Neem Karoli Baba: 53 साल से यहां सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश, फिल्म 'हनुमान अंश' के बाद सामने आई अनसुनी कहानी

Neem Karoli Baba: फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद नीम करोली बाबा से जुड़े किस्से फिर चर्चा में हैं. इसी बीच उनके अस्थि कलश को लेकर एक दावा सामने आया है. कहा जा रहा है कि यह कलश 53 साल से मध्य प्रदेश के एक शहर में सुरक्षित है. आइए जानते हैं पूरी कहानी.

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‘हनुमान अंश’ के बाद नीम करोली बाबा का अस्थि कलश चर्चा में है। (फोटो क्रेडिट: AI | News24)

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Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा की जीवनी पर आधारित एक फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने अभी धूम मचा रखी है. फिल्म देखने वाले अनेक दर्शकों ने सोशल मीडिया पर यह स्वीकार किया है, फिल्म देखने के दौरान वे रो पड़े थे. फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद बाबा से जुड़े किस्से भी खूब शेयर किए जा रहे हैं. इसी बीच उनसे जुड़ी एक ऐसी बात सामने आई है, जो शायद बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल, आजकल नीम करोली बाबा के अस्थि कलश की बात भी छिड़ी हुई है. कहा जा रहा है कि नीम करोली बाबा का अस्थि कलश पिछले 53 साल से भोपाल में सुरक्षित रखा है. यह कलश उनके बड़े बेटे अनेग सिंह के परिवार ने आज तक संभालकर रखा है. आइए जानते हैं, यह बात कितनी सच है और इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है?

महाराज जी ने वृंदावन में ली थी समाधि

नीम करोली बाबा को उनके साधक आज भी महाराज जी कहते हैं. बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में समाधि ली थी. उनके देह त्यागने के बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया था. लेकिन अस्थियों का एक हिस्सा उनके बड़े बेटे भोपाल ले आए थे. तभी से यह अस्थि कलश इस परिवार के पास सुरक्षित है.

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भोपाल से बाबा का खास लगाव

नीम करोली बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया कि बाबा को भोपाल बेहद पसंद था. साल 1970 में बाबा करीब 10 दिन उनके अरेरा कॉलोनी वाले घर में रुके थे. इस दौरान उन्होंने भोपाल की कई जगहें देखीं. उन्होंने नेवरी मंदिर में रात भी बिताई थी. बाबा का भोपाल से यह खास जुड़ाव परिवार के लिए आज भी मायने रखता है. इसी वजह से अस्थियों का एक हिस्सा यहीं रखने का फैसला हुआ.

परिवार की आस्था

डॉ. धनंजय शर्मा के पिता और चाचा अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनके पिता का करीब चार साल पहले 97 साल की उम्र में निधन हुआ था. परिवार के लोग आज अलग-अलग जगह रहते हैं. फिर भी बाबा के लिए उनकी आस्था कम नहीं हुई है. डॉ. धनंजय बताते हैं कि बाबा ने उन्हें हनुमानजी की एक खास प्रतिमा खुद दी थी. वह प्रतिमा आज भी उनके घर में पूजा जाती है.

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अनोखा अस्थि कलश

डॉ. धनंजय के मुताबिक, यह अस्थि कलश अपने आप में खास है. उनका दावा है कि उनके परिवार के अलावा देश में ऐसा दूसरा कलश कहीं नहीं है. बाबा को हनुमानजी का अवतार मानने वाले भक्तों के लिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. परिवार के लिए यह सिर्फ एक कलश नहीं है. यह बाबा से जुड़ी उनकी गहरी आस्था और यादों की निशानी है.

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भोपाल में बनेगा भव्य मंदिर

परिवार अब भोपाल में नीम करोली बाबा के नाम से मंदिर और आश्रम बनाने की तैयारी कर रहा है. योजना के मुताबिक, मंदिर बनने के बाद अस्थि कलश को वहां विधि-विधान से स्थापित किया जाएगा. इससे 53 साल से परिवार के पास सुरक्षित यह धरोहर लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र बन सकती है. बाबा की यादों से जुड़ी यह जगह आगे चलकर भक्तों के लिए खास धार्मिक स्थल बनने की उम्मीद है.

फिल्म ‘हनुमान अंश’ से छिड़ी चर्चा

फिल्म ‘हनुमान अंश’ को साल 2026 में अभी तक का सबसे सक्सेसफुल फिल्म बताया जा रहा है. फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श लिखते हैं कि इस फिल्म ने कमाई के लिहाज से ‘आवारपन 2’ और ‘टॉक्सिक’ जैसी मूवीज को बॉक्स ऑफिस पर पछाड़ दिया है. वे अपने सोशल मीडिया पोस्ट लिखते हैं- ‘हनुमान अंश’ गेम चेंजर साबित हो रही है और नए रिकॉर्ड बना रही है.’ इस फिल्म के हिट होने के बाद नीम करोली से बाबा से जुड़ी अनेक कथा-कहानियां सोशल मीडिया पर डाली जा रही हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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