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Annapurna Jayanti 2025: 3 या 4 दिसंबर, कब है अन्नपूर्णा जयंती? जानें सही डेट, मुहूर्त और पूजा का महत्व

Annapurna Jayanti 2025: अन्नपूर्णा जयंती समृद्धि, दान और कृतज्ञता का पर्व है. यह हमें सिखाता है कि अन्न का सम्मान करें, दूसरों के साथ बांटें और देवी की कृपा से जीवन को समृद्ध बनाएं. आइए जानते हैं, इस वर्ष यह जयंती कब है, 3 या 4 दिसंबर और साथ ही यह भी जानते हैं कि इसका महत्व, तिथि, मुहूर्त क्या है और यह व्रत रखने से क्या लाभ होते हैं?

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Annapurna Jayanti 2025: मार्गशीर्ष यानी अगहन मास में मनाई जाने वाली अन्नपूर्णा जयंती माता अन्नपूर्णा के अन्न-वितरण और करुणा के दिव्य स्वरूप की स्मृति-पर्व है. यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से जुड़ा एक गहरा संदेश भी देता है कि ‘अन्न ही जीवन है.’ आइए आसान भाषा जानते हैं, इस साल यह पावन पर्व 3 को है या 4 दिसंबर को, इसका महत्व, तिथि, मुहूर्त क्या है और यह व्रत रखने से क्या लाभ होते हैं?

मां अन्नपूर्णा कौन हैं?

मां अन्नपूर्णा, देवी पार्वती का वह दिव्य रूप हैं जो संसार के अन्न, समृद्धि और पोषण की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं. वह जीवन के मूल आधार, अन्न की संरक्षिका हैं. माना जाता है कि जहां अन्नपूर्णा की कृपा होती है, वहां कभी भोजन की कमी नहीं रहती. उनका मुख्य मंदिर काशी यानी वाराणसी में स्थित है, जहां भक्त उन्हें शिवजी की अर्धांगिनी और अन्नदान की देवी के रूप में पूजते हैं.

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धर्मग्रंथों में अन्नपूर्णा देवी का महत्व

स्कंदपुराण और शिवपुराण में माता अन्नपूर्णा की कथा का बड़ा महत्व है. कथा के अनुसार, जब शिवजी ने कहा कि ‘अन्न भी माया है’, तब माता पार्वती ने समस्त अन्न को अदृश्य कर दिया. इससे पृथ्वी पर भयंकर अकाल पड़ गया. तब शिवजी को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी. उसी क्षण माता ने अन्नपूर्णा के स्वरूप में प्रकट होकर वाराणसी में सभी को अन्न प्रदान किया. इस घटना के बाद से यह मान्यता बनी कि जिस घर में अन्न का सम्मान होता है, वहां देवत्व का वास होता है.

अन्नपूर्णा जयंती कब मनाई जाती है?

माता अन्नपूर्णा की जयंती हर वर्ष मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन माता अन्नपूर्णा का अवतरण हुआ था और उन्होंने शिवजी को अपने हाथों भोजन कराया था. यह जयंती इसी दिव्य घटना के उत्सव के रूप में मनाया जाता है.

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अन्नपूर्णा जयंती 2025 कब है?

इस साल अन्नपूर्णा जयंती गुरुवार 4 दिसंबर, 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन पूर्णिमा तिथि सुबह में 08:37 AM बजे से प्रारंभ होगी और इस तिथि का समापन 05 दिसंबर को सुबह 04:43 AM बजे होगी.

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अन्नपूर्णा जयंती 2025: पूजा के शुभ मुहूर्त

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पुण्यकाल सूर्योदय से लेकर तिथि समाप्ति तक शुभ माना गया है. लेकिन, 2025 में पूजा का श्रेष्ठ समय सुबह 06:30 AM से 10:30 AM बजे तक है. यह समय ब्रह्ममुहूर्त की शुद्ध ऊर्जा और प्रातःकाल की सकारात्मकता का संगम माना जाता है.

अन्नपूर्णा जयंती पर पूजा कैसे करें?

अन्नपूर्णा जयंती का दिन परिवार संग शुभ कार्य करने और माता की कृपा पाने का उत्तम अवसर है:

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घर में साफ-सफाई कर दीप जलाएँ.
मां अन्नपूर्णा को चावल, दाल-अनाज का भोग लगाएँ.
अन्न का दान अवश्य करें. यह अन्नपूर्णा पूजा का सबसे प्रमुख अंग है.
‘ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे’ मंत्र का जाप करें.
भगवान शिव-पार्वती का संयुक्त पूजन करें.

मां अन्नपूर्णा की पूजा से मिलने वाले लाभ

जीवन से दरिद्रता और अभाव दूर होते हैं.
घर में अन्न, धन और समृद्धि की वृद्धि होती है.
परिवार में स्थिरता, प्रेम और सौहार्द बढ़ता है.
अन्नदान करने से अपार पुण्य मिलता है.
मानसिक शांति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
मान्यता है कि माता की कृपा से जीवन में कभी अन्न का संकट नहीं आता.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Nov 30, 2025 03:46 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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