Temple Vastu Tips: वास्तु अनुसार ऐसा मंदिर घर में लाता है सौभाग्य, जानें कैसी होनी चाहिए मैटेरियल, दिशा, ऊंचाई और रंग

Temple Vastu Tips: मान्यता है कि घर का मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है. इसकी सही दिशा, ऊंचाई, मटेरियल और रंग घर में सौभाग्य लाते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर कैसा होना चाहिए, यह जानकर आप पूजा को अधिक प्रभावशाली बना सकते है.

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Temple Vastu Tips: हिन्दू धर्म में घर का पूजा स्थल केवल धार्मिक स्थान भर न होकर सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना गया है. वास्तु शास्त्र के अनुसार सही ढंग से बना मंदिर मन को शांति देता है और घर के वातावरण को शुभ बनाता है. इसलिए मंदिर की दिशा, बनावट, रंग और स्थान पर विशेष ध्यान देना जरूरी माना गया है. आइए जानते हैं, वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मंदिर कैसा होना चाहिए?

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मंदिर की सही दिशा

वास्तु शास्त्र में ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे पवित्र बताया गया है. इस दिशा में मंदिर रखने से पूजा का प्रभाव बढ़ता है. पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर हो, ताकि सूर्य की ऊर्जा का लाभ मिले. दक्षिण दिशा की ओर मंदिर रखने से बचाव करना उचित माना जाता है.

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ऊंचाई और स्थान का महत्व

मंदिर को हमेशा जमीन से ऊंचे आसन पर रखें. भगवान का स्थान आंखों और हृदय के स्तर के आसपास होना शुभ माना जाता है. मंदिर को सीढ़ियों के नीचे या बाथरूम की दीवार से सटा कर रखना उचित न समझा जाता. पूजा स्थल के आसपास साफ-सफाई और शांति बनी रहनी चाहिए.

मूर्ति और पूजा सामग्री

मंदिर में बहुत अधिक मूर्तियां रखने के बजाय सीमित और पसंदीदा देवी-देवता की मूर्ति रखें. टूटी या खंडित मूर्ति पूजा के लिए उपयुक्त न मानी जाती. घर के दिवंगत सदस्य की तस्वीर पूजा स्थल में रखने से बचाव करना चाहिए.

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मटेरियल कैसा हो?

वास्तु के अनुसार लकड़ी से बना मंदिर शुभ फल देता है. लकड़ी को सकारात्मकता और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है. पत्थर या संगमरमर का मंदिर भी रखा जा सकता है, पर धातु या प्लास्टिक का मंदिर उपयोग में न लें.

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रंग और सजावट

मंदिर की दीवार का रंग हल्का और शांत होना चाहिए. पीला, हल्का हरा या हल्का गुलाबी रंग पूजा स्थल के लिए अनुकूल माना जाता है. बहुत गहरे या चमकीले रंग ध्यान भंग कर सकते है. मंदिर में हल्की रोशनी और सुगंधित दीप वातावरण को पवित्र बनाते है.

इसका भी रखें ध्यान

पूजा करते समय रोज एक ही समय चुनने से मन एकाग्र रहता है. मंदिर के पास अनावश्यक वस्तुएं जमा न करे. घंटी, शंख और दीप को सलीके से रखें. सप्ताह में एक बार मंदिर की सफाई करना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक माना जाता है. इन सरल वास्तु नियमों के अनुसार घर का मंदिर बनाने से पूजा अधिक प्रभावशाली बनती है और घर का वातावरण सुखद रहता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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