Bakra Eid 2026: मुसलमान बकरे की कुर्बानी क्यों देते हैं? जानिए वो दिल छू लेने वाली कहानी, जिसे सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं
Eid Ul Adha Qurbani Story: बकरा ईद सिर्फ बकरे या किसी जानवर की कुर्बानी का नाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजरत इब्राहिम और उनके बेटे हजरत इस्माइल का अल्लाह पर सच्चे एतबार है, जो यह बताता है कि हमें हर हाल में अल्लाह और उसके फैसलों पर राजी होना चाहिए.

Bakra Eid Story: इस बार बकरा ईद देशभर में 28 मई को मनाई जाएगी. यह मुसलमानों का खास त्योहार है, जिसे ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है. यह त्योहार कुर्बानी, सब्र और इंसानियत का संदेश देता है.हर साल दुनियाभर के मुसलमान इस दिन अल्लाह की राह में जानवर की कुर्बानी देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मुसलमान बकरे की कुर्बानी क्यों देते हैं और इसके पीछे क्या कहानी है? आइए इस लेख में जानते हैं कि बकरे की कुर्बानी क्यों दी जाती है.
क्या है बकरीद का असली मतलब?
2 / 6ईद-उल-अजहा अरबी का एक शब्द है, जिसका मतलब होता है कुर्बानी की ईद. यह त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है और इस दौरान हज भी किया जाता है. इसे भी पढ़ें- Expired Spices Signs: कहीं आपके मसाले एक्सपायर तो नहीं? इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
कुर्बानी के पीछे की इस्लामिक कहानी
3 / 6इस्लामिक किताब कुरान के मुताबिक, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने का फैसला किया. अल्लाह ने उन्हें ख्वाब में अपने सबसे प्यारे बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का आदेश दिया और हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म को मानने का फैसला किया.
फिर जानवर की कुर्बानी क्यों?
4 / 6जब हजरत इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे, तभी अल्लाह ने हजरत इस्माइल की जगह एक जानवर यानी दुंबा भेज दिया. इसके बाद से ही जानवर की कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हो गई.
कुर्बानी का असली संदेश क्या है?
5 / 6कुर्बानी का असली संदेश यह है कि अल्लाह की राह में अपनी पसंदीदा चीज भी कुर्बान करना पड़े तो कर देना चाहिए. साथ ही, यह सीख मिलती है कि इंसान को जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और दूसरों के दुख-दर्द में साथ खड़ा होना चाहिए.
गरीबों में बांटा जाता है गोश्त
6 / 6इस्लामिक परंपरा के मुताबिक, कुर्बानी के गोश्त तीन हिस्सों में बांटा जाता है. इसमें पहला हिस्सा अपने परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए रखा जाता है. इसे भी पढ़ें- कहीं आपका पति धोखा तो नहीं दे रहा? इन 5 संकेतों से लगाएं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता