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Religion

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर करें सूर्य स्‍त्रोत और रक्षा कवच का पाठ, प्राप्त होगी सूर्य देव की विशेष कृपा

Makar Sankranti 2026: सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने को संक्रांति कहते हैं. सूर्य का मकर राशि में गोचर करना मकर संक्रांति होता है. इस दिन सूर्य देव की पूजा और दान पुण्य का महत्व होता है. आप मकर संक्रांति के दिन सूर्य स्‍त्रोत और रक्षा कवच का पाठ अवश्य करें.

Author Edited By : Aman Maheshwari
Updated: Jan 14, 2026 07:32
Makar Sankranti 2026
Photo Credit- News24GFX

Makar Sankranti 2026: आज सूर्य देव की पूजा-अर्चना का दिन है. मकर संक्रांति का पर्व आज 14 जनवरी 2026, दिन बुधवार को मनाया जा रहा है. मकर संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना, गंगा स्नान और दान-पुण्य का महत्व होता है. सूर्य देव को सफलता, यश, सम्‍मान और सेहत का कारक माना जाता है. आप मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने के साथ ही उन्हें प्रसन्न करने के लिए सूर्य रक्षा कवच और सूर्य स्तोत्र का पाठ करें. इसके पाठ से आपको जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होगी. इनका पाठ करने से आपका जीवन आसान होगा.

सूर्य रक्षा कवच (Surya Raksha Kavach)

याज्ञवल्क्य उवाच

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श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।
शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।1।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।
ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत् ।2।

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शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।
नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।3।

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।
जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित: ।4।

सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।
दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय: ।5।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।
सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।6।

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सूर्य स्त्रोत (Surya Stotra)

विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रविः।
लोक प्रकाशकः श्री मांल्लोक चक्षुर्मुहेश्वरः॥

लोकसाक्षी त्रिलोकेशः कर्ता हर्ता तमिस्रहा।
तपनस्तापनश्चैव शुचिः सप्ताश्ववाहनः॥

गभस्तिहस्तो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृतः।
एकविंशतिरित्येष स्तव इष्टः सदा रवेः॥

अर्थ – ‘विकर्तन, विवस्वान, मार्तण्ड, भास्कर, रवि, लोकप्रकाशक, श्रीमान, लोकचक्षु, महेश्वर, लोकसाक्षी, त्रिलोकेश, कर्ता, हर्त्ता, तमिस्राहा, तपन, तापन, शुचि, सप्ताश्ववाहन, गभस्तिहस्त, ब्रह्मा और सर्वदेव नमस्कृत- इस प्रकार इक्कीस नामों का यह स्तोत्र भगवान सूर्य को सदा प्रिय है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 14, 2026 06:29 AM

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