Bakra Eid Story: इस बार बकरा ईद देशभर में 28 मई को मनाई जाएगी. यह मुसलमानों का खास त्योहार है, जिसे ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है. यह त्योहार कुर्बानी, सब्र और इंसानियत का संदेश देता है.हर साल दुनियाभर के मुसलमान इस दिन अल्लाह की राह में जानवर की कुर्बानी देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मुसलमान बकरे की कुर्बानी क्यों देते हैं और इसके पीछे क्या कहानी है? आइए इस लेख में जानते हैं कि बकरे की कुर्बानी क्यों दी जाती है.
कुर्बानी के पीछे की इस्लामिक कहानी

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इस्लामिक किताब कुरान के मुताबिक, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने का फैसला किया. अल्लाह ने उन्हें ख्वाब में अपने सबसे प्यारे बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का आदेश दिया और हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म को मानने का फैसला किया.
फिर जानवर की कुर्बानी क्यों?

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जब हजरत इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे, तभी अल्लाह ने हजरत इस्माइल की जगह एक जानवर यानी दुंबा भेज दिया. इसके बाद से ही जानवर की कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हो गई.
कुर्बानी का असली संदेश क्या है?

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कुर्बानी का असली संदेश यह है कि अल्लाह की राह में अपनी पसंदीदा चीज भी कुर्बान करना पड़े तो कर देना चाहिए. साथ ही, यह सीख मिलती है कि इंसान को जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और दूसरों के दुख-दर्द में साथ खड़ा होना चाहिए.