2026 Ekadashi Vrat Calendar: साल 2026 में कब होगी कौन-सी एकादशी, यहां पाएं कंप्लीट एकादशी व्रत कैलेंडर
2026 Ekadashi Vrat Calendar: सनातन पंचांग के अनुसार, एक साल में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं, जिसे भगवान विष्णु के भक्त और श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव और निष्ठा से रखते हैं। आइए जानते हैं, वर्ष 2025 में किस महीने में कौन-सी एकादशी होगी? देखें कंप्लीट एकादशी व्रत कैलेंडर 2026।
Written By: Shyamnandan|Updated: Nov 13, 2025 11:59
Edited By : Shyamnandan|Updated: Nov 13, 2025 11:59
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2026 Ekadashi Vrat Calendar: हिन्दू धर्म में हर महीने की हर 11वीं तिथि को एकादशी व्रत रखा जाता है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो एकादशी व्रत होते हैं, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार साल में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं। भगवान विष्णु के भक्त इन एकादशी व्रतों का पालन उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं।
सामान्यतः एकादशी का व्रत 3 दिनों तक चलता है। व्रत से एक दिन पहले साधक स्नान-ध्यान और संकल्प के बाद केवल दोपहर में भोजन करते हैं ताकि एकादशी के दिन पेट में भोजन का कोई अंश न रहे। इसके बाद वे पूरे श्रद्धा और नियम से एकादशी तिथि को उपवास रखते हैं और अगले दिन निर्धारित मुहूर्त में पारण कर व्रत का समापन करते हैं।
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आपको बता दें, हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यह व्रत सभी प्रकार के पापों का नाश करता है और मनुष्य को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति कराता है। इसके प्रभाव से न केवल व्रत करने वाले को बल्कि उसके पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है। एकादशी का व्रत घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला होता है और जीवन में शुभ फल प्रदान करता है। कहा गया है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान महान पुण्य प्राप्त होता है।
आइए जानते हैं, साल 2025 में कब किस महीने में कौन-सी एकादशी होगी? यह नीचे एक कंप्लीट एकादशी कैलेंडर 2026 में साल की सभी 24 एकादशी को अंग्रेजी तारीख, दिन, महीना और पक्ष के साथ बताया गया है।
आपको बता दें कि कि हर तीन वर्ष में एक बार अधिक मास या मलमास आता है। इस विशेष माह में सामान्य 24 एकादशियों के अतिरिक्त दो और एकादशियां होती हैं। इन अतिरिक्त एकादशियों में शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी शामिल हैं। ये दोनों एकादशियां अत्यंत शुभ और पुण्यदायिनी मानी गई हैं और इनके व्रत से विशेष लाभ प्राप्त होता है।