Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

Aarti Chalisa

Dhanvantari Ji Ki Aarti Lyrics: रोजाना पढ़ें धन्वंतरि जी की आरती, बीमारियां रहेंगी दूर और बढ़ेगी सुख-समृद्धि

Dhanvantari Ji Ki Aarti Lyrics: भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता और जनक माना जाता है, जिनकी कृपा से गंभीर से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है. अगर आप भी धन्वंतरि जी को खुश करना चाहते हैं तो पूजा के दौरान उनकी आरती जरूर करें. यहां पर आप धन्वंतरि जी की आरती के लिरिक्स, महत्व, लाभ और नियम आदि के बारे में जान सकते हैं.

Author
Written By: Nidhi Jain Updated: Apr 6, 2026 14:37
Dhanvantari Ji Ki Aarti Lyrics
Credit- AI Gemini

Dhanvantari Ji Ki Aarti Lyrics: देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि को सनातन धर्म में एक पूजनीय देवता का स्थान प्राप्त है, जिनकी कृपा से बीमारियों, नकारात्क ऊर्जा और अकाल मृत्यु के भय से मुत्ति मिलती है. साथ ही दीर्घायु और सुख-समृद्धि आदि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जहां कुछ लोग रोजाना आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं, वहीं कई लोग केवल धनतेरस और अक्षत तृतीया पर विशेषतौर पर पूरी विधि से देवता की उपासना करते हैं. मान्यता है कि इन दोनों तिथियों पर धन्वंतरि जी की आराधना करने से महालाभ होता है.

चलिए अब जानते हैं धन्वंतरि जी की पूजा में पढ़ी जाने वाली आरती के लिरिक्स और नियमों के बारे में.

---विज्ञापन---

धन्वंतरि जी की आरती (Dhanvantari Ji Ki Aarti Lyrics)

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।
जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।

दोहा

---विज्ञापन---

मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलिमल दहन।।
बोलिए सब मिलकर भगवान धन्वंतरि महाराज की जय।

धन्वंतरि जी की आरती से जुड़े नियम

  • प्रात: काल और प्रदोष काल में ही धन्वंतरि जी की आरती करें.
  • खड़े होकर ही आरती करनी चाहिए.
  • आरती जल्दबाजी में न पढ़ें और न ही शब्दों का गलत उच्चारण करें.
  • आरती करने से पहले धन्वंतरि जी की पूजा जरूर करें.
  • देवता के चरणों में 4 बार, नाभि में 2 बार, मुख पर 1 बार और पूरे शरीर पर 7 बार आरती घुमाएं यानी कुल 14 बार धन्वंतरि जी की आरती करें.
  • आरती के बाद पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए माफी जरूर मांगें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 06, 2026 02:37 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.