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Maruti Stotra Lyrics: डेली करें मारुति स्तोत्र का पाठ, हर संकट से बचाएंगे संकटमोचन हनुमान

Maruti Stotra Lyrics: हनुमान जी को समर्पित मारुति स्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका नियमित रूप से पाठ करना शुभ होता है. चलिए अब जानते हैं मारुति स्तोत्र के सही लिरिक्स, विधि और लाभ आदि के बारे में.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Mar 30, 2026 15:39
Maruti Stotra Lyrics
Credit- Meta AI

Maruti Stotra Lyrics: मारुति स्तोत्र, भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है. इस स्तोत्र की रचना रामदास महाराज द्वारा की गई थी, जिसमें हनुमान जी के विभिन्न स्वरूप, शक्ति, पराक्रम और महिमा आदि का वर्णन किया गया है. मान्यता है कि जो लोग रोजाना मारुति स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन्हें हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही शारीरिक बल और मानसिक शांति मिलती है. इसके अलावा व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा व बुरी शक्तियों से मुक्त रहता है. चलिए अब जानते हैं मारुति स्तोत्र के सही लिरिक्स और विधि के बारे में.

मारुति स्तोत्र

भीमरूपी महारुद्रा, वज्र हनुमान मारुती।
वनारी अंजनीसूता, रामदूता प्रभंजना।।1।।
महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवीं बळें।
सौख्यकारी शोकहर्ता, धूर्त वैष्णव गायका।।2।।
दिनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदंतरा।
पाताळ देवता हंता, भव्य सिंदूर लेपना।।3।।
लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना।
पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परतोषका।।4।।
ध्वजांगे उचली बाहू, आवेशें लोटिला पुढें।
काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें।।5।।
ब्रह्मांड माईला नेणों, आवळें दंतपंगती।
नेत्राग्नी चालिल्या ज्वाळा, भृकुटी त्राहिटिल्या बळें।।6।।
पुच्छ तें मुरडिलें माथां, किरीटी कुंडलें बरीं।
सुवर्णकटीकासोटी, घंटा किंकिणी नागरा।।7।।
ठकारे पर्वताऐसा, नेटका सडपातळू।
चपळांग पाहतां मोठें, महाविद्युल्लतेपरी।।8।।
कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे।
मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधे उत्पाटिला बळें।।9।।
आणिता मागुता नेला, गेला आला मनोगती।
मनासी टाकिलें मागें, गतीस तूळणा नसे।।10।।
अणूपासोनि ब्रह्मांडा, येवढा होत जातसे।
तयासी तुळणा कोठें, मेरुमंदार धाकुटें।।11।।
ब्रह्मांडाभोंवते वेढे, वज्रपुच्छ घालूं शके।
तयासि तूळणा कैचीं, ब्रह्मांडीं पाहतां नसे।।12।।
आरक्त देखिलें डोळां, गिळीलें सूर्यमंडळा।
वाढतां वाढतां वाढे, भेदिलें शून्यमंडळा।।13।।
धनधान्यपशुवृद्धी, पुत्रपौत्र समग्रही।
पावती रूपविद्यादी, स्तोत्र पाठें करूनियां।।14।।
भूतप्रेतसमंधादी, रोगव्याधी समस्तही।
नासती तूटती चिंता, आनंदें भीमदर्शनें।।15।।
हे धरा पंधराश्लोकी, लाभली शोभली बरी।
दृढदेहो निसंदेहो, संख्या चंद्रकळागुणें।।16।।
रामदासी अग्रगण्यू, कपिकुळासी मंडण।
रामरूपी अंतरात्मा, दर्शनें दोष नासती।।17।।

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।।इति श्रीरामदासकृतं संकटनिरसनं मारुतिस्तोत्रं संपूर्णम्।।

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मारुति स्तोत्र की विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त या संध्या के समय स्नान करने के बाद लाल रंग के कपड़े धारण करें.
  • मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने लाल रंग के आसन पर बैठें.
  • घी का दीपक जलाने के बाद एकाग्र मन से मारुति स्तोत्र का पाठ करें.
  • हनुमान जी को गुड़-चना, बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, मीठा पान या केले आदि का भोग लगाएं.
  • आरती करके पूजा का समापन करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 30, 2026 03:39 PM

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