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Dwipushkar Yoga 2026 Dates: इस दिन किया गया काम देता है दोगुना फल, जानें 2026 में कब-कब बनेगा द्विपुष्कर योग

Dwipushkar Yoga 2026 Dates: द्विपुष्कर योग ज्योतिष में एक दुर्लभ और शक्तिशाली योग है, जो साल के बेहद शुभ दिनों में से होते हैं. पंचांग में ये कब-कब पड़ रहे हैं, यह जानने से शुभ कार्य को सम्पन्न करने में मदद मिलती है और शुभ कार्य का फल दोगुना हो जाता है. आइए जानते हैं, साल 2026 में ये कब-कब पड़ रहे हैं और इस दिन कौन-से काम करने चाहिए?

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Dwipushkar Yoga 2026 Dates: द्विपुष्कर योग ज्योतिष में एक विशेष शुभ योग माना जाता है. इसे ‘दोहरा फल देने वाला योग’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय किया गया कार्य दो गुना प्रभाव देता है. जी हां, यह एक दुर्लभ और शक्तिशाली योग है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह किसी भी शुभ कार्य के फल को डबल करने की क्षमता रखता है आइए जानते हैं, यह कैसे बनता है, साल 2026 में कब-कब पड़ रहा है और इस दिन क्या करें, क्या नहीं?

द्विपुष्कर कैसे बनता है?

सनातन पंचांग के अनुसार, जब विशेष वार यानी दिन, तिथि और नक्षत्र का मेल होता है, तब द्विपुष्कर योग बनता है. इस योग में किया गया कोई भी काम, चाहे अच्छा हो या बुरा, दो बार फल देता है. इसलिए इस दिन हर काम सोच-समझकर करना चाहिए. यह तब बनता है जब रविवार, मंगलवार और शनिवार दिन का द्वितीया, सप्तमी और द्वादशी भद्रा तिथियों और मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र से मेल होता है. इस दौरान शुरू किया गया काम दोगुनी सफलता या दोगुनी मेहनत लाता है, इसलिए इसमें केवल शुभ कार्य करना ही अच्छा माना जाता है.

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साल 2026 में कब-कब है द्विपुष्कर योग?

द्रिक पंचांग के अनुसार, फरवरी और अप्रैल माह को छोड़कर साल 2026 में कुल 12 द्विपुष्कर योग बन रहे हैं. इसे आप नीचे के टेबल में देख सकते हैं:

साल 2026 में द्विपुष्कर योग के दिन और मुहूर्त
क्र.सं. द्विपुष्कर योग के दिन द्विपुष्कर योग का समय
1 जनवरी 21, 2025, मंगलवार 07:14 ए एम से 12:39 पी एम
2 मार्च 16, 2025, रविवार 11:45 ए एम से 04:58 पी एम
3 मार्च 26, 2025, बुधवार 03:49 ए एम से 06:18 ए एम
4 मई 20, 2025, मंगलवार 05:28 ए एम से 05:51 ए एम
5 मई 28, 2025, बुधवार 05:02 ए एम से 05:25 ए एम
6 जून 7, 2025, शनिवार 05:23 ए एम से 09:40 ए एम
7 जुलाई 22, 2025, मंगलवार 05:37 ए एम से 07:05 ए एम
8 अगस्त 10, 2025, रविवार 12:09 पी एम से 01:52 पी एम
9 सितम्बर 23, 2025, मंगलवार 01:40 पी एम से 04:51 ए एम, सितम्बर 24
10 अक्टूबर 4, 2025, शनिवार 06:16 ए एम से 09:09 ए एम
11 नवम्बर 17, 2025, सोमवार 02:11 ए एम से 04:47 ए एम
12 दिसम्बर 6, 2025, शनिवार 07:00 ए एम से 08:48 ए एम

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द्विपुष्कर योग में क्या करें?

द्विपुष्कर योग में नया व्यवसाय शुरू करना, पढ़ाई की शुरुआत करना या किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम शुरू करना बहुत शुभ माना जाता है.
इस योग के दौरान घर, वाहन या सोने जैसी कीमती वस्तुओं में निवेश या खरीदारी करने से अच्छा और स्थायी लाभ मिलता है.
विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक संस्कार इस समय करने से वैवाहिक जीवन में सुख और स्थिरता आती है.
द्विपुष्कर योग में जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेना सकारात्मक परिणाम देता है.
इस योग में पूजा-पाठ, जप, दान और अन्य आध्यात्मिक कार्य करने से मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है.

इस दिन इन कार्यों से बचें

द्विपुष्कर योग के दौरान किसी भी प्रकार का झगड़ा, विवाद या टकराव करने से नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.
इस समय झूठ बोलने या छल-कपट करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव दो गुना हो सकता है.
नकारात्मक सोच रखना या गलत भावनाओं में बहना भविष्य की परेशानियों को बढ़ा सकता है.
द्विपुष्कर योग में कर्ज लेने या अनावश्यक आर्थिक जोखिम उठाने से नुकसान हो सकता है.
बिना सही विचार-विमर्श के लिए गए गलत निर्णय इस योग में दोगुनी समस्या खड़ी कर सकते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Dec 23, 2025 03:46 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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