Monkey Death Mystery: सनातन धर्म में बंदरों को भगवान हनुमान का स्वरूप माना गया है, जो कि बुद्धिमत्ता, साहस, शक्ति और दिव्य शक्तियों के प्रतीक हैं. कुछ शास्त्रों में हनुमान जी को वानर जाति का वंशज भी बताया गया है. हालांकि, धर्मग्रंथों में बंदरों से जुड़ी कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक उनकी मृत्यु से जुड़ी भी है. मान्यता है कि आम व्यक्ति बंदर को मरते हुए देख नहीं पाता है. हालांकि, इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी है.
बंदर मरते हुए क्यों नहीं दिखाई देते?
- धार्मिक मान्यता-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रामायण काल में वानर सेना के मुखिया ने भगवान श्रीराम से वरदान मांगा था कि उन्हें और उनकी आगे आने वाली पीढ़ी को कभी भी कोई व्यक्ति मरते हुए न देखे. कहा जाता है कि राम जी ने वानर सेना को ये वरदान दिया था कि आम व्यक्ति उनकी मौत नहीं देख पाएगा. इसी के साथ वानर सेना ने राम जी से वरदान मांगा था कि उन्हें अपनी मृत्यु से 7 दिन पहले अपनी मौत का आभास हो जाए. इसलिए कहा जाता है कि जब कभी भी किसी बंदर की मृत्यु होने वाली होती है तो उससे 7 दिन पहले उसे अपनी मौत का आभास हो जाता है और वो घने जंगलों में चला जाता है.
वहीं, कुछ बंदर एकांत में जाकर दीमक के पेड़ के पास लेट जाते हैं और देह त्याग देते हैं, जिसके बाद दीमक उनका शरीर खा जाती है. इसी वजह से बंदरों के अवशेष आसानी से नहीं मिलते हैं. बता दें कि यदि किसी दुर्घटना में कोई बंदर मर जाता है तो अन्य बंदर उसे दीमक के पेड़ के पास छोड़ देते हैं.
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- वैज्ञानिक कारण-
बंदर अपनी मौत से पहले अपने झुंड से अलग होकर जंगल में सुरक्षित स्थान पर चले जाते हैं ताकि कोई अन्य जानवर उनका शिकार न कर सके. साथ ही इससे उनके झुंड के अन्य बंदर सुरक्षित रहते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.










