi Vrat 2026: सनातन धर्म के लोगों के लिए वासुदेव विनायक चतुर्थी व्रत का खास महत्व है, जो कि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है. हालांकि, देश में कई जगहों पर इस व्रत को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि वासुदेव विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने और गणेश जी के वासुदेव स्वरूप की पूजा करने से जीवन के तमाम दुखों से मुक्ति मिलती है. साथ ही व्यक्ति को अच्छी सेहत, खुशहाल जीवन और लंबी उम्र आदि का आशीर्वाद मिलता है. हालांकि, वासुदेव विनायक चतुर्थी पर चांद को देखने की मनाही है, अन्यथा व्यक्ति पर चोरी या बदनामी का झूठा आरोप लग सकता है.

चलिए अब जानते हैं आज किस समय और कैसे गणेश जी की पूजा करना शुभ रहेगा. साथ ही आपको आज चांद निकलने के समय के बारे में पता चलेगा.

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वासुदेव विनायक चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:48 से सुबह 05:36
  • अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:04 से दोपहर 12:53
  • गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:32 से शाम 06:56
  • अमृत काल- शाम 06:23 से रात 10:42
  • चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त- सुबह 11:15 से दोपहर 01:41

आज वर्जित चन्द्र दर्शन का समय

आज 22 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर चन्द्रोदय होगा, जबकि चन्द्रास्त रात में 10:15 मिनट पर होने वाला है. ऐसे में वर्जित चन्द्र दर्शन का समय सुबह 08:15 से लेकर रात 10:15 मिनट तक रहेगा.

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वासुदेव विनायक चतुर्थी की पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करने के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें.
  • पूजन स्थल पर लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  • सिंदूर, अक्षत, दूर्वा, लड्डू, मोदक, शमीपत्र और सुपारी अर्पित करते हुए भगवान गणेश के नाम का जाप करें.
  • घी का दीपक जलाने के बाद व्रत की कथा का पाठ करें.
  • आरती करने के बाद अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें.
  • चंद्रोदय के बाद गणेश जी की पूजा करने के पश्चात प्रसाद खाकर आप व्रत खोल सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 22, 2026 06:44 AM

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