Chemically Ripened Banana: भारत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है केला. केले स्वाद में तो अच्छे होते ही हैं साथ ही सेहत को भी कई फायदे देते हैं. ऐसे में मार्केट में केलों की डिमांड भी रहती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं इस ज्यादा मांग के कारण बाजार में केमिकल से पकाए हुए केले धड़ल्ले से बेचे जाते हैं. केमिकल से पकाए जाने के कारण केले का स्वाद और टेक्सचर तो बदलते ही हैं, साथ ही केमिकल से पका केला सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. ऐसे में यहां जानिए कैसे पहचानें केले को केमिकल से पकाया गया है या नहीं.
केमिकल से क्यों पकाए जाते हैं केले

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केलों को केमिकल से पकाया जाता है जिससे कि बिना देरी किए केले बेचे जा सकें और मुनाफा पाया जा सके. ऐसे में केले पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलिन गैस के स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है.
रंग को ध्यान से देखें

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असली केले जब पकते हैं तो पीले रंग पर हल्के ब्राउन धब्बे भी दिखते हैं. इन्हें शुगर स्पॉट्स कहा जाात है. केमिकल से पकाए गए केले अप्राकृतिक रूप से पीले और चमकदार नजर आते हैं. इनपर ये ब्राउन स्पॉट्स नहीं होते हैं.
दिखती है चमक

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केमिकल से पके केलों पर चमक नजर आती है ये केले प्लास्टिक जैसे शाइनी नजर आते हैं या नियोन येलो दिखते हैं.
टेक्सचर को देखें

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नेचुरली पके हुए केले हल्के डल नजर आते हैं और अंदर से सॉफ्ट होते हैं. केमिकल वाले केले स्मूद और स्लिपरी होते हैं और इनका टेक्सचर नेचुरल केले जैसा खुरदुरा नहीं दिखता है. ये मोटे दिखते हैं और कड़क होते हैं.
खुशूब से पहचानें

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असली केलों से वॉर्म और मीठी सी खुशबू आती है, खासकर इसके स्टेम पर फ्लोरल अरोमा होता है. केमिकल से पके केले से केमिकल की महक आती है.