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Chanakya Niti: इंसान को कभी संतुष्ट नहीं होने देती हैं ये 3 इच्छाएं, आचार्य चाणक्य से जानें जीवन का कड़वा सच

Chanakya Niti: चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य मानव स्वभाव का कड़वा सच बताते हैं कि 3 इच्छाएं ऐसी हैं, जो इंसान को जीवन भर बेचैन रखती हैं. इन इच्छाओं को समझे बिना क्या सच्चा संतोष संभव नहीं है. आइए जानते हैं, ये इच्छाएं क्या हैं और क्यों कभी इसकी चाह खत्म नहीं होती हैं?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 2, 2026 19:42
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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी काफी प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे मानव स्वभाव की सच्ची तस्वीर दिखाती हैं. उन्होंने बताया कि कुछ इच्छाएं ऐसी होती हैं, जो इंसान को जीवन भर बेचैन रखती हैं. इन्हीं इच्छाओं को समझकर ही व्यक्ति सही मायने में जीवन का अर्थ जान सकता है और संतुलित जीवन जी सकता है. वे बताते हैं कि जीवन में हर इंसान की कुछ इच्छाएं होती हैं. कोई इच्छा जल्दी पूरी हो जाती है, तो कोई जीवन भर अधूरी रह जाती है. इंसान इन्हीं इच्छाओं के पीछे भागते हुए कभी संतुष्ट नहीं हो पाता है. आइए जानते हैं, वे 3 इच्छाएं क्या हैं, जो इंसान कभी संतुष्ट होने नहीं देती हैं?

धन की अनंत चाह

चाणक्य कहते हैं कि धन की इच्छा कभी पूरी नहीं होती. इंसान चाहे कितना भी पैसा कमाले, फिर भी उसे और अधिक की चाह बनी रहती है. यह इच्छा कभी संतुष्टि नहीं देती. अक्सर लोग ज्यादा पैसा पाने के लिए अपनी खुशी और समय दोनों खो देते हैं. धन महत्वपूर्ण है, लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर होना दुख और चिंता का कारण बन सकता है.

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भोजन की अमिट लालसा

भोजन भी इंसान की ऐसी इच्छा है जो हमेशा बनी रहती है. इंसान कितना भी खा ले, भूख लगते ही उसे फिर खाने की इच्छा होती है. शरीर को पोषण की आवश्यकता है, लेकिन लालसा और संतोष में अंतर है. चाणक्य के अनुसार, इस लालसा को नियंत्रित करना ही जीवन को सरल और खुशहाल बना सकता है.

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जीवन की अनिश्चित चाह

जीवन जीने की इच्छा हर व्यक्ति के भीतर रहती है, लेकिन मौत को टालना हमारे हाथ में नहीं है. यह सबसे बड़ी सचाई है जिसे कोई नहीं बदल सकता. चाणक्य कहते हैं कि मृत्यु और जीवन की अनिश्चितता को समझकर ही इंसान सही दिशा में सोच सकता है और अपने समय का सही उपयोग कर सकता है.

इच्छाओं का संतुलन

इन तीन इच्छाओं- धन, भोजन और जीवन को समझना बहुत जरूरी है. चाणक्य का कहना है कि यही इच्छाएं मानव को कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने देती. अगर हम इनका संतुलन सीख लें, तो जीवन में मानसिक शांति और संतोष पा सकते हैं.

जीवन में सीख

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि धन कमाने में संयम रखें, लालसा में नहीं फंसें. भोजन की आवश्यकता पूरी करें, लेकिन लालच से दूर रहें और जीवन को समझें, लेकिन मृत्यु को स्वीकार करना सीखें. इन सरल लेकिन गहन बातों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सुखद और सफल बना सकता है. चाणक्य की यह नीति आज भी उतनी ही उपयोगी है जितनी हजारों साल पहले थी.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 01, 2026 08:13 PM

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