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Pitru Photo Vastu: भगवान की तस्वीरों के साथ पूर्वजों की फोटो रखना क्यों है गलत, जानें सही दिशा और जरूरी नियम

Pitru Photo Vastu: घर में पितरों की फोटो लगाना सम्मान का प्रतीक है, लेकिन सही दिशा और जगह का ध्यान रखना जरूरी है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान की तस्वीरों के साथ पितरों की फोटो रखना उचित नहीं माना गया है. आइए जानते हैं, पितरों की फोटो कहां लगाएं, किन जगहों पर रखने से बचें ताकि जिंदगी में परेशानी न बढ़े?

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Pitru Photo Vastu: ऐसा कोई घर नहीं है, जिसमें पूर्वजों की यादें न जुड़ी हों. यही कारण है कि उन्हें सम्मान देने के लिए हम अपने पूर्वजों और पितरों की फोटो घर में लगाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तस्वीरों को गलत जगह रखना परिवार और खानदान के लिए मुसीबत बन सकता है? जी हां, वास्तु शास्त्र की मानें तो भगवान की मूर्तियों और पूर्वजों की फोटो का एक साथ रखना ठीक नहीं है. दरअसल, इस विषय को हल्के में लेने की बजाय गंभीरता से समझना जरूरी है, वरना जीवन गंभीर परेशानियों में घिरा रहता है. आइए जानते हैं, भगवान के साथ पितरों की फोटो रखना क्यों महापाप माना गया है?

भगवान और पूर्वजों की तस्वीर क्यों नहीं रखनी चाहिए साथ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान और पूर्वजों की तस्वीरों को एक साथ रखना कई कारणों से उचित नहीं माना गया है. पहली बात यह कि भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है, जबकि पितरों को स्मरण किया जाता है. दोनों के उद्देश्य अलग हैं. दूसरी बात, देवी-देवता ब्रह्मांडीय चेतना के प्रतीक हैं, जबकि पूर्वज पारिवारिक परंपराओं के वाहक हैं. इन दोनों को एक ही स्तर पर रखना वास्तु की दृष्टि से अशुभ माना गया है. ऐसा करने से घर में कलह, आर्थिक तंगी और मानसिक अशांति बढ़ सकती है.

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ऊर्जा में टकराव का नेगेटिव असर

हिन्दू धर्म में देवताओं की ऊर्जा पूरी तरह से सात्विक और मोक्ष देने वाली मानी गई है. वहीं पूर्वजों की ऊर्जा भावनाओं, स्मृतियों और पारिवारिक बंधनों से जुड़ी होती है. जब ये दोनों अलग-अलग तरह की ऊर्जाएं एक ही जगह मिलती हैं, तो वहां भयंकर वास्तु दोष लगने से अजीब सा-संघर्ष पैदा होता है. इसका नतीजा यह होता है कि घर में नकारात्मकता बढ़ती है और सुख-शांति पर ग्रहण लग जाता है.

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पितरों की फोटो के लिए सही दिशा क्या है?

वास्तु में पितरों की तस्वीरों के लिए दक्षिण दिशा को सबसे उपयुक्त बताया गया है. यह दिशा पितृ लोक और यमराज से जुड़ी मानी जाती है. दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण को भी ठीक माना जाता है. इन दिशाओं में फोटो लगाने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है.

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पितरों की फोटो किन जगहों पर न लगाएं?

घर में पितरों की फोटो लगाते समय सही जगह का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना है. वास्तु के अनुसार, कुछ स्थान ऐसे हैं जहां इन्हें रखने से बचना चाहिए:

  • पितरों की फोटो पूजा घर या मंदिर में कदापि न रखें. यह भगवान के स्थान को अपवित्र करता है.
  • पितरों की फोटो बेडरूम में न लगाएं. इससे नींद पर बुरा असर पड़ सकता है.
  • इन्हें रसोई में न रखें. यह वहां की ऊर्जा को प्रभावित करता है.
  • पितरों की फोटो उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशानकोण में भी न लगाएं. यह देवी-देवताओं का स्थान है.
  • लिविंग रूम में न रखें. अतिथियों के आने-जाने के कारण उचित नहीं.

इन बातों का भी रखें ध्यान

पूर्वजों की तस्वीर को दीवार पर स्थिरता से लगाएं. टेढ़ी या झूलती हुई तस्वीर शुभ नहीं मानी जाती है. एक ही पूर्वज की एक से ज्यादा तस्वीर लगाने से बचें. जीवित लोगों की फोटो पूर्वजों के साथ भूल से भी न रखें. साथ ही यह भी याद रखें कि हर साल पितृ पक्ष या तर्पण के दौरान पितरों की तस्वीर पर फूल चढ़ाएं और दीपक जलाएं. पितरों की तस्वीर कभी भी ऐसी जगह न रखें जहां धूल या गंदगी जमती हो.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Aug 21, 2026 08:14 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक सक्रिय ज्योतिषविद हैं। जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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