केला नेचुरल है या केमिकल से पका हुआ? इस ट्रिक से तुरंत मिनटों में चलेगा पता

Real Vs Chemically Ripened Banana: क्या आप जानते हैं बाजार में अब केमिकल से पकाकर केले बेचे जाते हैं जो आपकी सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं. यहां जानिए किस तरह इन केमिकल से पके केलों को पहचाना जा सकता है.

Real Vs Fake Banana
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Real Vs Fake Banana

Chemically Ripened Banana: भारत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है केला. केले स्वाद में तो अच्छे होते ही हैं साथ ही सेहत को भी कई फायदे देते हैं. ऐसे में मार्केट में केलों की डिमांड भी रहती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं इस ज्यादा मांग के कारण बाजार में केमिकल से पकाए हुए केले धड़ल्ले से बेचे जाते हैं. केमिकल से पकाए जाने के कारण केले का स्वाद और टेक्सचर तो बदलते ही हैं, साथ ही केमिकल से पका केला सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. ऐसे में यहां जानिए कैसे पहचानें केले को केमिकल से पकाया गया है या नहीं.

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केमिकल से क्यों पकाए जाते हैं केले

केमिकल से क्यों पकाए जाते हैं केले 2 / 7

केलों को केमिकल से पकाया जाता है जिससे कि बिना देरी किए केले बेचे जा सकें और मुनाफा पाया जा सके. ऐसे में केले पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलिन गैस के स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है.

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रंग को ध्यान से देखें

रंग को ध्यान से देखें 3 / 7

असली केले जब पकते हैं तो पीले रंग पर हल्के ब्राउन धब्बे भी दिखते हैं. इन्हें शुगर स्पॉट्स कहा जाात है. केमिकल से पकाए गए केले अप्राकृतिक रूप से पीले और चमकदार नजर आते हैं. इनपर ये ब्राउन स्पॉट्स नहीं होते हैं.

दिखती है चमक

दिखती है चमक 4 / 7

केमिकल से पके केलों पर चमक नजर आती है ये केले प्लास्टिक जैसे शाइनी नजर आते हैं या नियोन येलो दिखते हैं.

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टेक्सचर को देखें

टेक्सचर को देखें 5 / 7

नेचुरली पके हुए केले हल्के डल नजर आते हैं और अंदर से सॉफ्ट होते हैं. केमिकल वाले केले स्मूद और स्लिपरी होते हैं और इनका टेक्सचर नेचुरल केले जैसा खुरदुरा नहीं दिखता है. ये मोटे दिखते हैं और कड़क होते हैं.

खुशूब से पहचानें

खुशूब से पहचानें 6 / 7

असली केलों से वॉर्म और मीठी सी खुशबू आती है, खासकर इसके स्टेम पर फ्लोरल अरोमा होता है. केमिकल से पके केले से केमिकल की महक आती है.

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स्टेम दिखेगी अलग

स्टेम दिखेगी अलग 7 / 7

केमिकल से पके केले की स्टेम ब्राउन नजर आने के बजाय ब्राइट ग्रीन कलर की नजर आती है. यह केला अप्राकृतिक रूप से ताजा दिखता है. यह भी पढ़ें - बारिश के मौसम में कौन सी सब्जियां नहीं खानी चाहिए? फूड पॉइजनिंग होते नहीं लगेगी देर अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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