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Mauni Amavasya 2026: आज मौनी अमावस्या पर पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ कर पितरों को करें प्रसन्न, शांत होगा पितृ दोष

Mauni Amavasya 2026 Today: आज 18 जनवरी 2026, दिन रविवार को मौनी अमावस्या मनाई जा रही है. मौनी अमावस्या का दिन व्रत, गंगा स्नान और दान-पुण्य के लिए खास होता है. मौनी अमावस्या का दिन पितृ दोष सै मुक्ति के लिए खास होता है. आप पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ करें.

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Mauni Amavasya 2026 Today: आज माघ माह की अमावस्या तिथि है. अमावस्या तिथि को पवित्र स्नान, दान-पुण्य और व्रत के लिए खास होती है. आज माघ अमावस्या के दिन माघ मेले का तीसरा प्रमुख् स्नान है. अमावस्या तिथि पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है. पितृ दोष से मुक्ति के लिए इन उपायों के साथ ही पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ करें. पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ कर आप पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं. पितरों को प्रसन्न करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है. आर्थिक सफलता प्राप्त होती है और सभी कार्य सफल होते हैं.

पितृ निवारण स्तोत्र (Pitra Dosh Nivaran Stotra Lyrics)

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

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इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

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नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

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प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

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सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

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ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

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पितृ निवारण स्तोत्र पाठ की विधि

पितरों को प्रसन्न करने और पितृ दोष का निवारण करने के लिए आप स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद पितृ तर्पण स्थान पर या पूर्वजों की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. इसके बाद श्रद्धापूर्वक पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ करें. आप ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें. इसका विशेष महत्व होता है. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. आप इस पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ अमावस्या और पूर्णिमा तिथि पर कर सकते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 18, 2026 11:35 AM

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About the Author

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. धर्म-ज्योतिष में अमन अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लिखते हैं. अमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ भीम राव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया है. अमन पिछले 5 सालों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं. अमन ने अपने करियर की शुरुआत जी मीडिया डीएनए हिंदी से की थी. डीएनए हिंदी में ट्रेनी जर्नलिस्ट के तौर पर जुड़ें. इसके बाद डीएनए हिंदी में सब-एडिटर के पद पर काम किया. यहां धर्म और ज्योतिष की बीट पर काम किया. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501

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