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Religion

Masaan Holi: दुनिया में कहीं और नहीं, बस काशी में होता है अद्भुत ‘मसान होली’, जानें भगवान शिव से जुड़ी इस परंपरा का रहस्य

Masaan Holi: शिव की नगरी काशी की मसान होली रंगों से नहीं, चिता की भस्म से सजी होती है. कहते हैं, भगवान शिव की नगरी का यह आयोजन 'मृत्यु' से जुड़ा है, जिसमें जीवन के उत्सव का संदेश छिपा है. यहां राख उड़ाकर जीवन की नश्वरता और मुक्ति का बोध कराया जाता है. आइए जानते हैं, काशी की मसान होली कब है?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Feb 18, 2026 11:19
Masaan-Holi

Masaan Holi: दुनिया भर में होली रंग, गुलाल और खुशियों का त्योहार है. लेकिन वाराणसी यानी काशी में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो इसे सबसे अलग बनाती है. यहां श्मशान घाट पर खेली जाती है ‘मसान होली’. रंगों की जगह चिता की भस्म उड़ाई जाती है. यहां माहौल आध्यात्मिक होता है, रहस्यमय भी. वाकई में अद्भुत है काशी की अनोखी मसान होली, जिसे राख में छिपा जीवन का संदेश माना जाता है. आइए जानते हैं, क्या है भगवान शिव से जुड़ी इस परंपरा का रहस्य?

क्या है पौराणिक मान्यता?

धार्मिक कथा के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी आए थे. उस दिन देवताओं संग गुलाल से होली खेली गई. लेकिन शिव के गण, जैसे भूत, प्रेत और अघोरी, उस उत्सव में शामिल नहीं हो पाए. कहा जाता है कि अपने इन प्रिय भक्तों को प्रसन्न करने के लिए शिव ने अगले दिन श्मशान में भस्म से होली खेली. तभी से यह परंपरा जारी है.

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कब होता है यह आयोजन?

काशी की मसान होली, होली के मुख्य पर्व से पहले रंगभरी एकादशी के अगले दिन मनाई जाती है. साल 2026 में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को है. इसके अगले दिन 28 फरवरी को मसान होली मनाई जाएगी.

कहां होती राख की यह होली

कहते हैं, सदियों से मसान होली का मुख्य आयोजन दो स्थानों पर होता आया है. पहला, मणिकर्णिका घाट. दूसरा, हरिश्चंद्र घाट. मणिकर्णिका घाट पर महाश्मशान नाथ मंदिर से शुरुआत होती है. यहां विशेष आरती और पूजन के बाद भस्म यानी राख से होली खेली जाती है.

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अनोखा होता है दृश्य

सुबह से ही घाट पर भीड़ जुटने लगती है. डमरू की ध्वनि गूंजती है. हर हर महादेव के जयकारे लगते हैं. एक ओर चिताएं जल रही होती हैं. दूसरी ओर भक्त नृत्य करते हुए एक दूसरे पर राख डालते हैं. यह दृश्य सामान्य होली से बिल्कुल अलग है. यहां उत्सव और विरक्ति साथ दिखाई देते हैं.

क्या है मसान होली अर्थ?

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है. यहां मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि शिव में लय माना जाता है. मसान होली यही संदेश देती है. यह शरीर नश्वर है. अंत में राख ही बनना है. इसलिए अहंकार और मोह छोड़कर भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए. इस होली में रंग नहीं चलते है. केवल भस्म, बेलपत्र और धतूरा का महत्व होता है. इससे शिव का अघोर स्वरूप यहां प्रत्यक्ष महसूस होता है.

जाने से पहले जरूर जानें ये बात

यह आयोजन पर्यटन से अधिक आध्यात्मिक अनुभव है. यहां अनुशासन जरूरी है. श्मशान की गरिमा बनाए रखना हर आगंतुक की जिम्मेदारी है. आपको बता दें कि मसान होली हर किसी के लिए नहीं. यह उन लोगों के लिए है, जो जीवन और मृत्यु के सत्य को करीब से समझना चाहते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 18, 2026 11:19 AM

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