- शनि जयंती के दिन मांसाहार और शराब का सेवन न करें.
- झूठ बोलने और विवाद करने से बचें.
- शनि जयंती के दिन लोहे और सरसों के तेल को खरीदने से बचें.
- घर में क्रोध और कलह न करें.
- काले कुत्ते, कौवे को भोजन कराएं.
- जरूरतमंद लोगों को दान करें.
---विज्ञापन---
Shani Jayanti 2026 Live Updates: शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव की पूजा का महत्व होता है. आज ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती के साथ ही शनि अमावस्या है. शनिवार का दिन पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है. आज शनि जयंती के अवसर पर शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और साढ़ेसाती-ढैय्या से मुक्ति के उपायों आदि के बारे में जानते हैं.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:07 से 04:48
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:50 से दोपहर 12:45
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:04 से 07:25
निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:38
शनि जयंती के दिन सरसों के तेल, काले तिल, उड़द की दाल, लोहे के बर्तन, काले वस्त्र और जूते-चप्पल का दान करना चाहिए. इन चीजों का दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं. इससे शनि दोष से राहत मिलती है. आप शनि जयंती के दिन इन चीजों का दान करें. ऐसा करने से आपके जीवन में चल रही परेशानियों का अंत होगा और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी.
- शनि जयंती के दिन मांसाहार और शराब का सेवन न करें.
- झूठ बोलने और विवाद करने से बचें.
- शनि जयंती के दिन लोहे और सरसों के तेल को खरीदने से बचें.
- घर में क्रोध और कलह न करें.
- काले कुत्ते, कौवे को भोजन कराएं.
- जरूरतमंद लोगों को दान करें.
- सरसों का तेल
- काले तिल
- काली उड़द
- काले कपड़े
- नीली फूल
- शमी के पत्ते
- सरसों के तेल का दीप
- लोहे की वस्तु
- शनि जयंती के दिन शनि दोष से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें.
- शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें.
- शनि ग्रह से संबंधित दोष को दूर करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए. पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- शनि जयंती पर सरसों के तेल, काले तिल और लोहे की चीजों का दान करें.
देशभर में शनिदेव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं. इन मंदिरों में दर्शन करने से भक्तों को शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है. शनि दोष से मुक्ति मिलती है. आइये देशभर के इन 5 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानते हैं.
शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र
शनि मंदिर, इंदौर
श्री शनि मंदिर कोकिलावन, मथुरा
शनिचरा मंदिर, मुरैना
शनि धाम, प्रतापगढ़
शनिदेव को सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया का पुत्र माना जाता है. उनके जन्म के समय शनिदेव की माता छाया शिव की तपस्या में लीन थीं. इसके कारण शनि देव का रंग काला रहा. उनकी माता संज्ञा की परछाई थीं इसका भी शनिदेव पर असर था. शनिदेव का रंग देख सूर्यदेव ने उन्हें अपना पुत्र मानने से मना कर दिया. सूर्यदेव ने शनिदेव की माता को अपमानित किया. इसपर शनिदेव को क्रोध आया और उनकी दृष्टि से सूर्यदेव काले पड़ गए. इसके बाद सूर्यदेव ने शिव की तपस्या की और उनका तेज वापस आया. शनिदेव को तभी से न्याय और कर्मफल देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है. शनिदेव के जन्म की पूरी कहानी आप नीचे दिए लिंक पर पढ़ सकते हैं.
कैसे हुआ था शनिदेव का जन्म? जानिए इनके माता-पिता और भाई-बहन का नाम, पढ़ें शनि जन्म कथा
आज शनि जंयती के अवसर पर शनिदेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा के लिए इन पांच मंत्रों का जाप करें.
- ॐ शं शनैश्चराय नमः
- ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥
- ॐ भगभवाय विद्मये मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात् ॥
- नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
आज शनि जयंती के अवसर पर शनि चालीसा का पाठ अवश्य करें. शनि चालीसा का पाठ करने से शनिदेव प्रसन्न होंगे. इससे आपको सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति होगी. आप यहां पूरा शनि चालीसा पढ़ सकते हैं.
शनि चालीसा
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल।।
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।।
चौपाई
जयति-जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला।।
चारि भुजा तन श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै।।
परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।।
कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै।
हिये माल मुक्तन मणि दमकै।।
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल विच करैं अरिहिं संहारा।।
पिंगल कृष्णो छाया नन्दन।
यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन।।
सौरि मन्द शनी दश नामा।
भानु पुत्रा पूजहिं सब कामा।।
जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं।
रंकहु राउ करें क्षण माहीं।।
पर्वतहूं तृण होई निहारत।
तृणहूं को पर्वत करि डारत।।
राज मिलत बन रामहि दीन्हा।
कैकइहूं की मति हरि लीन्हा।।
बनहूं में मृग कपट दिखाई।
मात जानकी गई चुराई।।
लषणहि शक्ति बिकल करि डारा।
मचि गयो दल में हाहाकारा।।
दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग वीर को डंका।।
नृप विक्रम पर जब पगु धारा।
चित्रा मयूर निगलि गै हारा।।
हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी।।
भारी दशा निकृष्ट दिखाओ।
तेलिहुं घर कोल्हू चलवायौ।।
विनय राग दीपक महं कीन्हो।
तब प्रसन्न प्रभु ह्नै सुख दीन्हों।।
हरिशचन्द्रहुं नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी।।
वैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी मीन कूद गई पानी।।
श्री शकंरहि गहो जब जाई।
पारवती को सती कराई।।
तनि बिलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरि सुत सीसा।।
पाण्डव पर ह्नै दशा तुम्हारी।
बची द्रोपदी होति उघारी।।
कौरव की भी गति मति मारी।
युद्ध महाभारत करि डारी।।
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।
लेकर कूदि पर्यो पाताला।।
शेष देव लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।।
वाहन प्रभु के सात सुजाना।
गज दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना।।
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं।।
गर्दभहानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा।।
जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै।।
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी।।
तैसहिं चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लोह चांदी अरु ताम्बा।।
लोह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन सम्पत्ति नष्ट करावैं।।
समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी।।
जो यह शनि चरित्रा नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।।
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्राु के नशि बल ढीला।।
जो पंडित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई।।
पीपल जल शनि-दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत।।
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।
दोहा
पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव..
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बरधारी नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव..
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव..
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव..
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनि ग्रह को कर्मों के फलदाता और न्यायाधीश का दायित्व सौंपा गया है. शनि ग्रह लोगों को कर्मों के अनुसार फल देते हैं. शनिदेव अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर दंड या पुरस्कार देते हैं. शनि को अनुशासन और संयम के दाता माना जाता है. शनिदेव का मुख्य काम है कि, वह कर्मों का निष्पक्ष फल देते हैं.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:07 से 04:48
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:50 से दोपहर 12:45
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:04 से 07:25
निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:38
- स्नान करने के बाद काले या नीले कपड़े पहनें.
- शनि मंदिर जाएं और शनि देव की पूजा करें.
- शनि देव की मूर्ति के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- शनिदेव को फल, फूल, कपड़े, सरसों का तेल, काले तिल आदि अर्पित करें.
- शनिदेव के मंत्रों का जाप करें और शनिदेव की आरती करें.
- शनि जयंती पर पीपल के पेड़ की पूजा करें
- पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- गरीब और जरूरतमंदों को अन्न-धन का दान करें.
- शनि जयंती के दिन तेल और काले तिल का दान करें.
- सरसों के तेल में अपनी छाया देखकर दान करें.
- शनि जयंती पर उड़द की दाल का दान करें.
- शनि जयंती पर लोहे के बर्तन या लोही की चीजों का दान करें.
- आप काले वस्त्र या जूते-चप्पल का दान कर सकते हैं.
- शनि जयंती के दिन तेल और काले तिल का दान करें.
- सरसों के तेल में अपनी छाया देखकर दान करें.
- शनि जयंती पर उड़द की दाल का दान करें.
- शनि जयंती पर लोहे के बर्तन या लोही की चीजों का दान करें.
- आप काले वस्त्र या जूते-चप्पल का दान कर सकते हैं.
न्यूज 24 पर पढ़ें Religion, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।