Shri Janki Stotra: माता सीता भगवान राम की अर्धांगिनी थीं, जिनका एक नाम जानकी भी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में धन की देवी मां लक्ष्मी ने माता सीता का रूप धारण करके धरती पर जन्म लिया था ताकि वो पृथ्वी से अधर्म का नाश कर सकें. इसके अलावा रावण के अंत और श्री राम के अवतार के उद्देश्य को पूरा करने में भी माता सीता की अहम भूमिका थी. माना जाता है कि माता सीता की पूजा करने से सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. खासकर, सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए माता सीता की पूजा करती हैं.
यदि आप भी माता सीता से विशेष आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो नियमित रूप से श्री जानकी स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. श्री जानकी स्तोत्र में माता सीता को लक्ष्मी का अवतार और उनके कल्याणकारी, दरिद्रता का नाश करने वाली देवी व शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है. यहां पर आप श्री जानकी स्तोत्र के सही लिरिक्स पढ़ सकते हैं.
श्री जानकी स्तोत्र
जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्
जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥१॥
दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् ।
विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम् ॥२॥
भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम् ।
पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रीं भक्ताभीष्टां सरस्वतीम् ॥३॥
पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम् ।
अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम् ॥४॥
आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम् ।
प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम् ॥५॥
नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम् ।
नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम् ॥६॥
पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्षःस्थलालयाम् ।
नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम् ॥७॥
आह्लादरूपिणीं सिद्धिं शिवां शिवकरीं सतीम् ।
नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम् ।
सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा ॥८॥
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श्री जानकी स्तोत्र पढ़ने व सुनने के लाभ
- पापों का नाश होता है.
- घर में खुशहाली आती है.
- वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है.
- दरिद्रता दूर होती है.
- शत्रु पर विजय प्राप्त होती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.










