बकरीद पर भूलकर भी न करें इन जानवरों की कुर्बानी, वरना नहीं होगी कुबूल! जानिए क्या कहते हैं इस्लाम के कड़े नियम

Bakra Eid Qurbani Rules: इस बार भारत में बकरा ईद 28 भी की है और सभी मुस्लिम बकरा ईद की तैयारियों में लग गए हैं. हालांकि, इस दौरान कुछ जानवर ऐसे हैं जिनकी कुर्बानी देना इस्लाम में मना है. 

Bakra Eid Qurbani Rules
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कुर्बानी के जानवर से जुड़े नियम- Image Credit- News24

Qurbani Kis Janwar Par Jaiz Hai: Eid al-Adha यानी बकरीद मुसलमानों का बेहद खास त्यौहार है. इस दिन सभी मुसलमान अल्लाह की राह में कुर्बानी देते हैं और जरूरतमंदों को गोश्त बांटते हैं, लेकिन इस्लाम में कुर्बानी के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं. इसका पालन करना जरूरी होता है, क्योंकि हर जानवर की कुर्बानी देना सही नहीं माना जाता. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती और कुर्बानी से जुड़े जरूरी नियम क्या हैं.

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कुर्बानी का असली मतलब क्या है?

कुर्बानी का असली मतलब क्या है?2 / 8

कुर्बानी सिर्फ जानवर कुर्बान करना नहीं है, बल्कि इंसानियत, मोहब्बत और अल्लाह के हुकुम के प्रति ईमानदारी है. वो ईमानदारी जिसे हजरत इब्राहिम ने अल्लाह पर जताया था. इसे भी पढ़ें- गर्मियों में कच्चा प्याज खाना चाहिए या नहीं? जानिए शरीर पर क्या असर होता है

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किन जानवरों की कुर्बानी दी जाती है? 

किन जानवरों की कुर्बानी दी जाती है? 3 / 8

ईद पर ओबकरा, भेड़, दुम्बा, गाय, भैंस और ऊंट की कुर्बानी दी जा सकती है. हालांकि, इसमें से कुछ जानवर सरकार के द्वारा प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी भी नहीं दी जा सकती.

किन जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती? 

किन जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती? 4 / 8

इस्लामिक किताब कुरान के मुताबिक, ऐसे जानवर (बकरे या भैंस) जिनमें चोट हो या कमजोर हो, उनकी कुर्बानी देना सही नहीं माना जाता. बाकी अंधा या एक आंख से कमजोर जानवर भी नहीं खरीदना चाहिए.

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बहुत ज्यादा बीमार जानवर

बहुत ज्यादा बीमार जानवर5 / 8

ऐसा जानवर जो गंभीर बीमार हो, कमजोर हो या चलने-फिरने में परेशानी महसूस करता हो, उसे कुर्बानी के लिए लायक नहीं माना जाता है. साथ ही, जो जानवर ठीक से चल न सके या बहुत ज्यादा लंगड़ा हो.

मुर्गे की कुर्बानी 

मुर्गे की कुर्बानी  6 / 8

मुसलामान आम दोनों में मुर्गा खाते हैं, लेकिन ईद वाले दिन इसकी कुर्बानी करना जायज नहीं है. इस्लाम में मुर्गे की कुर्बानी नहीं दी जाती, सिर्फ बकरा या भैंस की दी जाती है.

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मछली की कुर्बानी 

मछली की कुर्बानी 7 / 8

मछली भी इन्हीं में से एक है, जिसकी कुर्बानी ईद के मौके पर नहीं की जाती है. इस दौरान बकरे या किसी ताकतवर जानवर की कुर्बानी देना जायज है.

कुर्बानी के जानवर से जुड़े नियम 

कुर्बानी के जानवर से जुड़े नियम 8 / 8

कुर्बानी के बकरे या भेड़ की उम्र कम से कम 1 साल होनी चाहिए. गाय या भैंस की उम्र 2 साल मानी जाती है और ऊंट की उम्र कम से कम 5 साल होनी चाहिए. इसे भी पढ़ें- Bakra Eid 2026: मुसलमान बकरे की कुर्बानी क्यों देते हैं? जानिए वो दिल छू लेने वाली कहानी

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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