Shri Navgrah Chalisa । श्री नवग्रह चालीसा: प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा… Navgrah Chalisa Lyrics In Hindi

Shri Navgrah Chalisa In Hindi: श्री नवग्रह चालीसा को एक शक्तिशाली पाठ माना जाता है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा, शुक्र, मंगल, बुध, देवगुरु बृहस्पति, शनि, राहु और केतु ग्रह की स्तुति है. इसका पाठ करने से जीवन का हर संकट दूर होता है. चलिए श्री नवग्रह चालीसा के महत्व और पाठ करने के लाभ के बारे में जानते हैं.

Shri Navgrah Chalisa Lyrics In Hindi

Credit- Social Media

Shri Navgrah Chalisa Lyrics In Hindi: ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का उल्लेख मिलता है, जिनके कारण मानव जीवन प्रभावित होता है. नवग्रहों में सूर्य, चंद्रमा, शुक्र, मंगल, बुध, देवगुरु बृहस्पति, शनि, राहु और केतु ग्रह शामिल हैं. प्रत्येक ग्रह की अपनी खासियत है, जिनका जीवन के अलग-अलग पहलू पर प्रभाव पड़ता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में नवग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, उन्हें जीवन का हर सुख मिलता है. जिंदगी में कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होती है, बल्कि हर काम समय पर पूरा होता है. हालांकि, रोजाना नवग्रहों की पूजा करके सभी ग्रहों की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है.

विज्ञापन

यदि आप भी नवग्रहों को खुश करना चाहते हैं तो नियमित रूप से श्री नवग्रह चालीसा का पाठ करें. इससे न सिर्फ आपको नवग्रहों की कृपा प्राप्त होगी, बल्कि हर संकट से भी आप बचे रहेंगे. यहां पर आप श्री नवग्रह चालीसा के सही लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

विज्ञापन

श्री नवग्रह चालीसा (Shri Navgrah Chalisa Lyrics In Hindi)

॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय।
नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥
जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह, करहुं अनुग्रह आज॥

विज्ञापन

॥ चौपाई ॥

॥ श्री सूर्य स्तुति ॥

विज्ञापन

प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा, करहुं कृपा जनि जानि अनाथा।
हे आदित्य दिवाकर भानू, मैं मति मन्द महा अज्ञानू॥
अब निज जन कहं हरहु कलेषा, दिनकर द्वादश रूप दिनेशा।
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर, अर्क मित्र अघ मोघ क्षमाकर॥

॥ श्री चन्द्र स्तुति ॥

विज्ञापन

शशि मयंक रजनीपति स्वामी, चन्द्र कलानिधि नमो नमामि।
राकापति हिमांशु राकेशा, प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा॥
सोम इन्दु विधु शान्ति सुधाकर, शीत रश्मि औषधि निशाकर।
तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा, शरण शरण जन हरहुं कलेशा॥

॥ श्री मंगल स्तुति ॥

विज्ञापन

जय जय जय मंगल सुखदाता, लोहित भौमादिक विख्याता।
अंगारक कुज रुज ऋणहारी, करहुं दया यही विनय हमारी॥
हे महिसुत छितिसुत सुखराशी, लोहितांग जय जन अघनाशी।
अगम अमंगल अब हर लीजै, सकल मनोरथ पूरण कीजै॥

॥ श्री बुध स्तुति ॥

विज्ञापन

जय शशि नन्दन बुध महाराजा, करहु सकल जन कहं शुभ काजा।
दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना, कठिन कष्ट हरि करि कल्याणा॥
हे तारासुत रोहिणी नन्दन, चन्द्रसुवन दुख द्वन्द्व निकन्दन।
पूजहिं आस दास कहुं स्वामी, प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी॥

॥ श्री बृहस्पति स्तुति ॥

विज्ञापन

जयति जयति जय श्री गुरुदेवा, करूं सदा तुम्हरी प्रभु सेवा।
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी, इन्द्र पुरोहित विद्यादानी॥
वाचस्पति बागीश उदारा, जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा।
विद्या सिन्धु अंगिरा नामा, करहुं सकल विधि पूरण कामा॥

॥ श्री शुक्र स्तुति ॥

विज्ञापन

शुक्र देव पद तल जल जाता, दास निरन्तन ध्यान लगाता।
हे उशना भार्गव भृगु नन्दन, दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन॥
भृगुकुल भूषण दूषण हारी, हरहुं नेष्ट ग्रह करहुं सुखारी।
तुहि द्विजबर जोशी सिरताजा, नर शरीर के तुमही राजा॥

॥ श्री शनि स्तुति ॥

विज्ञापन

जय श्री शनिदेव रवि नन्दन, जय कृष्णो सौरी जगवन्दन।
पिंगल मन्द रौद्र यम नामा, वप्र आदि कोणस्थ ललामा॥
वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा, क्षण महं करत रंक क्षण राजा।
ललत स्वर्ण पद करत निहाला, हरहुं विपत्ति छाया के लाला॥

॥ श्री राहु स्तुति ॥

विज्ञापन

जय जय राहु गगन प्रविसइया, तुमही चन्द्र आदित्य ग्रसइया।
रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा, शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा॥
सैहिंकेय तुम निशाचर राजा, अर्धकाय जग राखहु लाजा।
यदि ग्रह समय पाय हिं आवहु, सदा शान्ति और सुख उपजावहु॥

॥ श्री केतु स्तुति ॥

विज्ञापन

जय श्री केतु कठिन दुखहारी, करहु सुजन हित मंगलकारी।
ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला, घोर रौद्रतन अघमन काला॥
शिखी तारिका ग्रह बलवान, महा प्रताप न तेज ठिकाना।
वाहन मीन महा शुभकारी, दीजै शान्ति दया उर धारी॥

॥ नवग्रह शांति फल ॥

विज्ञापन

तीरथराज प्रयाग सुपासा, बसै राम के सुन्दर दासा।
ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी, दुर्वासाश्रम जन दुख हारी॥
नवग्रह शान्ति लिख्यो सुख हेतु, जन तन कष्ट उतारण सेतू।
जो नित पाठ करै चित लावै, सब सुख भोगि परम पद पावै॥

॥ दोहा ॥

विज्ञापन

धन्य नवग्रह देव प्रभु, महिमा अगम अपार।
चित नव मंगल मोद गृह, जगत जनन सुखद्वार॥

यह चालीसा नवोग्रह, विरचित सुन्दरदास।
पढ़त प्रेम सुत बढ़त सुख, सर्वानन्द हुलास॥

विज्ञापन

॥ इति श्री नवग्रह चालीसा ॥

विज्ञापन

श्री नवग्रह चालीसा पढ़ने व सुनने के लाभ (Shri Navgrah Chalisa Benefits)

  • मन शांत रहता है.
  • शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है.
  • मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है.
  • ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है.
  • ग्रहों के अशुभ प्रभाव से छुटकारा मिलता है.
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

ये भी पढ़ें- Brihaspati Chalisa । श्री देवगुरु बृहस्पति चालीसा: जय नारायण जय निखिलेशवर…. Shri Devguru Brihaspati Chalisa Lyrics In Hindi

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन
Tags:

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ