Mahabharata Story: नियम-कायदों के साथ लड़ा गया था महाभारत का युद्ध, फिर भी हुए ये 5 बड़े छल, जानिए पूरी कहानी
Mahabharata Story: महाभारत का युद्ध नियमों के साथ लड़ा गया था. युद्ध को लेकर कई नियम थे. सभी योद्धाओं को इन नियमों का पालन करना था. हालांकि, महाभारत के युद्ध में कई छल भी हुए थे. आइये इनके बारे में जानते हैं.
Mahabharata Story: कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया महाभारत का युद्ध कई नियमों के साथ लड़ा गया था. युद्ध के लिए कई नियम बनाए गए थे. हालांंकि, कई बार इन नियमों की अनदेखी कर छल किया गया था. इन्हें महाभारत युद्ध में धोखा माना जाता है. महाभारत युद्ध में कई बार षड्यंत्र रचे गए और धोखे दिए गए थे. महभारत युद्ध में हुए ऐसे 5 छल के बारे में जानते हैं. इनके कारण युद्ध की दिशा बदल गई थी.
चक्रव्यूह में अभिमन्यू की हत्या
अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू को चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता था लेकिन इससे बाहर निकलना नहीं आता था. अर्जुन के युद्ध भूमि में न होने के दौरान कौरवों ने अभिमन्यू के लिए चक्रव्यूह रचा था. अभिमन्यू अकेले चक्रव्यूह में प्रवेश कर गए और उन्हें परास्त कर दिया गया. युद्ध के नियमों को तोड़ते हुए कौरवों ने अभिमन्यू की हत्या की थी. नियमों के अनुसार, निहत्थे और अकेले पर हमला करना मना था. लेकिन कौरवों ने अभिमन्यू को रथ से गिराया और उनकी हत्या कर दी.
अपने पुत्र अभिमन्यू की मृत्यु के बाद अर्जुन ने प्रण लिया था कि, वह सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे. इस बात का कौरवों को पता चला, तो उन्होंने जयद्रथ को सुरक्षा के घेरे में खड़ा कर दिया. सूर्यास्त नजदीक आने पर भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढक लिया. कौरवों को लगा की सूर्यास्त हो चुका है. इसके बाद जयद्रथ बाहर आए और सूर्य के दोबारा प्रकट होने पर अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया.
अश्वत्थामा की मृत्यु का छल
गुरु द्रोणाचार्य कौरवों के सेनापति बने, कब कौरवों की जीतना तय था. वह अजेय योद्धाओं में से एक थे. द्रोणाचार्य की सबसे बड़ी कमजोरी उनके पुत्र अश्वत्थामा थे. इसी कमजोरी का श्रीकृष्ण ने फायदा उठाया. एक अश्वत्थामा नाम का हाथी मार दिया गया. युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य को कहा कि, अश्वत्थामा मारा गया, इसके बाद धीरे से जोड़ा हाथी. इसके बाद द्रोणाचार्य दुखी हुए और ध्यान में लीन हो गए. इसी समय धृष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य का वध कर दिया.
Photo Credit- AI
शिखंडी की आड़ में भीष्म पितामह पर वार
भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान था. भीष्म पितामह ने एक प्रतिज्ञा की थी कि, वह किसी स्त्री पर वार नहीं करेंगे. श्रीकृष्ण ने उनकी इसी कमजोरी का फायदा उठाया था. श्रीकृष्ण ने शिखंडी को भीष्ण पितामह के सामने खड़ा कर दिया था. शिखंडी पिछले जन्म में अंबा थीं. इसी कारण भीष्म पितामह ने उनके ऊपर वार नहीं किया. तब अर्जुन ने शिखंडी के पीछे से वार कर भीष्म पितामह को बाण की शैया पर लिया दिया.
कर्ण से कवच-कुंडल छीनना
महाभारत युद्ध में कर्ण के साथ भी छल हुआ था. सूर्यपुत्र कर्ण कवच और कुंडल के साथ जन्मे थे. उनके कवच और कुंडल कर्ण को अजेय बनाते थे. इंद्र को इस बात का भय था कि, कर्ण अर्जुन को पराजित कर सकता है. इसी कारण इंद्र ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर दानवीर कर्ण से कवच और कुंडल दान में मांगे थे. दानवीर कर्ण ने उन्हें कवच-कुंडल दान कर दिए. इस प्रकार कर्ण छल का शिकार हुए थे.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओंपर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Mahabharata Story: कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया महाभारत का युद्ध कई नियमों के साथ लड़ा गया था. युद्ध के लिए कई नियम बनाए गए थे. हालांंकि, कई बार इन नियमों की अनदेखी कर छल किया गया था. इन्हें महाभारत युद्ध में धोखा माना जाता है. महाभारत युद्ध में कई बार षड्यंत्र रचे गए और धोखे दिए गए थे. महभारत युद्ध में हुए ऐसे 5 छल के बारे में जानते हैं. इनके कारण युद्ध की दिशा बदल गई थी.
चक्रव्यूह में अभिमन्यू की हत्या
अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू को चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता था लेकिन इससे बाहर निकलना नहीं आता था. अर्जुन के युद्ध भूमि में न होने के दौरान कौरवों ने अभिमन्यू के लिए चक्रव्यूह रचा था. अभिमन्यू अकेले चक्रव्यूह में प्रवेश कर गए और उन्हें परास्त कर दिया गया. युद्ध के नियमों को तोड़ते हुए कौरवों ने अभिमन्यू की हत्या की थी. नियमों के अनुसार, निहत्थे और अकेले पर हमला करना मना था. लेकिन कौरवों ने अभिमन्यू को रथ से गिराया और उनकी हत्या कर दी.
अपने पुत्र अभिमन्यू की मृत्यु के बाद अर्जुन ने प्रण लिया था कि, वह सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे. इस बात का कौरवों को पता चला, तो उन्होंने जयद्रथ को सुरक्षा के घेरे में खड़ा कर दिया. सूर्यास्त नजदीक आने पर भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढक लिया. कौरवों को लगा की सूर्यास्त हो चुका है. इसके बाद जयद्रथ बाहर आए और सूर्य के दोबारा प्रकट होने पर अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया.
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अश्वत्थामा की मृत्यु का छल
गुरु द्रोणाचार्य कौरवों के सेनापति बने, कब कौरवों की जीतना तय था. वह अजेय योद्धाओं में से एक थे. द्रोणाचार्य की सबसे बड़ी कमजोरी उनके पुत्र अश्वत्थामा थे. इसी कमजोरी का श्रीकृष्ण ने फायदा उठाया. एक अश्वत्थामा नाम का हाथी मार दिया गया. युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य को कहा कि, अश्वत्थामा मारा गया, इसके बाद धीरे से जोड़ा हाथी. इसके बाद द्रोणाचार्य दुखी हुए और ध्यान में लीन हो गए. इसी समय धृष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य का वध कर दिया.
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शिखंडी की आड़ में भीष्म पितामह पर वार
भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान था. भीष्म पितामह ने एक प्रतिज्ञा की थी कि, वह किसी स्त्री पर वार नहीं करेंगे. श्रीकृष्ण ने उनकी इसी कमजोरी का फायदा उठाया था. श्रीकृष्ण ने शिखंडी को भीष्ण पितामह के सामने खड़ा कर दिया था. शिखंडी पिछले जन्म में अंबा थीं. इसी कारण भीष्म पितामह ने उनके ऊपर वार नहीं किया. तब अर्जुन ने शिखंडी के पीछे से वार कर भीष्म पितामह को बाण की शैया पर लिया दिया.
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कर्ण से कवच-कुंडल छीनना
महाभारत युद्ध में कर्ण के साथ भी छल हुआ था. सूर्यपुत्र कर्ण कवच और कुंडल के साथ जन्मे थे. उनके कवच और कुंडल कर्ण को अजेय बनाते थे. इंद्र को इस बात का भय था कि, कर्ण अर्जुन को पराजित कर सकता है. इसी कारण इंद्र ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर दानवीर कर्ण से कवच और कुंडल दान में मांगे थे. दानवीर कर्ण ने उन्हें कवच-कुंडल दान कर दिए. इस प्रकार कर्ण छल का शिकार हुए थे.