---विज्ञापन---

Religion angle-right

Dhumavati Jayanti 2026: आज है धूमावती जयंती, जानिए पूजा विधि और मां धूमावती की उत्पत्ति की पौराणिक कथा

Dhumavati Jayanti 2026: आज धूमावती जयंती पर मां धूमावती की पूजा विधि और मां धूमावती की उत्पत्ति की पौराणिक कथा आप यहां पढ़ सकते हैं. धूमावती जयंती पर मां धूमावती की पूजा से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है.

---विज्ञापन---

Dhumavati Jayanti 2026 Today: आज 22 जून 2026 दिन सोमवार को धूमावती जयंती है. धूमावती जयंती पर दस महाविद्याओं में से एक मां धूमावती की पूजा के लिए खास होता है. इस दिन मां धूमावती की उत्पत्ति हुई थी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां धूमावती को वैराग्य, तप और त्याग की देवी माना जाता है. धूमावती जयंती पर मां धूमावती की पूजा-अर्चना करने से जीवन से संकट दूर होते हैं. दरिद्रता और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है. मानसिक शांति और आध्यात्मिक शांति के लिए मां धूमावती की पूजा करनी चाहिए.

धूमावती जयंती शुभ मुहूर्त (Dhumavati Jayanti Shubh Muhurat)

प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:24 से 05:24
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर में 11:55 से 12:51
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:43 से 03:39
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 07:21 से 07:41
निशिता मुहूर्त – रात में 12:03 से 12:43, 23 जून

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें – Rahu Gochar: राहु नक्षत्र गोचर इन 4 राशियों की बढ़ाएगा मुश्किलें, पैसों के मामले में रहना होगा सावधान

मां धूमावती पूजा विधि (Maa Dhumavati Puja Vidhi)

धूमावती जयंती पर मां धूमावती की पूजा अर्चना करने के लिए सुबह उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें. पूजा स्थान की सफाई कर चौकी लगाएं. मां धूमावती की प्रतिमा स्थापित करें. मां धूमावती की प्रतिमा के समक्ष दीपक और धूप जलाएं. मां धूमावती के मंत्र “ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।। धूं धूं धूमावती ठः ठः।।” का 108 बार जाप करें. नमकीन भोग अर्पित करें. मां धूमावती को नमकीन भोग अर्पित करना शुभ होता है. आप भुने चने, दालमोठ, कचौरी और काले तिल का भोग लगाएं. इसके बाद आरती कर पूजा संपन्न करें.

---विज्ञापन---

मां धूमावती उत्पत्ति कथा (Maa Dhumavati Katha)

मां धूमावती की उत्पत्ति सती के आत्मदाह से हुई मानी जाती है. माता पार्वती के पिता राजा दक्ष द्वारा शिव जी का अपमान करने पर देवी सती ने आत्मदाह कर लिया था. इसके बाद जलते शरीर से धुआं निकला. इसेस मां धूमावती की उत्पत्ति हुई. एक अन्य कथा के अनुसार, माता पार्वती को अधिक भूख लगने और शिव जी से भोजन मांगने पर भी न मिलने पर उन्होंने शिव जी को निगल लिया था. इसपर उनके शरीर से धुएं का गुबार निकला. इससे धूमावती माता की उत्पत्ति हुई.

ये भी पढ़ें – Garuda Purana: मृत व्यक्ति के कपड़े-गहने घर में रखना सही या गलत, जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण

---विज्ञापन---

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jun 22, 2026 07:53 AM

End of Article

About the Author

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. धर्म-ज्योतिष में अमन अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लिखते हैं. अमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ भीम राव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया है. अमन पिछले 5 सालों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं. अमन ने अपने करियर की शुरुआत जी मीडिया डीएनए हिंदी से की थी. डीएनए हिंदी में ट्रेनी जर्नलिस्ट के तौर पर जुड़ें. इसके बाद डीएनए हिंदी में सब-एडिटर के पद पर काम किया. यहां धर्म और ज्योतिष की बीट पर काम किया. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola